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अब UPI पेमेंट पर देना होगा चार्ज: लोकसभा से पास बिल का सच क्या, विपक्ष ने ट्रंप का नाम लेकर क्यों घेरा?
Thu, 06 Aug 2026 05:50 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 06 Aug 2026 05:50 PM IST
सार
लोकसभा से पास बिल ने भविष्य में यूपीआई पर चार्ज लगाने का कानूनी रास्ता साफ कर दिया है, हालांकि अभी यूपीआई पूरी तरह फ्री है। इसके साथ ही सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डाटा सेंटर और विदेशी निवेशकों को टैक्स में बड़ी छूट देकर देश में निवेश की रफ्तार तेज करने की कोशिश की है।
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यूपीआई
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अगर आप रोजमर्रा के खर्च के लिए यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। लोकसभा ने गुरुवार को पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन से जुड़ा एक विधेयक पारित कर दिया है। इसके बाद केंद्र सरकार को यह अधिकार मिल जाएगा कि वह भविष्य में अधिसूचना जारी कर बैंकों और अन्य पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (PSPs) को यूपीआई और दूसरे डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क (एमडीआर) लगाने की अनुमति दे सके।
हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आज से यूपीआई पर चार्ज लग गया है। अभी यूपीआई पहले की तरह मुफ्त है। लेकिन कानून में ऐसा बदलाव जरूर किया गया है, जिससे भविष्य में सरकार चाहे तो शुल्क लगाने का फैसला कर सकती है।
आखिर इस बिल में बदला क्या है?
यह संशोधन टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026 का हिस्सा है। गुरुवार को लोकसभा में ध्वनिमत से इसे मंजूरी मिल गई। अब तक पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट की धारा 10A के तहत आयकर अधिनियम की धारा 269SU में शामिल डिजिटल भुगतान माध्यमों पर बैंक या पेमेंट कंपनियां किसी तरह का शुल्क नहीं लगा सकती थीं। नए संशोधन के बाद यह तय करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास होगा कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाया जा सकता है।
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सरकार का कहना है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मजबूत बनाए रखने और बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और भुगतान नेटवर्क चलाने वाली कंपनियों के लिए टिकाऊ व्यवस्था तैयार करने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है।
क्या अब हर यूपीआई ट्रांजैक्शन पर पैसे देने होंगे?
फिलहाल इसका जवाब नहीं है। इस बिल में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि यूपीआई पर तुरंत एमडीआर लागू होगा। अभी भी यूपीआई से भुगतान करने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता। दूसरी ओर RTGS और NEFT जैसी सेवाओं पर पहले से ही सर्विस चार्ज लगता है।
हालांकि, लंबे समय से बैंक और डिजिटल भुगतान उद्योग यूपीआई पर भी एमडीआर लागू करने की मांग करते रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भविष्य में सरकार ऐसा फैसला लेती है, तो संभव है कि व्यापारी और ग्राहक के बीच होने वाले बड़े मूल्य के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाया जाए। फिलहाल पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रांजैक्शन को लेकर कोई प्रस्ताव सामने नहीं आया है।
यह भी पढ़ें: एक ही नियम से तय होंगे ब्याज: अब नहीं चलेगी बैंकों और NBFC की मनमानी, RBI की तैयारियां क्या?
RBI गवर्नर ने क्या कहा?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि इस समय एमडीआर लागू होने पर चर्चा करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट जैसी सार्वजनिक व्यवस्था को चलाने और लगातार बेहतर बनाने में खर्च होता है। यह खर्च या तो सरकार करदाताओं के पैसे से उठाएगी या फिर 'यूजर पे' मॉडल के तहत एमडीआर जैसे विकल्प अपनाए जाएंगे। फिलहाल सरकार कानून में संशोधन कर रही है और आगे की स्थिति पर नजर रखी जाएगी।
क्या विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है?
कांग्रेस ने इस विधेयक का जोरदार विरोध किया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार यूपीआई को मुफ्त रखने वाली कानूनी गारंटी खत्म कर रही है। उनके मुताबिक इससे भविष्य में सभी तरह के डिजिटल भुगतान पर एमडीआर लगाने का रास्ता खुल सकता है और इसका बोझ आखिरकार आम लोगों पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि 2025-26 में आरबीआई ने केंद्र सरकार को 2.86 लाख करोड़ रुपये का अधिशेष दिया था। उनका दावा है कि इस राशि का एक छोटा हिस्सा भी यूपीआई व्यवस्था को बिना शुल्क के चलाने के लिए पर्याप्त है। जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि यह बदलाव अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की 2026 की रिपोर्ट के बाद लाया गया है। उस रिपोर्ट में यूपीआई और रुपे के मुफ्त मॉडल पर सवाल उठाए गए थे और कहा गया था कि इससे वीजा और मास्टरकार्ड जैसी अमेरिकी कंपनियां प्रभावित हुई हैं।
कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में भारतीय डिजिटल भुगतान बाजार को विदेशी कंपनियों के लिए खोलना चाहते हैं। हालांकि, सरकार ने इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
मामले से जुड़ी पांच बड़ी बातें
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हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आज से यूपीआई पर चार्ज लग गया है। अभी यूपीआई पहले की तरह मुफ्त है। लेकिन कानून में ऐसा बदलाव जरूर किया गया है, जिससे भविष्य में सरकार चाहे तो शुल्क लगाने का फैसला कर सकती है।
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आखिर इस बिल में बदला क्या है?
यह संशोधन टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026 का हिस्सा है। गुरुवार को लोकसभा में ध्वनिमत से इसे मंजूरी मिल गई। अब तक पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट की धारा 10A के तहत आयकर अधिनियम की धारा 269SU में शामिल डिजिटल भुगतान माध्यमों पर बैंक या पेमेंट कंपनियां किसी तरह का शुल्क नहीं लगा सकती थीं। नए संशोधन के बाद यह तय करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास होगा कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाया जा सकता है।
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सरकार का कहना है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मजबूत बनाए रखने और बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और भुगतान नेटवर्क चलाने वाली कंपनियों के लिए टिकाऊ व्यवस्था तैयार करने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है।
क्या अब हर यूपीआई ट्रांजैक्शन पर पैसे देने होंगे?
फिलहाल इसका जवाब नहीं है। इस बिल में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि यूपीआई पर तुरंत एमडीआर लागू होगा। अभी भी यूपीआई से भुगतान करने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता। दूसरी ओर RTGS और NEFT जैसी सेवाओं पर पहले से ही सर्विस चार्ज लगता है।
हालांकि, लंबे समय से बैंक और डिजिटल भुगतान उद्योग यूपीआई पर भी एमडीआर लागू करने की मांग करते रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भविष्य में सरकार ऐसा फैसला लेती है, तो संभव है कि व्यापारी और ग्राहक के बीच होने वाले बड़े मूल्य के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाया जाए। फिलहाल पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रांजैक्शन को लेकर कोई प्रस्ताव सामने नहीं आया है।
यह भी पढ़ें: एक ही नियम से तय होंगे ब्याज: अब नहीं चलेगी बैंकों और NBFC की मनमानी, RBI की तैयारियां क्या?
RBI गवर्नर ने क्या कहा?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि इस समय एमडीआर लागू होने पर चर्चा करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट जैसी सार्वजनिक व्यवस्था को चलाने और लगातार बेहतर बनाने में खर्च होता है। यह खर्च या तो सरकार करदाताओं के पैसे से उठाएगी या फिर 'यूजर पे' मॉडल के तहत एमडीआर जैसे विकल्प अपनाए जाएंगे। फिलहाल सरकार कानून में संशोधन कर रही है और आगे की स्थिति पर नजर रखी जाएगी।
क्या विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है?
कांग्रेस ने इस विधेयक का जोरदार विरोध किया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार यूपीआई को मुफ्त रखने वाली कानूनी गारंटी खत्म कर रही है। उनके मुताबिक इससे भविष्य में सभी तरह के डिजिटल भुगतान पर एमडीआर लगाने का रास्ता खुल सकता है और इसका बोझ आखिरकार आम लोगों पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि 2025-26 में आरबीआई ने केंद्र सरकार को 2.86 लाख करोड़ रुपये का अधिशेष दिया था। उनका दावा है कि इस राशि का एक छोटा हिस्सा भी यूपीआई व्यवस्था को बिना शुल्क के चलाने के लिए पर्याप्त है। जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि यह बदलाव अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की 2026 की रिपोर्ट के बाद लाया गया है। उस रिपोर्ट में यूपीआई और रुपे के मुफ्त मॉडल पर सवाल उठाए गए थे और कहा गया था कि इससे वीजा और मास्टरकार्ड जैसी अमेरिकी कंपनियां प्रभावित हुई हैं।
कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में भारतीय डिजिटल भुगतान बाजार को विदेशी कंपनियों के लिए खोलना चाहते हैं। हालांकि, सरकार ने इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
मामले से जुड़ी पांच बड़ी बातें
- लोकसभा ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन वाला बिल पारित किया।
- सरकार को भविष्य में यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क की अनुमति देने का अधिकार मिलेगा।
- अभी यूपीआई पर कोई चार्ज लागू नहीं हुआ है।
- आरबीआई का कहना है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को चलाने की लागत किसी न किसी को उठानी होगी।
- कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह बदलाव भविष्य में यूपीआई पर एमडीआर लागू करने का रास्ता खोल सकता है।