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शिवसेना विवाद: शिंदे और उद्धव गुट में जुबानी जंग तेज, संजय राउत बोले- कोर्ट में खत्म होगा उनका खेल
Thu, 06 Aug 2026 03:23 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Thu, 06 Aug 2026 03:23 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना विवाद की अंतिम सुनवाई के बीच संजय राउत ने दावा किया कि शिंदे गुट का खेल कानूनी रूप से खत्म हो जाएगा। इस पर शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने पलटवार किया। मामला चुनाव आयोग द्वारा शिंदे गुट को असली शिवसेना और धनुष-बाण चुनाव चिह्न दिए जाने से जुड़ा है।
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शिवसेना की कानूनी जंग तेज
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
शिवसेना बनाम शिवसेना मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही अंतिम सुनवाई के बीच, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने गुरुवार को दावा किया कि प्रतिद्वंद्वी शिवसेना का 'खेल' कानूनी रूप से खत्म हो जाएगा।
संजय राउत ने क्या कहा?
एक्स पर एक पोस्ट में, राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) संविधान में विश्वास करती है। उन्होंने चार साल पहले पार्टी में हुए विभाजन के बाद शीर्ष अदालत में दायर की गई उनकी याचिकाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि उनका खेल कानूनी तरीके से समाप्त हो जाएगा।' बता दें कि इस पोस्ट में शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मुस्कुराती हुई तस्वीर भी थी।
शिवसेना ने क्या पलटवार किया?
पलटवार करते हुए, शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने कहा कि प्रतिद्वंद्वी गुट अदालत के प्रतिकूल फैसले आने पर न्यायपालिका की बदनामी करता है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'आपका खेल तो पहले ही खत्म हो चुका है। अब आपके पास सिर्फ अपशब्दों का इस्तेमाल करने के अलावा कुछ नहीं बचा है।'
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क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट की उन याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू की, जिनमें चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें शिंदे के नेतृत्व वाले समूह को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दल का अपने विधायी विंग पर नियंत्रण बना हुआ है और उसके वैध निर्णय ही सर्वोपरि होने चाहिए।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने निर्वाचित प्रतिनिधियों को राजनीतिक निर्णय लेने के लिए कुछ छूट देने का भी समर्थन किया। अगर उनमें से अधिकांश राजनीतिक दल के निर्देशों से वास्तव में असहमत हों।
शिंदे ने 2022 में शिवसेना नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया, जिससे बाल ठाकरे की स्थापिकत मूल पार्टी में फूट पड़ गई। दोनों गुटों के बीच कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। बाद में उनके समूह ने चुनाव आयोग से पार्टी का नाम और उसका धनुष-बाण चिन्ह हासिल कर लिया।
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संजय राउत ने क्या कहा?
एक्स पर एक पोस्ट में, राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) संविधान में विश्वास करती है। उन्होंने चार साल पहले पार्टी में हुए विभाजन के बाद शीर्ष अदालत में दायर की गई उनकी याचिकाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि उनका खेल कानूनी तरीके से समाप्त हो जाएगा।' बता दें कि इस पोस्ट में शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मुस्कुराती हुई तस्वीर भी थी।
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शिवसेना ने क्या पलटवार किया?
पलटवार करते हुए, शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने कहा कि प्रतिद्वंद्वी गुट अदालत के प्रतिकूल फैसले आने पर न्यायपालिका की बदनामी करता है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'आपका खेल तो पहले ही खत्म हो चुका है। अब आपके पास सिर्फ अपशब्दों का इस्तेमाल करने के अलावा कुछ नहीं बचा है।'
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क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट की उन याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू की, जिनमें चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें शिंदे के नेतृत्व वाले समूह को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दल का अपने विधायी विंग पर नियंत्रण बना हुआ है और उसके वैध निर्णय ही सर्वोपरि होने चाहिए।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने निर्वाचित प्रतिनिधियों को राजनीतिक निर्णय लेने के लिए कुछ छूट देने का भी समर्थन किया। अगर उनमें से अधिकांश राजनीतिक दल के निर्देशों से वास्तव में असहमत हों।
शिंदे ने 2022 में शिवसेना नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया, जिससे बाल ठाकरे की स्थापिकत मूल पार्टी में फूट पड़ गई। दोनों गुटों के बीच कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। बाद में उनके समूह ने चुनाव आयोग से पार्टी का नाम और उसका धनुष-बाण चिन्ह हासिल कर लिया।