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राजा सिर्फ नाम के, उसकी कोई प्रजा नहीं, शरीयत के मुताबिक बंटेगी नवाब रजा अली खां की संपत्ति : कोर्ट

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Thu, 01 Aug 2019 06:12 AM IST
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Supreme court says Raja is just a name He has no people
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देश के विभाजन के वक्त भारत के साथ रहने वाले रजवाड़ों के ‘राजा’ द्वारा घोषित निजी संपत्तियों के हकदार सिर्फ उसकी ‘गद्दी’ संभालने वाले ही नहीं, बल्कि उसके तमाम वारिस हैं। 
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कोर्ट ने कहा कि यह ऐसी ’गद्दी’ है जिसका न कोई साम्राज्य है और न प्रजा। ऐसे रजवाड़ों के राजाओं की निजी संपत्तियों का बंटवारा उस पर लागू कानून या पर्सनल लॉ के तहत होगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने रामपुर रियासत के अंतिम शासक नवाब रजा अली खां की संपत्ति का बंटवारा शरीअत (मुस्लिम पर्सनल लॉ) के आधार पर करने का फैसला सुनाया।
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चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि भारत में विलय के बाद रजवाड़ों के शासक राजा नहीं रहे। इनकी संप्रभुता और सर्वोच्चता नहीं रही। निजी संपत्तियों के अलावा उनकी कोई भूमि नहीं। वे सिर्फ नाम के राजा हैं। दरअसल नवाब रजा अली खां की संपत्ति को लेकर 52 साल से विवाद चल रहा है। 

नवाब ने भारत में विलय के बाद अपने हिस्से की पांच संपत्तियां छोड़ी थीं। उनके निधन के बाद उनके बड़े पुत्र मुर्तजा खां ने संपत्तियों पर दावा पेश कर कब्जा कर लिया। विवाद निचली अदालतों से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अंतिम शासक के दोनों बेटे और उनके वारिस संपत्ति के हकदार होंगे।

अब सामान्य नागरिक हैं

इससे पहले रामपुर रियासत की ओर से दलील दी गई थी कि नवाब की संपत्ति सामान्य नागरिक की संपत्ति नहीं, बल्कि ‘गद्दी’ से संबद्ध है। कोर्ट ने यह दलील खारिज करते हुए कहा, ऐसे रजवाड़ों को संविधान के प्रावधानों चलते प्रिवी पर्स, निजी संपत्ति और विशेषाधिकार का फायदा मिला, अन्यथा ये सामान्य नागरिक हैं। 

कोर्ट ने चल संपत्तियों के बंटवारे के लिए ट्रायल कोर्ट को कमिश्नर नियुक्त करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट चाहे तो अचल संपत्तियों के निपटारे के लिए भी कमिश्नर नियुक्त करे। इसके साथ ही शीर्ष कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को बदल दिया जिसमें कहा गया था कि राजा अली खान की संपत्तियों पर उनके बाद ‘गद्दी’ संभालने वाले का अधिकार है।
 
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