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Supreme Court: बुजुर्गों का सम्मान-सुरक्षा नहीं... संपत्ति से बेदखल हो सकते हैं बच्चे; अदालत के आदेश में क्या?

Thu, 20 Aug 2026 09:41 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 20 Aug 2026 09:41 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बुजुर्गों के सम्मान की सुरक्षा के लिए ट्रिब्यूनल बच्चों को संपत्ति से
निकालने का आदेश दे सकता है। भरण-पोषण के एक मामले में लखनऊ निवासी रवि कांत गुप्ता की अपील पर यह फैसला आया है। इस मामले में अपनी मां के साथ बुरा बर्ताव करने वाले बेटे के खिलाफ पिता ने खुद शिकायत की थी। जानिए पूरा मामला

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Supreme Court Maintenance Case Lucknow Ravi Kant Gupta Tribunal Right No property to children denied dignity
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत गठित ट्रिब्यूनल जरूरत पड़ने पर बच्चों को बुजुर्ग माता-पिता की संपत्ति से बाहर करने का आदेश दे सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा आदेश वरिष्ठ नागरिक के भरण-पोषण, सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के लिए दिया जा सकता है।

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किस मामले में फैसला आया?
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने यह फैसला लखनऊ के विकास नगर निवासी रवि कांत गुप्ता की अपील पर सुनाया। गुप्ता की 81 वर्षीय मां को घर छोड़कर वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर होना पड़ा था। गुप्ता ने 2022 में अपने बेटे को अपनी स्व-अर्जित संपत्ति से हटाने के लिए जिला प्रशासन का रुख किया था। उप-मंडल मजिस्ट्रेट ने बेटे को घर से निकालने का आदेश दिया था, जिसे जिला मजिस्ट्रेट ने भी बरकरार रखा। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि 2007 का कानून अधिकारियों को बेदखली का अधिकार नहीं देता और दोनों आदेश रद्द कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले को पलटते हुए बेदखली का आदेश बहाल कर दिया।
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कानून किसी संस्था को अधिकार के साथ उसे लागू करने की शक्ति देता है
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ट्रिब्यूनल के पास बुजुर्ग के रखरखाव यानी भरण-पोषण और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेदखली का आदेश देने की शक्ति है। पीठ ने कहा, जब कानून किसी संस्था को कोई अधिकार देता है, तो उस अधिकार को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाने की शक्ति भी उसमें निहित मानी जाती है
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क्या हर मामले में बेटा-बेटी को निकाला जा सकता है?
पीठ ने कहा, माता-पिता की शिकायत मिलते ही हर बच्चे को घर से निकाल दिया जाएगा। बेदखली का उद्देश्य बुजुर्ग की देखभाल, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने एस वनीता, समतोला देवी और कमलकांत मिश्रा मामले में अपने पहले के फैसलों का भी उल्लेख किया।


गरिमापूर्ण जीवन की भावना ही कानून का मुख्य आधार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी सभ्य समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने बुजुर्गों को कितना सम्मान, सुरक्षा और गरिमा देता है। संविधान के अनुच्छेद 21 में गरिमापूर्ण जीवन और अनुच्छेद 41 में कमजोर वर्गों के संरक्षण की भावना भी इस कानून के पीछे महत्वपूर्ण आधार है। पीठ ने कहा, संपत्ति पर अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन बुजुर्ग माता-पिता की सुरक्षा और सम्मान की कीमत पर नहीं।

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