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Kerala: 10 साल पहले घर में घुसकर हुई थी विष्णु की हत्या, केरल की कोर्ट ने सात दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा
Fri, 14 Aug 2026 03:29 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, तिरुवनंतपुरम
पीटीआई, तिरुवनंतपुरम
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Fri, 14 Aug 2026 03:29 PM IST
सार
केरल के नेडुमंगड की स्पेशल कोर्ट ने 2016 में 19 वर्षीय विष्णु की हत्या के मामले में सात दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने पांच आरोपियों को बरी किया, जबकि एक दोषी की मौत हो चुकी है। गैंगवार की दुश्मनी में विष्णु की हत्या हुई थी।
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कोर्ट। सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शुक्रवार को केरल के नेडुमंगड की एक अदालत ने 2016 में कन्ननमूला में 19 साल के एक युवक की हत्या के मामले में सात लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई। नेडुमंगड SC/ST स्पेशल कोर्ट के जज ए. शाहजहां ने अरुण उर्फ परट्टा अरुण, लल्लू, राजेश उर्फ पूचा राजेश, सनकुमार उर्फ संजू, विजेश उर्फ विष्णु, मनु उर्फ शेट्टी मनु और श्रीनाथ उर्फ बोलजी को उम्रकैद की सजा सुनाई।
पांच को किया बरी
आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया गया। अदालत ने दिनी बाबू, जयन, अजीस, उन्नीकृष्णन नायर और दिलीप को बरी कर दिया। आठवें आरोपी, सुरेश उर्फ आशिर को भी दोषी पाया गया था, लेकिन उसकी मौत हो जाने के कारण सजा नहीं सुनाई गई।
क्या है पूरा मामला?
पुथेनपालम राजेश और दिनी बाबू के नेतृत्व वाले दो आपराधिक गिरोहों के बीच झगड़े के बाद, आरोपियों ने कथित तौर पर विष्णु के घर में घुसकर 7 अक्टूबर 2016 को उसकी हत्या कर दी थी। विष्णु को कथित तौर पर इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह पुथेनपालम राजेश का करीबी था, जो दिसंबर 2015 में दिनी बाबू के भाई सुनी बाबू की हत्या में कथित तौर पर शामिल था।
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इस हमले में विष्णु के माता-पिता, अनिल कुमार और बिंदू, और उसकी मौसी लैला गंभीर रूप से घायल हो गए थे। शुरुआत में इस मामले की जांच पेटा पुलिस ने की थी और बाद में इसे शंगुमुघम के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस को सौंप दिया गया था। जांच में खामियों के बाद, एक अन्य असिस्टेंट कमिश्नर ने जांच का जिम्मा संभाला और एक संशोधित चार्जशीट दाखिल की गई।
मुकदमे के दौरान, अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 48 गवाह, 144 भौतिक साक्ष्य और छह दस्तावेज पेश किए। विष्णु के चचेरे भाई आदित्यन ने अदालत के सामने गवाही दी। जिसने हत्या होते देखी थी और उस समय सात साल का था
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पांच को किया बरी
आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया गया। अदालत ने दिनी बाबू, जयन, अजीस, उन्नीकृष्णन नायर और दिलीप को बरी कर दिया। आठवें आरोपी, सुरेश उर्फ आशिर को भी दोषी पाया गया था, लेकिन उसकी मौत हो जाने के कारण सजा नहीं सुनाई गई।
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क्या है पूरा मामला?
पुथेनपालम राजेश और दिनी बाबू के नेतृत्व वाले दो आपराधिक गिरोहों के बीच झगड़े के बाद, आरोपियों ने कथित तौर पर विष्णु के घर में घुसकर 7 अक्टूबर 2016 को उसकी हत्या कर दी थी। विष्णु को कथित तौर पर इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह पुथेनपालम राजेश का करीबी था, जो दिसंबर 2015 में दिनी बाबू के भाई सुनी बाबू की हत्या में कथित तौर पर शामिल था।
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इस हमले में विष्णु के माता-पिता, अनिल कुमार और बिंदू, और उसकी मौसी लैला गंभीर रूप से घायल हो गए थे। शुरुआत में इस मामले की जांच पेटा पुलिस ने की थी और बाद में इसे शंगुमुघम के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस को सौंप दिया गया था। जांच में खामियों के बाद, एक अन्य असिस्टेंट कमिश्नर ने जांच का जिम्मा संभाला और एक संशोधित चार्जशीट दाखिल की गई।
मुकदमे के दौरान, अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 48 गवाह, 144 भौतिक साक्ष्य और छह दस्तावेज पेश किए। विष्णु के चचेरे भाई आदित्यन ने अदालत के सामने गवाही दी। जिसने हत्या होते देखी थी और उस समय सात साल का था