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क्या एनडीए के साथ जाएगा NCPI?: टीएमसी के बागी सांसद ने सीएम शुभेंदु से की मुलाकात; बंगाल में होने वाला है खेला

Tue, 28 Jul 2026 01:45 AM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 28 Jul 2026 01:45 AM IST
सार

लोकसभा सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ बंद कमरे में बैठक की। यह बैठक एनसीपीआई सांसदों के नई दिल्ली में NDA की बैठक में शामिल होने से एक दिन पहले हुई, जिससे पार्टी के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

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TMC rebel MP Sudip Bandyopadhyay meets Suvendu Adhikari NCPI MPs get NDA meet invite
सुदीप बंद्योपाध्याय - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और पूर्व में टीएमसी और वर्तमान में एनसीपीआई सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय की बंद कमरे में हुई मुलाकात ने बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। यह बैठक ऐसे समय हुई, जब एनसीपीआई सांसदों को एनडीए की बैठक में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। इससे BJP और NCPI के बीच संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि बैठक के एजेंडे पर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

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कौन हैं सुदीप बंद्योपाध्याय?
सुदीप बंद्योपाध्याय उन 20 बागी टीएमसी सांसदों में शामिल थे, जिन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के कुछ सप्ताह बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी से अलग होकर कम जानी-मानी नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर लिया था।
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कहां हुई बैठक?
सोमवार शाम राज्य सचिवालय 'नबान्न' में हुई करीब एक घंटे की यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि  भाजपा सूत्रों के अनुसार, सुवेंदु अधिकारी ने आखिरी समय पर राष्ट्रीय राजधानी का अपना दौरा रद्द कर दिया था।  बंद्योपाध्याय और अधिकारी के बीच हुई बातचीत के विषय पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
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दिल्ली नहीं जा पाने की वजह क्या बताई गई?
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री अधिकारी ने कुछ वरिष्ठ एनसीपीआई सांसदों से फोन पर बात कर बताया कि कुछ अज्ञात कारणों से वे दिल्ली नहीं जा पाएंगे। बाद में एनसीपीआई में शामिल हुए तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों के बयानों के आधार पर यह खबर सामने आई थी कि अधिकारी दिल्ली में 20 बागी सांसदों से मिलने वाले थे।

एनडीए बैठक से पहले क्या बदला?
इस प्रस्तावित मुलाकात ने संसदीय समूह के भविष्य को लेकर अटकलों को और हवा दी, जिसमें भाजपा के साथ उनके संभावित करीबी गठबंधन की चर्चा भी शामिल रही। एक वरिष्ठ एनसीपीआई सांसद ने पीटीआई को बताया कि अधिकारी और पार्टी सांसदों के बीच प्रस्तावित बैठक टाल दी गई है। हालांकि सांसद तय कार्यक्रम के अनुसार NDA की बैठक में शामिल होंगे।

एनडीए का न्योता क्यों बना चर्चा का विषय?
ये घटनाक्रम तब सामने आए जब एनसीपीआई सांसदों को राष्ट्रीय राजधानी में एनडीए की बैठक में शामिल होने का निमंत्रण मिला, जिससे केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन के साथ इस नई पार्टी के संबंधों को लेकर अटकलों को और बल मिला।

अधिकारी सीधे नबान्न क्यों पहुंचे?
अधिकारी ने कोलकाता लौटने से पहले दिन का समय उत्तर बंगाल में बिताया था। हवाई अड्डे से वे सीधे 'नबान्न' पहुंचे, जहां लगभग उसी समय बंद्योपाध्याय भी पहुंच गए। दोनों नेताओं की मुलाकात तुरंत राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई, हालांकि किसी भी पक्ष ने बैठक के नतीजों या बातचीत के मुद्दों पर कोई टिप्पणी नहीं की।

राष्ट्रीय राजनीति में एनसीपीआई की एंट्री कैसे हुई?
कम जानी-मानी एनसीपीआई तब राष्ट्रीय राजनीति की सुर्खियों में आई, जब 20 सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर इस पार्टी का दामन थाम लिया। अलग होने के बाद बंद्योपाध्याय और अन्य सांसदों ने नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अलग संसदीय समूह के रूप में औपचारिक मान्यता देने की मांग की। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि उन्हें लोकसभा में एनडीए के सहयोगी दलों के साथ सीटें आवंटित की जाएं, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ जुड़ना चाहते हैं।


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अगर मान्यता मिल गई तो एनडीए कितनी मजबूत होगी?
यदि 20 सदस्यों की मौजूदा संख्या के साथ पार्टी को मान्यता मिल जाती है, तो एनसीपीआई लोकसभा में NDA के सबसे बड़े सहयोगी दलों में से एक बन जाएगी। पार्टी पहले ही सत्तारूढ़ गठबंधन के साथ अपनी बढ़ती नजदीकी के संकेत दे चुकी है। उसने संसद के मानसून सत्र से पहले 19 जुलाई को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भी हिस्सा लिया था।

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