सुप्रिया सुले की बेटी का रिसेप्शन: साथ दिखे PM मोदी और शरद पवार, शाह भी मौजूद; क्या बदल रही है सियासी रणनीति?
सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले के शादी रिसेप्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शरद पवार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक साथ नजर आए। इसी दिन एनसीपी (एसपी) के सभी आठ लोकसभा सांसदों ने मोदी से मुलाकात कर महाराष्ट्र के कई मुद्दे उठाए। ऐसे में यह तस्वीर राजनीतिक रूप से चर्चा में है। सवाल है कि क्या ये सिर्फ जनहित से जुड़ी मुलाकातें हैं या शरद पवार की सियासी रणनीति में कोई बदलाव हो रहा है?
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सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले के शादी रिसेप्शन में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक साथ नजर आए। शादी समारोह में अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता पहुंचे थे, लेकिन इन तीनों नेताओं की एक साथ तस्वीर ने सबसे ज्यादा राजनीतिक ध्यान खींचा। इसकी वजह यह है कि एनसीपी (एसपी) अभी विपक्षी इंडिया गठबंधन का हिस्सा है। साथ ही पिछले कुछ समय में शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले की प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुलाकातें भी हुई हैं। ऐसे में पारिवारिक समारोह की यह तस्वीर राजनीतिक नजरिए से अहम मानी जा रही है।
एनसीपी (एसपी) सांसदों की पीएम मोदी से मुलाकात क्यों?
रिसेप्शन से पहले सोमवार को ही शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) के सभी आठ लोकसभा सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सुप्रिया सुले ने किया। सांसदों ने सूखा, सिंचाई, नदियों को जोड़ने, रेलवे, किसानों की कर्जमाफी और अपने-अपने लोकसभा क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे प्रधानमंत्री के सामने रखे। सांसदों ने लिखित ज्ञापन भी सौंपा। एनसीपी (एसपी) सांसद अमोल कोल्हे ने कहा कि पुणे-नासिक सेमी हाईस्पीड रेल परियोजना और किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा भी उठाया गया। उनके मुताबिक संसद की कार्यवाही पर कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सदन में व्यवधान के कारण सांसदों ने अपने मुद्दे सीधे प्रधानमंत्री के सामने रखे।
क्या महाराष्ट्र के दूसरे मुद्दे भी प्रधानमंत्री के सामने रखे गए?
बैठक में महाराष्ट्र से जुड़े कई अन्य मुद्दे भी उठाए गए। इनमें प्याज की कीमत और चंद्रभागा नदी में प्रदूषण का मामला भी शामिल था। एनसीपी (एसपी) सांसदों ने महात्मा ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले, शाहीर अन्नाभाऊ साठे और तुकडोजी महाराज को भारत रत्न देने की मांग भी रखी। इसके अलावा नवी मुंबई एयरपोर्ट का नाम महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री डीवाई पाटिल के नाम पर रखने का अनुरोध किया गया। सांसदों ने बैठक को सकारात्मक बताया। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने उठाए गए मुद्दों पर ध्यान देने का भरोसा दिया। एनसीपी (एसपी) का कहना है कि ऐसी मुलाकातों का मकसद महाराष्ट्र, लोकसभा क्षेत्रों और जनहित से जुड़े सवालों को सरकार के सामने रखना है।
परिसीमन को लेकर एनसीपी (एसपी) के रुख पर क्यों नजर है?
मोदी से मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब केंद्र के प्रस्तावित परिसीमन को लेकर एनसीपी (एसपी) के रुख पर राजनीतिक नजर बनी हुई है। पार्टी के संभावित समर्थन को लेकर चर्चा रही है। हालांकि सुप्रिया सुले ने कहा है कि अंतिम कानून सामने आने के बाद ही पार्टी अपना रुख तय करेगी। उन्होंने पहले यह भी कहा था कि अगर सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव आता है तो पार्टी उस पर विचार कर सकती है। एनसीपी (एसपी) ने यह भी कहा है कि विधेयक आने के बाद इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के भीतर चर्चा होगी। सोमवार की बैठक में परिसीमन और विवादित एफसीआरए संशोधन विधेयक पर चर्चा नहीं हुई। सुले ने मौजूदा रूप में एफसीआरए संशोधन का विरोध किया है।
ये लगातार मुलाकातें क्या संकेत दे रहीं?
शरद पवार और प्रधानमंत्री मोदी की यह पहली मुलाकात नहीं है। 22 जुलाई को शरद पवार और सुप्रिया सुले ने दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी। उस दौरान छात्रों और परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों के अलावा नीट पेपर लीक, किसानों की समस्याओं, पानी के प्रबंधन और शिक्षा से जुड़े विषय उठाए गए थे। पवार ने बाद में कहा था कि प्रधानमंत्री ने सकारात्मक और ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया। एनसीपी (एसपी) लगातार साफ करती रही है कि प्रधानमंत्री के साथ ऐसी मुलाकातें राजनीतिक गठबंधन बदलने के लिए नहीं, बल्कि महाराष्ट्र, अपने क्षेत्रों और जनहित के मुद्दों के लिए होती हैं। फिलहाल पार्टी इंडिया गठबंधन का हिस्सा है। इसलिए शादी रिसेप्शन की तस्वीर को सीधे किसी नए राजनीतिक गठजोड़ का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन मोदी, पवार और शाह की एक साथ तस्वीर तथा उसी दिन एनसीपी (एसपी) सांसदों की प्रधानमंत्री से मुलाकात ने शरद पवार की सियासी रणनीति को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है।