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Railways:अब सस्ता पड़ सकता है एक शहर से दूसरे शहर सामान भेजना, जानिए रेलवे का नया फैसला
Thu, 06 Aug 2026 03:35 PM IST
नितिन गौतम
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 06 Aug 2026 03:35 PM IST
सार
रेलवे के इस कदम से राशन, एफएमसीजी उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स, कपड़े और दूसरे रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी दिख सकता है। क्योंकि इस कदम का असर देश की पूरी सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।
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Indian Railways
- फोटो : AdobeStock
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विस्तार
एक शहर से दूसरे शहर तक सामान भेजना आने वाले समय में सस्ता हो सकता है। इसका फायदा रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसके लिए भारतीय रेलवे ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के नियम आसान कर दिए हैं। नए नियमों के अनुसार, अब कंपनियों को अलग-अलग रूट के लिए अलग लाइसेंस नहीं लेना होगा। पूरे देश में कंटेनर ट्रेन चलाने के लिए एक ही ऑल इंडिया लाइसेंस पर्याप्त होगा। अब तक कंपनियों को अलग अलग रूट और श्रेणियों के लिए अलग लाइसेंस लेने पड़ते थे। इससे प्रक्रिया लंबी और विस्तार मुश्किल हो जाती थी।
नए नियमों के तहत क्या होगा बदलाव?
नई व्यवस्था में अब एक ही ऑल इंडिया लाइसेंस पूरे देश में मान्य होगा। इसमें रेलवे ने रजिस्ट्रेशन फीस भी घटाकर 25 करोड़ रुपये कर दी है। पहले कुछ श्रेणियों में यह 50 करोड़ रुपये तक थी। लाइसेंस 20 साल के लिए मान्य होगा। इसके बाद नवीनीकरण पर कोई शुल्क नहीं देना होगा। अभी देश में ज्यादातर माल ट्रकों से ढोया जाता है। इससे सड़क पर दबाव, ईंधन की खपत और परिवहन लागत बढ़ती है। इसलिए रेलवे अब ज्यादा माल रेल के जरिए भेजने पर जोर दे रहा है। रेलवे का मानना है कि इससे लंबी दूरी के ट्रकों की जरूरत कम होगी। डीजल की खपत और प्रदूषण घटेगा। हाईवे पर भी दबाव कम होगा। ट्रक सिर्फ फैक्टरी से रेलवे टर्मिनल और वहां से अंतिम गंतव्य तक माल पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होंगे, जबकि लंबी दूरी की ढुलाई रेल करेगी।
माल ढुलाई होगी आसान
रेलवे का मानना है कि इस बदलाव से माल ढुलाई आसान होगी, लागत घटेगी और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था ज्यादा तेज व किफायती बनेगी। इससे कारोबार के साथ आम उपभोक्ताओं को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। इस फैसले से कंपनियों का परिवहन खर्च घटेगा। इसका फायदा आगे चलकर राशन, एफएमसीजी उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स, कपड़े और दूसरे रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी दिख सकता है। क्योंकि इस कदम का असर देश की पूरी सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। कंपनियों के लिए माल ढुलाई आसान होगी। समय और लागत दोनों घटेंगे। इसका फायदा आगे चलकर सामान की कीमतों में भी दिख सकता है।
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नए नियमों के तहत क्या होगा बदलाव?
नई व्यवस्था में अब एक ही ऑल इंडिया लाइसेंस पूरे देश में मान्य होगा। इसमें रेलवे ने रजिस्ट्रेशन फीस भी घटाकर 25 करोड़ रुपये कर दी है। पहले कुछ श्रेणियों में यह 50 करोड़ रुपये तक थी। लाइसेंस 20 साल के लिए मान्य होगा। इसके बाद नवीनीकरण पर कोई शुल्क नहीं देना होगा। अभी देश में ज्यादातर माल ट्रकों से ढोया जाता है। इससे सड़क पर दबाव, ईंधन की खपत और परिवहन लागत बढ़ती है। इसलिए रेलवे अब ज्यादा माल रेल के जरिए भेजने पर जोर दे रहा है। रेलवे का मानना है कि इससे लंबी दूरी के ट्रकों की जरूरत कम होगी। डीजल की खपत और प्रदूषण घटेगा। हाईवे पर भी दबाव कम होगा। ट्रक सिर्फ फैक्टरी से रेलवे टर्मिनल और वहां से अंतिम गंतव्य तक माल पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होंगे, जबकि लंबी दूरी की ढुलाई रेल करेगी।
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माल ढुलाई होगी आसान
रेलवे का मानना है कि इस बदलाव से माल ढुलाई आसान होगी, लागत घटेगी और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था ज्यादा तेज व किफायती बनेगी। इससे कारोबार के साथ आम उपभोक्ताओं को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। इस फैसले से कंपनियों का परिवहन खर्च घटेगा। इसका फायदा आगे चलकर राशन, एफएमसीजी उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स, कपड़े और दूसरे रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी दिख सकता है। क्योंकि इस कदम का असर देश की पूरी सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। कंपनियों के लिए माल ढुलाई आसान होगी। समय और लागत दोनों घटेंगे। इसका फायदा आगे चलकर सामान की कीमतों में भी दिख सकता है।
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