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केरल सरकार के आदेश पर बिफरे विजयन: VHP बोली-वंदे मातरम का अपमान बर्दाश्त नहीं; दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
Sun, 09 Aug 2026 10:23 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 09 Aug 2026 10:23 PM IST
सार
केरल में स्वतंत्रता दिवस पर पूरे 'वंदे मातरम' के गायन पर राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। सीपीआई(एम) नेता पिनाराई विजयन ने इसे धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ और आरएसएस का एजेंडा बताया। इसके जवाब में वीएचपी ने इसे राजनीतिक मानसिकता करार देते हुए राष्ट्रीय गीत के अपमान पर तीन साल की जेल की चेतावनी दी है।
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पिनाराई विजयन, पूर्व मुख्यमंत्री, केरल
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
स्वतंत्रता दिवस समारोह में वंदे मातरम के पूरे गायन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। केरल में जारी इस विवाद पर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता पिनाराई विजयन पर हमला बोला। वीएचपी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय गीत का विरोध विजयन की 'अत्यधिक राजनीतिक मानसिकता' को उजागर करता है।
राष्ट्रीय प्रतीक को आरएसएस एजेंडा बताना गलत-विनोद बंसल
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस संबंध में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान और उसके बाद भी भारतवासियों को प्रेरित किया है। इसे 'आरएसएस का एजेंडा' कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। बंसल ने कहा कि विजयन एक महान राष्ट्रीय प्रतीक को पक्षपातपूर्ण नजरिए से देख रहे हैं। यदि कोई स्वतंत्रता आंदोलन के इतने बड़े प्रतीक को राजनीतिक चश्मे से देखता है, तो समस्या वंदे मातरम में नहीं बल्कि उस व्यक्ति की विचारधारा में है।
कानूनी संरक्षण का दिया हवाला
वीएचपी नेता ने संसद द्वारा पारित उस कानून का उल्लेख किया, जो वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान वैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है। बंसल ने चेतावनी दी कि राष्ट्रीय गीत का अनादर करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जल्द ही ऐसे नेता राष्ट्रीय गीत का अपमान करने की हिम्मत नहीं करेंगे। इस नियम का उल्लंघन करने वालों और उनके अंध समर्थकों को तीन साल तक की जेल हो सकती है।
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यह भी पढ़ें: 'ट्रंप मेरे अच्छे दोस्त': गाजा योजना को इस्राइल ने ठुकराया, नेतन्याहू बोले- जब तक मैं PM, नहीं बनेगा फलस्तीन
मुख्य सचिव के आदेश पर शुरू हुआ विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत केरल सरकार के एक फैसले के बाद हुई। राज्य के मुख्य सचिव ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पूरे वंदे मातरम का गायन अनिवार्य करने का आदेश जारी किया था। केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने इस आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की। विजयन ने कन्नूर में संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया था कि राज्य सरकार आरएसएस के एजेंडे के सामने आत्मसमर्पण कर रही है। पिनाराई विजयन ने कहा कि आरएसएस की नीति के अंतर्गत पूरा वंदे मातरम् देश ने स्वीकार नहीं किया। इस निर्णय को वापस लिया जाना चाहिए। सिर्फ शुरुआती दो पंक्तियां ही पर्याप्त हैं।
विजयन का धर्मनिरपेक्षता का तर्क
पिनाराई विजयन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वंदे मातरम का पूरा रूप देश के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि जब भारत ने एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनने का फैसला किया, तो संविधान सभा ने खुद यह तय किया था कि केवल इसके शुरुआती पदों का ही गायन किया जाएगा। उनके अनुसार, पूरे गीत का गायन स्थापित संवैधानिक और धर्मनिरपेक्ष मानदंडों के विपरीत है।
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राष्ट्रीय प्रतीक को आरएसएस एजेंडा बताना गलत-विनोद बंसल
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस संबंध में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान और उसके बाद भी भारतवासियों को प्रेरित किया है। इसे 'आरएसएस का एजेंडा' कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। बंसल ने कहा कि विजयन एक महान राष्ट्रीय प्रतीक को पक्षपातपूर्ण नजरिए से देख रहे हैं। यदि कोई स्वतंत्रता आंदोलन के इतने बड़े प्रतीक को राजनीतिक चश्मे से देखता है, तो समस्या वंदे मातरम में नहीं बल्कि उस व्यक्ति की विचारधारा में है।
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कानूनी संरक्षण का दिया हवाला
वीएचपी नेता ने संसद द्वारा पारित उस कानून का उल्लेख किया, जो वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान वैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है। बंसल ने चेतावनी दी कि राष्ट्रीय गीत का अनादर करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जल्द ही ऐसे नेता राष्ट्रीय गीत का अपमान करने की हिम्मत नहीं करेंगे। इस नियम का उल्लंघन करने वालों और उनके अंध समर्थकों को तीन साल तक की जेल हो सकती है।
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मुख्य सचिव के आदेश पर शुरू हुआ विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत केरल सरकार के एक फैसले के बाद हुई। राज्य के मुख्य सचिव ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पूरे वंदे मातरम का गायन अनिवार्य करने का आदेश जारी किया था। केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने इस आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की। विजयन ने कन्नूर में संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया था कि राज्य सरकार आरएसएस के एजेंडे के सामने आत्मसमर्पण कर रही है। पिनाराई विजयन ने कहा कि आरएसएस की नीति के अंतर्गत पूरा वंदे मातरम् देश ने स्वीकार नहीं किया। इस निर्णय को वापस लिया जाना चाहिए। सिर्फ शुरुआती दो पंक्तियां ही पर्याप्त हैं।
विजयन का धर्मनिरपेक्षता का तर्क
पिनाराई विजयन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वंदे मातरम का पूरा रूप देश के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि जब भारत ने एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनने का फैसला किया, तो संविधान सभा ने खुद यह तय किया था कि केवल इसके शुरुआती पदों का ही गायन किया जाएगा। उनके अनुसार, पूरे गीत का गायन स्थापित संवैधानिक और धर्मनिरपेक्ष मानदंडों के विपरीत है।