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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा नीट पेपर लीक छात्र आंदोलन पर बर्बरता मामला, पैलेट गन पर प्रतिबंध की अपील

Tue, 28 Jul 2026 02:54 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला। Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 28 Jul 2026 02:54 AM IST
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Supreme Court Updates plea filed to ban pellet gun post 20th July student protest crackdown other case hearing
सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स - फोटो : अमर उजाला

भारत में मेडिकल की पढ़ाई के लिए एडमिशन लेने से पहले राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित की जाने वाली प्रतियोगी परीक्षा- NEET के पेपर लीक का मुद्दा लगातार सुर्खियों में है। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है।नीट पेपर लीक के विरोध में हुए 'संसद चलो' मार्च के दौरान पैलेट गन से घायल हुए लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। एक पूर्व IPS अधिकारी और दो अन्य व्यक्तियों ने सोमवार को यह याचिका दाखिल की। इसमें नागरिक सभाओं को तितर-बितर करने के लिए पेलेट गन के उपयोग पर प्रतिबंध या उन्हें सेवामुक्त करने की मांग की गई है।

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याचिका यशोवर्धन आजाद, प्रशांत कुमार और शेख इरशाद मंसूरी ने अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर के माध्यम से दायर की। प्रशांत कुमार (25) ने बताया कि 20 जुलाई, 2026 को वह 'संसद चलो' मार्च में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी थे। उन्हें रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) कर्मियों की गोलीबारी से पेलेट की चोटें आईं, जबकि उनकी ओर से कोई उकसावा नहीं था। शेख इरशाद मंसूरी (26) ने कहा कि वह दिल्ली के कनॉट प्लेस में थे और उन्हें भी RAF की गोलीबारी से पेलेट की चोटें लगीं। याचिका में कहा गया कि दिल्ली पुलिस ने भीड़ प्रबंधन के लिए CRPF की RAF की सहायता ली। पुलिस और RAF कर्मियों ने आंसू गैस के गोले दागे, लाठीचार्ज किया और प्रदर्शनकारियों को कनॉट प्लेस की ओर धकेला। कोई पानी के तोपों का उपयोग नहीं हुआ, न ही बल प्रयोग की घोषणा की गई। प्रदर्शनकारियों के भागने के दौरान RAF कर्मियों ने अचानक पंप एक्शन गन से गोलीबारी की, जिससे याचिकाकर्ताओं को चोटें आईं।
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### पेलेट गन के उपयोग पर सवाल
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सभा की स्वतंत्रता का अधिकार सांविधानिक मौलिक अधिकार है। इसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(3) के तहत उचित प्रतिबंधों से ही सीमित किया जा सकता है। प्रतिबंधों को आवश्यकता और आनुपातिकता के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों में निर्धारित हैं। उनका तर्क है कि प्रोजेक्टाइल एक्शन गन शांतिपूर्ण सभाओं के लिए अनुपयुक्त हैं।
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### मुआवजे और उपचार की मांग
याचिका में कहा गया कि पेलेट की अप्रत्याशित प्रक्षेपवक्र उन्हें नागरिक सभाओं के लिए खतरनाक उपकरण बनाती है। पेलेट का तंत्र उन्हें भीड़ नियंत्रण के लिए वैध विकल्प होने से अयोग्य ठहराता है। यह 'आवश्यक बल की न्यूनतम मात्रा' के भीतर नहीं आ सकता है। याचिकाकर्ताओं ने पेलेट गन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने 20 जुलाई को दिल्ली में पेलेट की चोटों के सभी पीड़ितों के लिए मुआवजे और पूर्ण चिकित्सा उपचार की भी मांग की।

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