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President Election: राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार के संबंध में प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह स्वस्थ प्रथा नहीं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 29 Jun 2022 04:15 PM IST
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सार

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला की अवकाश पीठ इस मुद्दे पर दिल्ली निवासी बाम बम महाराज नौहटिया और आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले की मूल निवासी डॉ. मांडती तिरुपति रेड्डी की अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। 

supreme court refuses to entertain pleas challenging validity of legal scheme for election of president
Supreme Court - फोटो : ANI
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक कानूनी योजना की वैधता को चुनौती देने वाली दो अलग-अलग याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया जिनमें परिकल्पना की गई थी कि राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार को कम से कम 50 सांसदों या विधायकों द्वारा प्रस्तावक के रूप में और पचास को समर्थकों के रूप में सदस्यता लेनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि चुनाव के समय में ऐसे मामले दर्ज करना एक स्वस्थ प्रथा नहीं है। 
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न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला की अवकाश पीठ इस मुद्दे पर दिल्ली निवासी बाम बम महाराज नौहटिया और आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले की मूल निवासी डॉ. मांडती तिरुपति रेड्डी की अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। 
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याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि प्रावधान, विशेष रूप से राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1952 की धारा 5 बी (1) (ए) एक व्यक्ति को राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से रोकता है अगर उम्मीदवारी पर पचास सांसदों द्वारा प्रस्तावक और 50 द्वितीयक के रूप में हस्ताक्षर नहीं किए जाते हैं। 

अदालत ने याचिकाकर्ता को बताया 'मौसमी कार्यकर्ता'

2007 से राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का असफल प्रयास कर रहे याचिकाकर्ता नौहटिया की याचिका पर विचार करते हुए पीठ ने उन्हें एक मौसमी कार्यकर्ता करार दिया जो शीर्ष पद पर चुनाव लड़ने के लिए हर पांच साल में जागते हैं।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, आपका पहला प्रतिनिधित्व 2007 में दिखा और अगले पांच साल तक आप कहीं छिपे हुए थे। जब राष्ट्रपति चुनाव आते हैं तब आप सक्रिय हो जाते हो और इसलिए मैंने कहा कि आप एक मौसमी कार्यकर्ता हैं। पीठ ने नौहटिया के वकील को याचिका वापस लेने के लिए कहा।

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को इन सभी वर्षों में प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने से किसने रोका, जबकि उन्होंने 2007 में खुद ही मैदान में उतरना शुरू कर दिया था।

एक विशेष समय में दायर नहीं करते याचिका : अदालत
पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि आप इस प्रकार की याचिकाएं एक विशेष समय में दायर नहीं करते हैं। यह एक स्वस्थ प्रथा नहीं है कि चुनाव की घोषणा के बाद आप एक कार्यकर्ता बन जाते हैं। 

दूसरी याचिका में रेड्डी ने आरोप लगाया था कि उन्हें लोकसभा में निर्वाचन अधिकारी द्वारा राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की अनुमति नहीं दी गई।

याचिकाकर्ता (रेड्डी) की शिकायत यह है कि रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) (लोक सभा महासचिव) ... ने उन्हें भारत के राष्ट्रपति के आगामी चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अनुमति नहीं दी है। याचिकाकर्ता को ऐसा करने की अनुमति नहीं दी गई क्योंकि माना जाता है कि उसका नामांकन फॉर्म 1952 के अधिनियम में निहित अनिवार्य वैधानिक शर्तों का पालन नहीं करता है।

अदालत ने कहा, "इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले नामांकन पत्र 1952 के अधिनियम की धारा 5 बी (1) (ए) के अनुरूप नहीं हैं। प्रकरण को दृष्टिगत रखते हुए याचिकाकर्ता के नामांकन प्रपत्र को अस्वीकार करने से कोई कानूनी दुर्बलता नहीं होती है और इस न्यायालय के हस्तक्षेप का कोई मामला नहीं बनता है।"

18 जुलाई को होगा राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान
देश का 16वां राष्ट्रपति चुनाव 18 जुलाई को होना है और वोटों की गिनती मतदान के तीन दिन बाद होगी। द्रौपदी मुर्मू और यशवंत सिन्हा क्रमशः सत्तारूढ़ एनडीए और यूपीए के नेतृत्व वाले विपक्षी दलों के उम्मीदवारों के रूप में शीर्ष पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।

निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 25 जुलाई को पद छोड़ने वाले हैं। राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है जिसमें लोकसभा, राज्यसभा और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं। वर्तमान में, निर्वाचक मंडल में 776 सांसद और 4,123 विधायक शामिल हैं।
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