फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   TTEs sell berths in train like vegetables Calcutta High Court takes stern action against passenger death

'सब्जियों की तरह टीटीई बेचते हैं बर्थ': यात्री की मौत पर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त, रेलवे को दिया कार्रवाई का आदेश

Mon, 13 Jul 2026 01:37 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता Published by: प्रशांत तिवारी Updated Mon, 13 Jul 2026 01:37 PM IST
सार

कलकत्ता हाई कोर्ट ने ट्रेनों में खाली बर्थ बेचने वाले टीटीई पर कडी टिप्पणी करते हुए कहा कि वे बर्थ को बाजार में सब्जियों की तरह बेचते हैं। अदालत ने रेलवे को ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ अधिकतम कार्रवाई करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने पुलिस जांच में गंभीर खामियां भी बताईं और कहा कि TTE की लापरवाही ही इस अपराध की मुख्य वजह बनी।

विज्ञापन
TTEs sell berths in train like vegetables Calcutta High Court takes stern action against passenger death
कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि कुछ ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (टीटीई) ट्रेनों में खाली बर्थ को बाजार में सब्जियों की तरह बेचते हैं। कोर्ट ने देश के सभी रेलवे जोन के जनरल मैनेजरों को निर्देश दिया कि ऐसे दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अदालत ने यह टिप्पणी एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें नशीला पदार्थ देकर लूट का शिकार बने एक यात्री की मौत हो गई 

विज्ञापन

थी।

क्या था पूरा मामला?
दरअसल, फरवरी 2009 में न्यू जलपाईगुड़ी से सियालदह जा रहे दो यात्रियों ने बिना रिजर्वेशन टिकट के साथ तीस्ता तोरसा एक्सप्रेस में सफर शुरू किया था। दोनों ने एक TTE को पैसे देकर खाली बर्थ हासिल की। बाद में दो अपराधियों ने उन्हें नशीला पदार्थ खिलाकर उनके कीमती सामान लूट लिए। उनमें से एक यात्री पहले से ही कई बीमारियों से पीड़ित था। नशीले पदार्थ के असर से उसकी मौत हो गई, जबकि दूसरा यात्री बच गया था। 
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने टीटीई को लेकर क्या कहा?
जस्टिस राजशेखर मंथा और जस्टिस बिस्वरूप चौधरी की डिविजन बेंच ने कहा कि यह अदालत अपने इस फैसले की प्रति ईस्टर्न रेलवे और देश के सभी रेलवे जोन के जनरल मैनेजरों को भेजने के लिए बाध्य है, ताकि उन टीटीई के खिलाफ अधिकतम सजा सुनिश्चित की जा सके, जो ट्रेनों में खाली बर्थ को बाजार में सब्जियों की तरह बेचते हैं।' कोर्ट ने कहा कि ऐसे गैरजिम्मेदाराना व्यवहार के कारण एक यात्री की जान चली गई, जबकि वह मूल रूप से केवल चोरी का शिकार हुआ था।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट ने इस तरह की घटनाओं पर क्या चिंता जताई?
अदालत ने कहा कि इस तरह के कई मामले सामने ही नहीं आ पाते। छोटी चोरी के शिकार होने वाले यात्रियों को भी कई बार गंभीर चिकित्सकीय परिणाम भुगतने पड़ते हैं। ऐसे अपराधों की शुरुआत TTE के हाथों से होती है। 

पुलिस जांच पर कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?
कोर्ट ने जांच और अभियोजन की प्रक्रिया में कई गंभीर कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया। अदालत ने पुलिस की आलोचना करते हुए कहा कि जांच अधिकारियों को अधिक ईमानदारी, मेहनत और समर्पण के साथ जांच करनी चाहिए, ताकि भारतीय रेलवे में यात्रा करने वाले लोगों का जीवन और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को क्या सजा सुनाई थी?
इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने आलोक घोष और गोपाल मिस्त्री को दोषी ठहराते हुए हत्या की धारा 302 के तहत उम्रकैद और धारा 328 के तहत नशीला पदार्थ देकर नुकसान पहुंचाने के अपराध में सात वर्ष की सजा सुनाई थी। इसके अलावा उन्हें चोरी और दूसरे यात्री की हत्या के प्रयास के मामले में भी दोषी ठहराया गया था। सभी सजाएं एक साथ चलनी थीं।

हाई कोर्ट ने सजा में क्या बदलाव किया?
डिविजन बेंच ने कहा कि अपीलकर्ताओं के खिलाफ अधिकतम धारा 328 का अपराध ही साबित होता है, जिसकी सजा सात वर्ष है। अदालत ने माना कि अन्य धाराओं के आरोप स्पष्ट रूप से सिद्ध नहीं हो सके। इसी आधार पर अदालत ने उनकी अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर ली।  

रिहाई को लेकर कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
अदालत ने निर्देश दिया कि दोनों अपीलकर्ताओं को ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार बॉन्ड भरने के बाद रिहा किया जाए। यह बॉन्ड छह महीने तक प्रभावी रहेगा। घोष और मिस्त्री को 10 जुलाई 2017 को दोषी ठहराया गया था और अगले दिन सियालदह सेशंस कोर्ट ने उन्हें सजा सुनाई थी।

जांच में कौन सी बड़ी चूक सामने आई?
मामले की जांच को अपर्याप्त बताते हुए डिविजन बेंच ने कहा कि जांच अधिकारी ने मृतक के विसरा की फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) रिपोर्ट तक एकत्र नहीं की। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण भी नहीं है, जिससे यह साबित हो कि विसरा को FSL भेजा गया था। जांच अधिकारी की यह चूक किसी भी तरह माफ करने योग्य नहीं है।


ये भी पढ़ें:  मद्रास हाईकोर्ट के गोवध प्रतिबंध के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, आदेश में कही ये बात

टीटीई की भूमिका को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?
डिविजन बेंच ने कहा कि बिना पूर्व रिजर्वेशन के दो यात्रियों को बर्थ आवंटित करना संबंधित TTE की गंभीर लापरवाही थी। इतना ही नहीं, न्यू जलपाईगुड़ी से सियालदह तक ड्यूटी पर तैनात अन्य टीटीई की भूमिका भी गंभीर चिंता का विषय है। अक्सर टीटीई यात्रियों के जोरदार अनुरोध पर उन्हें बर्थ दे देते हैं और बदले में पैसे भी ले लेते हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि भारतीय रेलवे में TTE की लापरवाही ही इस अपराध की मुख्य वजह बनी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed