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सुप्रीम कोर्ट: अनिल अंबानी की कंपनी को राहत, डीएमआरसी को चुकाने ही होंगे डीएएमईपीएल को 4600 करोड़ रुपये
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 06 May 2022 03:14 AM IST
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सार
डीएएमईपीएल में 95 फीसदी हिस्सेदारी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की है जो अनिल अंबानी की कंपनी है। इस कंपनी पर 11 बैंकों की भारी-भरकम राशि का कर्ज है। इस कंपनी ने दिल्ली एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन मेट्रो का निर्माण किया था। इसका परिचालन इसी कंपनी को करना था, लेकिन बाद में डीएमआरसी ने इसका परिचालन अपने हाथ में ले लिया था।
सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : PTI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) को झटका देते हुए दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिडेट (डीएएमईपीएल) को 4600 करोड़ रुपये ब्याज समेत चुकाने का दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा है। यह राशि दो महीने के अंदर देनी होगी। जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने यह आदेश दिया है।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने इसी साल 10 मार्च को डीएमआरसी को आदेश दिया था कि मध्यस्थता अवार्ड के 4600 करोड़ रुपये डीएएमईपीएल को ब्याज समेत दो किस्तों में चुकाए। पहली किस्त 30 अप्रैल तक और दूसरी 31 मई तक देनी थी।
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डीएएमईपीएल में 95 फीसदी हिस्सेदारी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की है जो अनिल अंबानी की कंपनी है। इस कंपनी पर 11 बैंकों की भारी-भरकम राशि का कर्ज है। इस कंपनी ने दिल्ली एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन मेट्रो का निर्माण किया था। इसका परिचालन इसी कंपनी को करना था, लेकिन बाद में डीएमआरसी ने इसका परिचालन अपने हाथ में ले लिया था। यह लाइन 23 फरवरी 2011 से परिचालन में है।
दरअसल, वर्ष 2008 में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की इकाई ने 2038 तक सिटी रेल परियोजना चलाने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉपोर्रेशन के साथ एक करार किया था। 2012 में अंबानी की कंपनी ने शुल्क और संचालन को लेकर विवादों के कारण राजधानी के एयरपोर्ट मेट्रो प्रोजेक्ट का संचालन बंद कर दिया था।
कंपनी ने करार के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए डीएमआरसी के खिलाफ आर्बिट्रेशन का मामला शुरू किया और ट्रर्मिनेशन शुल्क की मांग की थी। तब कंपनी के वकीलों ने अदालत से कहा था कि रिलायंस, कर्ज दाताओं को भुगतान करने के लिए पैसे का इस्तेमाल करेगी। जिसके बाद शीर्ष अदालत ने बैंकों को कंपनी के खातों को एनपीए के रूप में चिह्नित करने से रोक दिया था।
तालकटोरा स्टेडियम में होने वाले आयोजन के खिलाफ याचिका पर 9 को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित होने वाले कार्यक्रम के खिलाफ याचिका पर वह 9 मार्च को सुनवाई करेगा। ऐसा आरोप है कि इस आयोजन में हिंदू राष्ट्र का संकल्प लिया जाएगा। जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि यह आयोजन बृहस्पतिवार की शाम को होना है। आप इसे रोकने का आदेश दें।
इस पर पीठ ने सुनवाई की तारीख 9 मई तय कर दी और याचिकाकर्ता से अपने इस आदेश से अधिकारियों को अवगत कराने का निर्देश दिया। याचिका में दावा किया कि तालकटोरा स्टेडियम के इस आयोजन में एक मुख्य वक्ता निश्चलानंद सरस्वती हैं, जिन्होंने पीछे कई मौकों पर नफरत फैलाने वाले भाषण दिए। बार बार शिकायत के बाद भी इस तरह के आयोजन खुलेआम हो रहे हैं। इन्हें रोकने के लिए शायद ही कोई कार्रवाई की गई।
