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Supreme Court: आतंकी फंडिंग मामले में शबीर शाह को जमानत, धीमी सुनवाई पर भी सुप्रीम कोर्ट ने की बड़ी टिप्पणी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Tue, 17 Mar 2026 03:26 PM IST
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सार
Shabir Shah Custody Case: सुप्रीम कोर्ट ने आतंकी फंडिंग मामले में अलगाववादी नेता शबीर अहमद शाह को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई जल्दी पूरी होने की संभावना कम है और शाह लंबे समय से जेल में हैं। इसी आधार पर उन्हें राहत दी गई है। हालांकि अदालत ने सख्त शर्तें लगाई हैं। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं।
शबीर शाह को जमानत
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता शबीर अहमद शाह को आतंकी फंडिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई जल्दी पूरी होने की संभावना कम है और आरोपी लंबे समय से जेल में है। ऐसे में लगातार हिरासत में रखना व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को प्रभावित कर सकता है। अदालत ने हालांकि जमानत के साथ कई कड़ी शर्तें भी लगाई हैं।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने 12 मार्च के आदेश में कहा कि शबीर शाह जून 2019 से हिरासत में हैं और उनकी उम्र भी 74 वर्ष है। अदालत ने माना कि मुकदमे में अब तक बहुत कम प्रगति हुई है। ऐसे में लंबी अवधि तक जेल में रखना उचित नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह फैसला मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना लिया गया है।
अदालत ने जमानत क्यों दी?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी मामले में मुकदमे का निपटारा उचित समय में होने की संभावना नहीं है तो आरोपी को अनिश्चित काल तक जेल में रखना सही नहीं है। अदालत ने कहा कि लंबे समय तक हिरासत में रहना व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को प्रभावित कर सकता है। इसी आधार पर अदालत ने शबीर शाह को ट्रायल पूरा होने तक जमानत देने का फैसला किया।
ये भी पढ़ें- Kerala: केरल में त्योहारों से पहले मुख्यमंत्री विजयन ने गैस की कमी पर जताई चिंता, पीएम मोदी से की ये बड़ी मांग
जमानत के साथ क्या शर्तें लगाई गईं?
अदालत ने शबीर शाह पर कई सख्त शर्तें लगाई हैं। उन्हें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। पासपोर्ट जमा करना होगा और केवल एक मोबाइल या लैंडलाइन नंबर का ही इस्तेमाल करना होगा। इसके साथ ही उन्हें हर समय फोन चालू रखना होगा और हर दो सप्ताह में जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा।
मीडिया पर बयान देने पर भी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि शबीर शाह इस मामले पर मीडिया में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्हें अदालत में लिखित आश्वासन देना होगा कि जमानत के दौरान वे किसी भी तरह की अवैध गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होता है तो अभियोजन पक्ष जमानत रद्द कराने की मांग कर सकता है।
क्या है आतंकी फंडिंग का मामला?
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 2017 में इस मामले में कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोप है कि अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने और जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए फंड जुटाए गए थे। जांच एजेंसी के अनुसार यह पैसा पत्थरबाजी, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और भारत सरकार के खिलाफ साजिश जैसी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया। शबीर शाह पर हवाला के जरिए धन जुटाने और अलगाववादी आंदोलन को बढ़ावा देने का आरोप है।
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अदालत ने जमानत क्यों दी?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी मामले में मुकदमे का निपटारा उचित समय में होने की संभावना नहीं है तो आरोपी को अनिश्चित काल तक जेल में रखना सही नहीं है। अदालत ने कहा कि लंबे समय तक हिरासत में रहना व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को प्रभावित कर सकता है। इसी आधार पर अदालत ने शबीर शाह को ट्रायल पूरा होने तक जमानत देने का फैसला किया।
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जमानत के साथ क्या शर्तें लगाई गईं?
अदालत ने शबीर शाह पर कई सख्त शर्तें लगाई हैं। उन्हें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। पासपोर्ट जमा करना होगा और केवल एक मोबाइल या लैंडलाइन नंबर का ही इस्तेमाल करना होगा। इसके साथ ही उन्हें हर समय फोन चालू रखना होगा और हर दो सप्ताह में जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा।
मीडिया पर बयान देने पर भी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि शबीर शाह इस मामले पर मीडिया में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्हें अदालत में लिखित आश्वासन देना होगा कि जमानत के दौरान वे किसी भी तरह की अवैध गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होता है तो अभियोजन पक्ष जमानत रद्द कराने की मांग कर सकता है।
क्या है आतंकी फंडिंग का मामला?
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 2017 में इस मामले में कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोप है कि अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने और जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए फंड जुटाए गए थे। जांच एजेंसी के अनुसार यह पैसा पत्थरबाजी, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और भारत सरकार के खिलाफ साजिश जैसी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया। शबीर शाह पर हवाला के जरिए धन जुटाने और अलगाववादी आंदोलन को बढ़ावा देने का आरोप है।
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