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नीट पेपर लीक पर बयानबाजी कर फंसे BJP एमलएसी: हाईकोर्ट ने सख्त कार्रवाई करने पर लगाई रोक; क्या है पूरा मामला?
Tue, 28 Jul 2026 03:32 AM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, बंगलूरू
पीटीआई, बंगलूरू
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Tue, 28 Jul 2026 03:32 AM IST
सार
कर्नाटक हाई कोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह भाजपा विधान परिषद सदस्य सी.टी. रवि के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई न करे। यह मामला नीट पेपर लीक के विरोध में दिए गए उनके कथित भड़काऊ और अपमानजनक बयान को लेकर दर्ज FIR से जुड़ा है।
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कर्नाटक हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कर्नाटक हाई कोर्ट ने NEET पेपर लीक पर कथित विवादित टिप्पणी को लेकर भाजपा एमएलसी सी.टी. रवि के खिलाफ दर्ज एफआईआर मामले में राज्य सरकार को फिलहाल कोई सख्त कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। रवि का कहना है कि उन्होंने किसी समुदाय को निशाना नहीं बनाया और उनके खिलाफ राजनीतिक दबाव में मामला दर्ज किया गया है। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।
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क्या कहा हाई कोर्ट ने?
जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने यह निर्देश सी.टी. रवि की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। रवि ने अपनी याचिका में चिकमगलूरु टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित की है।
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एफआईआर किस शिकायत पर दर्ज हुई?
यह एफआईआर जामिया कमेटी के अध्यक्ष मुदस्सिर पाशा की शिकायत के आधार पर शनिवार को चिकमगलूरु टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। सी.टी. रवि के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह धारा धर्म, नस्ल, भाषा, जाति या समुदाय के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच नफरत, दुर्भावना या वैमनस्य फैलाने के उद्देश्य से झूठे बयान, अफवाह या रिपोर्ट तैयार करने, प्रकाशित करने या प्रसारित करने से संबंधित है।
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विवादित बयान कब और कहां दिया गया था?
आरोप है कि सी.टी. रवि ने गुरुवार शाम चिकमगलूरु के आजाद पार्क सर्कल में भाजपा की जिला इकाई द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा था कि दिल्ली में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान एक मुस्लिम धर्मगुरु ने कथित तौर पर एक जीप के पेट्रोल टैंक में आग लगाने की कोशिश की थी।
नोटिस देने पहुंची पुलिस के साथ क्या हुआ?
रविवार को पुलिस अधिकारी पूछताछ के लिए नोटिस देने सी.टी. रवि के चिकमगलूरु स्थित आवास पहुंचे। इस दौरान नोटिस को लेकर MLC और उनके समर्थकों की पुलिस के साथ तीखी बहस हुई। जब सी.टी. रवि ने नोटिस लेने से इनकार कर दिया, तो पुलिस अधिकारियों ने उनके घर के गेट के पास दीवार पर नोटिस की एक प्रति चिपका दी और वहां से चले गए। पुलिस के जाने के तुरंत बाद सी.टी. रवि के समर्थकों ने नोटिस को दीवार से हटा दिया। इसके बाद उन्होंने आवास के बाहर प्रदर्शन करते हुए राज्य सरकार और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की।
सी.टी. रवि ने अपने बचाव में क्या कहा?
सोमवार को कोप्पल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सी.टी. रवि ने कहा कि उन्होंने किसी भी समुदाय के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की और न ही कोई असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं और अपनी वर्दी का दुरुपयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार, उनके खिलाफ एफआईआर राजनीतिक कारणों से दर्ज की गई है।
सोशल मीडिया पर क्या सफाई दी?
रविवार को सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में सी.टी. रवि ने आरोप लगाया कि पुलिस सत्ताधारी पार्टी के इशारों पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मैंने दिल्ली में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान एक मुल्ला (मुस्लिम धर्मगुरु) द्वारा जीप के पेट्रोल टैंक में आग लगाने की कथित कोशिश की निंदा की थी। उसी मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मुझे नोटिस देने के लिए मेरे घर पहुंची। मैंने केवल उस व्यक्ति के कृत्य की आलोचना की थी, पूरे मुस्लिम समुदाय को निशाना नहीं बनाया था। किसी एक मुल्ला की आलोचना का अर्थ पूरे समुदाय का अपमान करना नहीं है।
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पुलिस की कार्रवाई पर क्या सवाल उठाए?
सी.टी. रवि ने सवाल उठाया कि पुलिस ने आखिर किस कानूनी आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया। उन्होंने कहा कि मेरा पहले से तय एक जरूरी कार्यक्रम था, इसलिए मैंने पुलिस को बताया था कि मैं दो दिन बाद स्वयं पुलिस स्टेशन पहुंच जाऊंगा। इसके बावजूद जिस तरह पुलिस ने कार्रवाई की, उससे ऐसा लगता है कि वह सत्ताधारी पार्टी के इशारों पर काम कर रही है।