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Supreme Court: तमिलनाडु की 152 मेडिकल सीटों पर अदालत सख्त, राज्य सरकार को जारी किया नोटिस; क्यों छिड़ा विवाद?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 24 Jun 2026 03:25 PM IST
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सार

Tamil Nadu Medical Seats Controversy: तमिलनाडु की 152 खाली इन-सर्विस सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल सीटों को ऑल इंडिया कोटे में भेजने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। अदालत ने केंद्र और तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी डॉक्टरों को विशेषज्ञता मिलने से सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत होगी। आइए, विस्तार से पूरे मामले को समझते हैं...

Supreme Court tough stance 152 medical seats Tamil Nadu issues notice state government what spark controversy
मेडिकल सीट विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

तमिलनाडु में सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल की 152 खाली इन-सर्विस सीटों को ऑल इंडिया कोटे में सरेंडर किए जाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। शीर्ष अदालत ने बुधवार को इस मामले पर केंद्र सरकार, तमिलनाडु सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अगर सरकारी डॉक्टर उच्च चिकित्सा कौशल हासिल करते हैं तो वे निजी डॉक्टरों की तुलना में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर तरीके से मजबूत कर सकते हैं। इस मामले को जुलाई में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।



तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए राज्य की 152 खाली इन-सर्विस सुपर स्पेशियलिटी सीटों को ऑल इंडिया कोटे में स्थानांतरित न किया जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन सीटों को तीसरे दौर या मॉप-अप काउंसलिंग तक राज्य के इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक सरकारी डॉक्टर इन सीटों का लाभ उठा सकें।

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सरकारी डॉक्टरों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इन-सर्विस डॉक्टरों की श्रेणी अलग होती है, क्योंकि ये डॉक्टर एक साथ सेवा भी दे रहे होते हैं और पढ़ाई भी कर रहे होते हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि सरकारी डॉक्टर विशेषज्ञता हासिल करते हैं तो इसका सीधा लाभ सरकारी अस्पतालों और आम मरीजों को मिलेगा। अदालत ने इसी आधार पर केंद्र और तमिलनाडु सरकार से जवाब तलब किया है।

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152 सीटों को लेकर विवाद क्यों खड़ा हुआ?

याचिका में कहा गया है कि तमिलनाडु के मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए कुल 430 सुपर स्पेशियलिटी सीटें काउंसलिंग के लिए उपलब्ध थीं। इनमें से 215 सीटें सरकारी सेवा में कार्यरत डॉक्टरों के लिए आरक्षित थीं। हालांकि, काउंसलिंग के दूसरे दौर तक केवल 63 सीटों पर ही दाखिला हो सका, जबकि 152 सीटें खाली रह गईं। अब इन सीटों को ऑल इंडिया कोटे में भेजे जाने की आशंका है, जिसका विरोध किया जा रहा है।

याचिका में क्या मांग की गई है?

तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि दूसरे चरण की ऑल इंडिया काउंसलिंग पूरी होने तक इन सीटों को सरेंडर करने पर रोक लगाई जाए। इसके अलावा, यदि दूसरे चरण के बाद न्यूनतम अर्हता प्रतिशत 50 प्रतिशत से कम किया जाता है, तो तमिलनाडु के इन-सर्विस डॉक्टरों को तीसरे दौर या मॉप-अप राउंड में इन सीटों के लिए आवेदन करने की अनुमति दी जाए।

राजनीतिक विवाद में यह मामला कैसे बदला?

इस मुद्दे ने तमिलनाडु की राजनीति में भी हलचल मचा दी है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने 4 जून को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को पत्र लिखकर इन सीटों को ऑल इंडिया कोटे में सरेंडर होने से रोकने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि राज्य के सरकारी डॉक्टरों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, क्योंकि ये डॉक्टर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस मामले पर सभी की नजरें जुलाई में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
 

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