20 साल में दो बार भारत-पाक को युद्ध के कगार पर ला चुका है जैश
विभाजन के बाद आपस में चार बार लड़ाई लड़ चुके भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंध कोई नई बात नहीं है। आए दिन सीमा रेखा पर पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर का उल्लंघन कर फायरिंग करना भी कुछ नया नहीं है। आखिरी बार पाकिस्तान की तरफ से जम्मू-कश्मीर के कारगिल क्षेत्र पर अवैध तरीके से कब्जा जमा लेने के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध हुआ था। इसके बाद पिछले 20 साल में भी यह दोनों देश दो बार आपस में लड़ाई के मुहाने पर पहुंचकर वापस लौटे हैं।
आपको जानकर हैरानी होगी कि दोनों ही बार इन देशों के बीच युद्ध जैसी परिस्थितियां पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की देन रही हैं। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि जैश ने ‘गजवा-ए-हिंद (भारत के खिलाफ जिहाद)’ के नाम पर दुस्साहसिक आतंकी हमले करते हुए दोनों देशों के बीच वार्ता की गाड़ी पटरी से उतारने में अहम भूमिका निभाई है।
जैश की तरफ से 20 साल में पठानकोट एयरबेस, उड़ी में सैन्य ब्रिगेड मुख्यालय पर हमला, श्रीनगर के बादामीबाग कैंट पर हमला और जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर बमों से हमले जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया है। एक सुरक्षा अधिकारी का कहना है, कारगिल युद्ध के बाद पहली बार भारत और पाकिस्तान 2001 में उस समय तकरीबन युद्ध छेड़ने के करीब पहुंच चुके थे, जब जैश के आतंकियों ने भारतीय संसद पर हमला किया था। इसके बाद अब 14 फरवरी को जैश की ही तरफ से पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर फिदायीन हमले के बाद भी दोनों देश लड़ाई के मुहाने पर खड़े हुए हैं।
2017 में कर चुका है समझौते नहीं मानने का एलान
सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट हैं कि जैश के ओसामा बिन लादेन के अल-कायदा आतंकी संगठन से करीबी संबंध हैं। जैश का शीर्ष नेतृत्व 2017 में भारत-पाकिस्तान के बीच किसी भी तरह के समझौते को नहीं मानने का एलान कर चुका है। पाकिस्तान के ओकारा जिले में 27 नवंबर, 2017 को हुए एक सम्मेलन में जैश के आकाओं ने ‘गजवा-ए-हिंद’ जारी रखने की घोषणा की थी।
लादेन को बचाने के लिए किया था भारतीय संसद पर हमला
खुफिया रिपोर्ट में यह भी है कि भारतीय संसद पर हमला कराने के पीछे जैश का मकसद 9/11 हमले के बाद अफगानिस्तान के तोरा-बोरा की पहाड़ियों की सुरंगों में अमेरिकी सेना से घिरे ओसामा बिन लादेन की मदद करना था। दरअसल अमेरिका ने इन पहाड़ियों में लादेन को घेरने के लिए एकतरफ से सेना लगाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान को दी थी।
जैश ने पाकिस्तानी सेना की घेरेबंदी के महज एक सप्ताह बाद भारतीय संसद पर हमला कर दिया था, जिससे भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का माहौल तकरीबन युद्ध शुरू होने तक पहुंच गया था। इस कारण पाकिस्तान को अफगानिस्तान सीमा से सेना हटाकर भारतीय सीमा पर लगानी पड़ी थी और लादेन आसानी से तोरा-बोरा से निकलकर पाकिस्तान पहुंच गया था, जहां वह अगले 10 साल तक छिपा रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह योजना पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने ही बनाई थी। इस दौरान जैश ने अल-कायदा के लड़ाकों और उनके परिवारों को भी अफगानिस्तान से निकालकर पाकिस्तान में अपने शिविरों में सुरक्षित पनाह दी थी और बाद में इन्ही लड़ाकों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ भी किया। इनमें खालिद शेख मोहम्मद भी शामिल था, जो 9/11 हमले का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है। खालिद शेख को कराची में छिपाया गया था।
जैश के हमले
- 2000 अप्रैल में कश्मीर घाटी में आईईडी धमाके से 30 सैनिकों की हत्या की
- 2000 जून में श्रीनगर के बटमालू बस स्टैंड पर 3 पुलिसकर्मियों की हत्या
- 2001 में 1 दिसंबर को जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर बमबारी कर 31 लोगों की हत्या
- 2001 में 31 जनवरी को भारतीय संसद पर हमला, 9 सुरक्षाकर्मी व अधिकारियों की हत्या
- 2005 में 2 नवंबर को गुलाम नबी आजाद के जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही श्रीनगर के नौगांव एरिया में कार बम विस्फोट से 10 लोगों की हत्या
- 2016 में 2 जनवरी को पठानकोट एयरबेस पर फिदायीन हमला, दो दिन तक चली मुठभेड़ में 7 सुरक्षाकर्मियों की हत्या
- 2016 में ही 18 सितंबर को उड़ी में सैन्य ब्रिगेड मुख्यालय पर फिदायीन हमले में 17 जवानों की हत्या और 30 अन्य घायल
- 2019 में 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले की बस से आरडीएक्स भरी गाड़ी टकराकर 40 जवानों की हत्या
