Supreme Court: मुकुल रॉय को सुप्रीम कोर्ट से राहत, अयोग्यता मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर लगी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय को पश्चिम बंगाल विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराया गया था। मुकुल रॉय पर भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल होने के बाद दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की गई थी।
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गौरतलब है कि कलकत्ता हाईकोर्ट ने पहली बार अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए दल-बदल विरोधी कानून के तहत किसी निर्वाचित विधायक को सीधे अयोग्य घोषित किया था। हाईकोर्ट ने माना था कि मुकुल रॉय का पार्टी बदलना दसवीं अनुसूची का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से फिलहाल मुकुल रॉय की विधानसभा सदस्यता पर राहत मिल गई है और मामले का अंतिम फैसला शीर्ष अदालत की आगे की सुनवाई के बाद होगा।
बीआरएस विधायकों की अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना विधानसभा स्पीकर से कहा कि वे दो सप्ताह के भीतर अदालत को यह जानकारी दें कि भारत राष्ट्र समिति (BRS) के उन विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है, जो दल बदलकर सत्तारूढ़ कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ए.जी. मसीह की पीठ ने स्पीकर को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए इसे अंतिम अवसर बताया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर अब भी आदेशों का पालन नहीं हुआ तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पीकर को अवमानना नोटिस जारी कर चुका है और यह दोहरा चुका है कि दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करते समय स्पीकर को संवैधानिक प्रतिरक्षा प्राप्त नहीं होती।
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