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Supreme Court: 'शादी करके बहू और उसके परिवार का अपमान क्यों?' दहेज प्रताड़ना मामले में अदालत की सख्त टिप्पणी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Fri, 29 May 2026 05:37 PM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि शादी के बाद बहू और उसके परिवार का अपमान करना अस्वीकार्य है। अदालत ने कहा कि समाज में यह संदेश जाना चाहिए कि दहेज के लिए मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना बर्दाश्त नहीं होगी। छत्तीसगढ़ के दहेज मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
दहेज प्रताड़ना मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
दहेज प्रताड़ना और महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि आखिर लड़के शादी क्यों करते हैं, अगर बाद में लड़की और उसके परिवार का अपमान ही करना होता है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि समाज में यह संदेश जाना चाहिए कि बहू और उसके परिवार को प्रताड़ित करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ छत्तीसगढ़ के एक दहेज मौत मामले की सुनवाई कर रही थी। मामला एक महिला की शादी के तीन साल के भीतर संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगने से मौत से जुड़ा था। अदालत ने कहा कि दहेज के लिए मानसिक और आर्थिक दबाव डालना बेहद गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में सख्त संदेश देना जरूरी है।
क्या था पूरा मामला और अदालत ने क्या कहा?
यह मामला वर्ष 2010 का है। आरोप था कि महिला के पति और ससुराल वालों ने लगातार दहेज की मांग की। परिवार से नकद रकम और कार मांगी जा रही थी। अदालत को बताया गया कि महिला के परिवार ने कई बार पैसे देकर समझौता करने की कोशिश की, लेकिन प्रताड़ना बंद नहीं हुई। बाद में महिला की फांसी लगने से मौत हो गई। मेडिकल रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना बताई गई। ट्रायल कोर्ट ने माना कि शादी के सात साल के भीतर असामान्य मौत हुई और उसके पहले लगातार प्रताड़ना दी गई। इसी आधार पर दहेज मृत्यु का मामला साबित माना गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लड़की के परिवार को भिखारी कहना और लगातार पैसे मांगना बेहद शर्मनाक है।
ये भी पढ़ें- 'एनटीए में 16 नए वरिष्ठ पद सृजित किए': NTA का SC में हलफनामा, बताया नीट लीक के बाद सुधार के लिए क्या कदम उठाए
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किस आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में राहत मांगी थी?
मृत महिला के देवर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर खुद को राहत देने की मांग की थी। उसके वकील ने दलील दी कि उसके खिलाफ केवल आईपीसी की धारा 498ए के तहत मामला बनाया गया था और अपराध साबित नहीं होता। लेकिन अदालत इस दलील से सहमत नहीं हुई। जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी को खुश होना चाहिए कि उसे केवल तीन साल की सजा मिली है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अक्सर बहू और उसके परिवार को आर्थिक रूप से निचोड़ने की कोशिश की जाती है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समाज में दहेज प्रताड़ना को सामान्य मान लिया गया है, जो बेहद खतरनाक स्थिति है। अदालत ने कहा कि पढ़े-लिखे परिवारों में भी बहुओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा कि यह मामला दिखाता है कि शिक्षित लोग भी महिलाओं के साथ अमानवीय व्यवहार कर रहे हैं। अदालत ने साफ कहा कि दहेज को लेकर होने वाली प्रताड़ना और आत्महत्या के मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती।
क्यों अहम माना जा रहा है सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि दहेज प्रताड़ना के मामलों में सख्त रुख जरूरी है, ताकि समाज में गलत संदेश न जाए। अदालत की टिप्पणी को महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मामलों में बड़ा संदेश माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दहेज प्रथा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और मजबूत होगी।
क्या था पूरा मामला और अदालत ने क्या कहा?
यह मामला वर्ष 2010 का है। आरोप था कि महिला के पति और ससुराल वालों ने लगातार दहेज की मांग की। परिवार से नकद रकम और कार मांगी जा रही थी। अदालत को बताया गया कि महिला के परिवार ने कई बार पैसे देकर समझौता करने की कोशिश की, लेकिन प्रताड़ना बंद नहीं हुई। बाद में महिला की फांसी लगने से मौत हो गई। मेडिकल रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना बताई गई। ट्रायल कोर्ट ने माना कि शादी के सात साल के भीतर असामान्य मौत हुई और उसके पहले लगातार प्रताड़ना दी गई। इसी आधार पर दहेज मृत्यु का मामला साबित माना गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लड़की के परिवार को भिखारी कहना और लगातार पैसे मांगना बेहद शर्मनाक है।
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मृत महिला के देवर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर खुद को राहत देने की मांग की थी। उसके वकील ने दलील दी कि उसके खिलाफ केवल आईपीसी की धारा 498ए के तहत मामला बनाया गया था और अपराध साबित नहीं होता। लेकिन अदालत इस दलील से सहमत नहीं हुई। जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी को खुश होना चाहिए कि उसे केवल तीन साल की सजा मिली है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अक्सर बहू और उसके परिवार को आर्थिक रूप से निचोड़ने की कोशिश की जाती है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समाज में दहेज प्रताड़ना को सामान्य मान लिया गया है, जो बेहद खतरनाक स्थिति है। अदालत ने कहा कि पढ़े-लिखे परिवारों में भी बहुओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा कि यह मामला दिखाता है कि शिक्षित लोग भी महिलाओं के साथ अमानवीय व्यवहार कर रहे हैं। अदालत ने साफ कहा कि दहेज को लेकर होने वाली प्रताड़ना और आत्महत्या के मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती।
क्यों अहम माना जा रहा है सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि दहेज प्रताड़ना के मामलों में सख्त रुख जरूरी है, ताकि समाज में गलत संदेश न जाए। अदालत की टिप्पणी को महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मामलों में बड़ा संदेश माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दहेज प्रथा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और मजबूत होगी।