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Kolkata: कुणाल घोष को मिला अन्य टीएमसी नेताओं का साथ, संगीत कार्यक्रम में भाग लेने वाले कलाकरों का किया बायकॉट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: शुभम कुमार
Updated Sat, 04 Jan 2025 12:22 AM IST
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सार
टीएमसी नेता कुणाल घोष ने संगीत कार्यक्रम में भाग लेने वाले कलाकारों को लेकर दिए गए बयान को वापस लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वैसे कलाकारों को टीएमसी समर्थित क्लबों द्वारा आयोजित संगीत कार्यक्रमों में भाग लेने का मौका नहीं मिलना चाहिए।
टीएमसी नेता कुणाल घोष
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने शुक्रवार को संगीत कार्यक्रमों के दौरान कलाकारों के हिस्सा लेने वाले बयान को वापस लेने से इनकार कर दिया है। घोष ने अपने बयान पर कायम रहते हुए कहा कि जिन कलाकारों ने आरजी कर अस्पताल में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, उन्हें टीएमसी समर्थित क्लबों द्वारा आयोजित संगीत कार्यक्रमों में भाग लेने का मौका नहीं मिलना चाहिए।
बता दें कि यह विवाद उस समय बढ़ा जब टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर शोबिज उद्योग के कलाकारों की किसी भी संगीत कार्यक्रम में भागीदारी पर आपत्ति नहीं करेंगे। उनका कहना था कि हर किसी को अपनी बात कहने का अधिकार है और किसी कलाकार द्वारा प्रदर्शन के दौरान की गई टिप्पणियों को सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी पर असर नहीं डालना चाहिए।
कुणाल घोष नहीं लेगें अपना बयान वापस
हालांकि, कुणाल घोष ने अपने बयान को वापस लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी को आरजी कर घटना के बाद विरोध प्रदर्शन में शामिल कलाकारों द्वारा ममता बनर्जी पर किए गए तीव्र और व्यक्तिगत हमलों के बारे में जानकारी नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि हम किसी को भी माफ नहीं कर सकते जो मुख्यमंत्री के खिलाफ अपशब्द कहे।
घोष को मिला अन्य नेताओं का समर्थन
साथ ही मामले में घोष की टिप्पणी पर टीएमसी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी घोष का समर्थन किया। बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने कहा कि मुख्यमंत्री और राज्य सरकार को विरोध के नाम पर बदनाम किया गया। टीएमसी सांसद कल्याण बंद्योपाध्याय ने कहा कि ऐसे लोगों को ममता बनर्जी और पार्टी का सम्मान करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने का कोई हक नहीं है।
भाजपा ने लगाया तानाशाही का आरोप
वहीं, मामले में भाजपा नेता और अभिनेता रुद्रनील घोष ने टीएमसी पर तानाशाही आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि टीएमसी शासन में केवल वही लोग स्वागत योग्य हैं जो पार्टी की लाइन पर चलते हैं, जबकि विरोध करने वालों की आवाज दबा दी जाती है।
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बता दें कि यह विवाद उस समय बढ़ा जब टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर शोबिज उद्योग के कलाकारों की किसी भी संगीत कार्यक्रम में भागीदारी पर आपत्ति नहीं करेंगे। उनका कहना था कि हर किसी को अपनी बात कहने का अधिकार है और किसी कलाकार द्वारा प्रदर्शन के दौरान की गई टिप्पणियों को सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी पर असर नहीं डालना चाहिए।
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कुणाल घोष नहीं लेगें अपना बयान वापस
हालांकि, कुणाल घोष ने अपने बयान को वापस लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी को आरजी कर घटना के बाद विरोध प्रदर्शन में शामिल कलाकारों द्वारा ममता बनर्जी पर किए गए तीव्र और व्यक्तिगत हमलों के बारे में जानकारी नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि हम किसी को भी माफ नहीं कर सकते जो मुख्यमंत्री के खिलाफ अपशब्द कहे।
घोष को मिला अन्य नेताओं का समर्थन
साथ ही मामले में घोष की टिप्पणी पर टीएमसी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी घोष का समर्थन किया। बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने कहा कि मुख्यमंत्री और राज्य सरकार को विरोध के नाम पर बदनाम किया गया। टीएमसी सांसद कल्याण बंद्योपाध्याय ने कहा कि ऐसे लोगों को ममता बनर्जी और पार्टी का सम्मान करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने का कोई हक नहीं है।
भाजपा ने लगाया तानाशाही का आरोप
वहीं, मामले में भाजपा नेता और अभिनेता रुद्रनील घोष ने टीएमसी पर तानाशाही आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि टीएमसी शासन में केवल वही लोग स्वागत योग्य हैं जो पार्टी की लाइन पर चलते हैं, जबकि विरोध करने वालों की आवाज दबा दी जाती है।