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Supreme Court: 'आवारा कुत्ते' मामले में तीसरे दिन भी सुनवाई; अवैध प्रजनन-आयात और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे उठे

न्यूज डेस्क अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 09 Jan 2026 02:14 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट में 'आवारा कुत्ते' मामले की तीसरे दिन भी सुनवाई हुई। एडवोकेट महालक्ष्मी पावनी ने अवैध प्रजनन और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े विवादित मुद्दे उठाए, जबकि वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से दखल न देने की अपील की।

Supreme Court to Continue Hearing Stray Dogs Case Today Updates; NGOs Seek Modification
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में लगातार तीसरे दिन भी सुनवाई शुरू हुई। सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों और कार्यालय परिसरों में भटकते कुत्तों की समस्या पर ध्यान केंद्रित किया गया है। कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया शामिल हैं, मामले की सुनवाई हुई और शुक्रवार को करीब 1.50 घंटे सुनवाई चली। अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख 13 जनवरी रखी।

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कुत्ते रखने वाली महिलाओं पर होती है अभद्र टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट और एनीमल राइट्स एक्टिविस्ट महालक्ष्मी पावनी ने कहा कि कुछ लोग कुत्ते रखने वाली महिलाओं के बारे में अपमानजनक बातें करते हैं और उन्हें यह तक कहते हैं कि महिलाएं संतुष्टि के लिए कुत्तों के साथ सोती हैं।

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अभिषेक सिंघवी ने अदालत से दखल न देने की अपील की
इस दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से इस मामले में दखल न देने की अपील की। उन्होंने कहा कि कानून और नियम पहले से मौजूद हैं, इसलिए अदालत को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। सिंघवी ने यह भी कहा कि जब संसद जानबूझकर दखल नहीं देती, तो अदालत को भी इसमें नहीं जाना चाहिए। सिंघवी ने आगे बताया कि एमीकस क्यूरी (अदालत के सलाहकार) कानून के अच्छे जानकार होते हैं लेकिन किसी विशेष विषय के विशेषज्ञ नहीं। ऐसे मामलों में डोमेन एक्सपर्ट्स जैसे पशु, पर्यावरण या स्वास्थ्य विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाना चाहिए।



अवैध प्रजनन और विदेशी कुत्तों का अवैध आयात
अवारा कुत्तों के मामले की सुनवाई के दौरान, महालक्ष्मी पावनी ने बड़े पैमाने पर अवैध प्रजनन और विदेशी कुत्तों के अवैध आयात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिट बुल और हस्की नस्ल के कुत्तों को सड़कों पर छोड़ा जा रहा है। हालांकि, न्यायालय ने कहा कि यह मामला स्ट्री डॉग्स (अवारा कुत्तों) के मुद्दे से संबंधित नहीं है। कृपया उन मुद्दों पर ध्यान दें जिनसे हम निपट रहे हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून में उपलब्ध उपायों का पालन किया जाना चाहिए।

गुरुवार को सुनवाई में क्या-क्या हुआ?
शीर्ष अदालत में गुरुवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने दलील देते हुए कहा, 'दिल्ली में चूहे और बंदरों का भी खतरा है। कुत्तों को अचानक हटाने से क्या होता है? चूहों की आबादी बढ़ जाती है। कुत्ते संतुलन बनाए रखते हैं।' उनकी इस दलील पर न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने टिप्पणी की, 'क्या इसका आपस में कोई संबंध है? हमें बिल्लियों को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि वे चूहों की दुश्मन हैं।' इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हमने गली के हर कुत्ते को हटाने का निर्देश नहीं दिया है। उनके साथ नियमानुसार व्यवहार किया जाना चाहिए।



पीठ ने अपने पहले के निर्देशों को स्पष्ट करते हुए इस बात पर जोर दिया कि सड़कों से हर आवारा कुत्ते को हटाने का आदेश नहीं दिया गया था। नियमों के तहत उन्हें केवल संस्थागत इलाकों से हटाए जाने के निर्देश दिए गए थे।

बुधवार को सुनवाई में क्या-क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील देते हुए कहा था कि सभी कुत्तों को पकड़ना समाधान नहीं है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, 'यही बात गेटेड कम्युनिटी पर भी लागू होती है। गेटेड कम्युनिटी में कुत्ते को घूमने देना चाहिए या नहीं, यह समुदाय को तय करना होगा। मान लीजिए, 90 प्रतिशत निवासियों को लगता है कि यह बच्चों के लिए खतरनाक होगा, लेकिन 10 फीसदी कुत्ते रखने पर जोर देते हैं। कोई कल भैंस ला सकता है। वे कह सकते हैं कि मुझे भैंस का दूध चाहिए।'



सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा कोई प्रावधान होना चाहिए जिसके तहत गेटेड कम्युनिटी मतदान के जरिए फैसला ले सके। वकील वंदना जैन ने कहा, 'हम कुत्तों के खिलाफ नहीं हैं। हमें कुत्तों के खतरे और सार्वजनिक सुरक्षा को देखना होगा। 6.2 करोड़ कुत्तों की आबादी है और स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।' मामले की सुनवाई कल भी जारी रहेगी।

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