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ED: सिंगापुर से लकड़ी का फर्जी आयात, जाली 'बिल ऑफ एंट्री' व 'बिल ऑफ लैडिंग', बैंकों को 155 करोड़ का नुकसान
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Fri, 29 May 2026 08:03 PM IST
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सार
फर्जी लकड़ी आयात और बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि जाली दस्तावेजों के जरिए बैंकों से 155.21 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। आरोपी दीपक सिंगला को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। ईडी ने दिल्ली और गोवा में छापेमारी कर करोड़ों रुपये की नकदी, विदेशी मुद्रा और कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं।
कैसे हुआ फर्जी आयात का खेल?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
चंडीगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय ने दीपक सिंगला को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत पिछले दिनों गिरफ्तार किया था। राउज एवेन्यू कोर्ट, नई दिल्ली से आरोपी का ट्रांजिट रिमांड लिया गया। इसके बाद पंचकुला स्थित विशेष पीएमएलए कोर्ट ने भी 6 दिन की रिमांड दे दिया। इसके बाद, दीपक सिंगला को 26 मई को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस मामले में सिंगापुर से भारत में लकड़ी के फर्जी आयात के दस्तावेज तैयार किराए गए। आरोपियों ने बैंकों को नुकसान पहुंचाने के लिए जाली 'बिल ऑफ एंट्री' व 'बिल ऑफ लैडिंग' बनाए गए। इससे बैंकों को 155.21 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
ईडी ने सीबीआई, बीएसएफबी, नई दिल्ली द्वारा मेसर्स महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशकों और अन्य के खिलाफ आईपीसी, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों के लिए दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की है। यह मामला फिनैकल में संबंधित प्रविष्टियों के बिना अनधिकृत स्विफ्ट संशोधनों द्वारा विदेशी साख (एफएलसी) में धोखाधड़ी से वृद्धि करने से संबंधित है, जिससे ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और कंसोर्टियम बैंकों को लगभग 155.21 करोड़ रुपये का गलत नुकसान हुआ।
ये भी पढ़ें- Explainer: क्या रिजर्व बैंक ला रहा है प्लास्टिक के नोट? जानिए मैसूर प्रिंटिंग प्रेस में हुए परीक्षण का पूरा सच
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ईडी की जांच में क्या पता चला?
ईडी की जांच में पता चला है कि महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड ने भारत और सिंगापुर में संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों के साथ मिलकर, लकड़ी के किसी भी वास्तविक आयात के बिना, जाली एफएलसी (फ्लोरिड फंक्शनल लाइसेंस) के माध्यम से लगभग 195.02 करोड़ रुपये की धनराशि धोखाधड़ी से हस्तांतरित की। सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा किए गए सत्यापन से यह स्थापित हुआ है कि बैंकों में जमा किए गए बड़ी संख्या में बिल ऑफ एंट्री और बिल ऑफ लैडिंग जाली और मनगढ़ंत थे।
अमेजन एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, महेश टिम्बर सिंगापुर प्राइवेट लिमिटेड, ट्रैफिक मीडिया इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बीवीएम शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड और पर्ल मैरीटाइम प्राइवेट लिमिटेड जैसी शिपिंग फर्मों का इस्तेमाल सिंगापुर से भारत में लकड़ी के फर्जी आयात का भ्रम पैदा करने के लिए किया गया था। इसका मकसद ओबीसी बैंक को इस तरह के फर्जी आयात के बदले में सिंगापुर को बढ़ी हुई कीमत के एफएलसी खोलने और हस्तांतरित करने के लिए हेराफेरी करना था।
कौन है आरोपी?
जांच के दौरान आरोपी दीपक सिंगला की भूमिका प्रमुखता से सामने आई है। वे अशोक कुमार मित्तल और रमन सिंघल के करीबी सहयोगी हैं। ये लोग संबंधित अवधि के दौरान मेसर्स महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स महेश रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स ट्रैफिक मीडिया इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक/प्रमुख प्रबंधकीय पदों पर रहे थे। जांच में वास्तविक आयात न होने के बावजूद आयातित लकड़ी की कथित बिक्री और खरीद से संबंधित फर्जी लेनदेन का खुलासा हुआ है।
आगे की जांच में हरीश सिंगला की संलिप्तता का भी पता चला है, जो मेसर्स महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड को गारंटी और वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली संस्थाओं से जुड़े थे। अशोक कुमार मित्तल द्वारा नियंत्रित कंपनियों में प्रमुख प्रबंधकीय पदों पर थे। इसके बाद 18 मई को दिल्ली और गोवा में दीपक सिंगला, आयुष तिवारी, अमरीक सिंह गिल और अन्य से जुड़े परिसरों पर पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत तलाशी अभियान चलाया गया। तलाशी के दौरान 2 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद हुई। पीएमएलए की संबंधित धाराओं के तहत 27.75 लाख 6000 सिंगापुर डॉलर के साथ-साथ आरोपी फर्मों के बहीखाते, आपत्तिजनक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं।
ईडी ने सीबीआई, बीएसएफबी, नई दिल्ली द्वारा मेसर्स महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशकों और अन्य के खिलाफ आईपीसी, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों के लिए दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की है। यह मामला फिनैकल में संबंधित प्रविष्टियों के बिना अनधिकृत स्विफ्ट संशोधनों द्वारा विदेशी साख (एफएलसी) में धोखाधड़ी से वृद्धि करने से संबंधित है, जिससे ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और कंसोर्टियम बैंकों को लगभग 155.21 करोड़ रुपये का गलत नुकसान हुआ।
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ईडी की जांच में क्या पता चला?
ईडी की जांच में पता चला है कि महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड ने भारत और सिंगापुर में संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों के साथ मिलकर, लकड़ी के किसी भी वास्तविक आयात के बिना, जाली एफएलसी (फ्लोरिड फंक्शनल लाइसेंस) के माध्यम से लगभग 195.02 करोड़ रुपये की धनराशि धोखाधड़ी से हस्तांतरित की। सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा किए गए सत्यापन से यह स्थापित हुआ है कि बैंकों में जमा किए गए बड़ी संख्या में बिल ऑफ एंट्री और बिल ऑफ लैडिंग जाली और मनगढ़ंत थे।
अमेजन एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, महेश टिम्बर सिंगापुर प्राइवेट लिमिटेड, ट्रैफिक मीडिया इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बीवीएम शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड और पर्ल मैरीटाइम प्राइवेट लिमिटेड जैसी शिपिंग फर्मों का इस्तेमाल सिंगापुर से भारत में लकड़ी के फर्जी आयात का भ्रम पैदा करने के लिए किया गया था। इसका मकसद ओबीसी बैंक को इस तरह के फर्जी आयात के बदले में सिंगापुर को बढ़ी हुई कीमत के एफएलसी खोलने और हस्तांतरित करने के लिए हेराफेरी करना था।
कौन है आरोपी?
जांच के दौरान आरोपी दीपक सिंगला की भूमिका प्रमुखता से सामने आई है। वे अशोक कुमार मित्तल और रमन सिंघल के करीबी सहयोगी हैं। ये लोग संबंधित अवधि के दौरान मेसर्स महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स महेश रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स ट्रैफिक मीडिया इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक/प्रमुख प्रबंधकीय पदों पर रहे थे। जांच में वास्तविक आयात न होने के बावजूद आयातित लकड़ी की कथित बिक्री और खरीद से संबंधित फर्जी लेनदेन का खुलासा हुआ है।
आगे की जांच में हरीश सिंगला की संलिप्तता का भी पता चला है, जो मेसर्स महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड को गारंटी और वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली संस्थाओं से जुड़े थे। अशोक कुमार मित्तल द्वारा नियंत्रित कंपनियों में प्रमुख प्रबंधकीय पदों पर थे। इसके बाद 18 मई को दिल्ली और गोवा में दीपक सिंगला, आयुष तिवारी, अमरीक सिंह गिल और अन्य से जुड़े परिसरों पर पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत तलाशी अभियान चलाया गया। तलाशी के दौरान 2 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद हुई। पीएमएलए की संबंधित धाराओं के तहत 27.75 लाख 6000 सिंगापुर डॉलर के साथ-साथ आरोपी फर्मों के बहीखाते, आपत्तिजनक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं।