WBSSC Scam: बंगाल शिक्षक घोटाला मामला, मेधावियों का धरना-प्रदर्शन 499वें दिन भी जारी
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कमीशन की पहली लिस्ट (2016) में जिन मेधावियों के नाम थे, उन्हें नौकरी नहीं मिली जबकि जिनके नंबर कम थे उन्हें नौकरी मिल गई।
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पश्चिम बंगाल में हुए शिक्षक घोटाले को लेकर कई उम्मीदवार पिछले 499 दिनों से राजभवन के पास गांधी की प्रतिमा के नीचे धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। धरने पर बैठे इन लोगों का आरोप है कि नौंवी, दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं (सेकंडरी और सीनियर सेकंडरी) के अध्यापकों की नियुक्ति में डब्ल्यूबीएसएसएसी (WBSSC) में जमकर भ्रष्टाचार हुआ। इनका आरोप है कि अर्पिता मुखर्जी के घर से मिले 21 करोड़ रुपये का इसके साथ सीधा संबंध इससे है। उन्होंने आरोप लगाया कि कमीशन की पहली लिस्ट (2016) में जिन मेधावियों के नाम थे, उन्हें नौकरी नहीं मिली जबकि जिनके नंबर कम थे उन्हें नौकरी मिल गई।
ज्यादा अंक लाकर भी नहीं मिली नौकरी
सेकंडरी और सीनियर सेकंडरी (2016) पहली लिस्ट वाले मेधावी धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और इनका आरोप है कि कम नंबर वालों को नौकरी मिल गई, जबकि वे ज्यादा नंबर लेकर भी धरना करने पर मजबूर हैं। आरोप है कि मेरिट लिस्ट वालों को नौकरी नहीं मिली। जिन्होंने परीक्षा नहीं दी, उन्हें नौकरी दे दी गई।
करीब 5500 वंचित मेधावी क्रमिक हड़ताल पर बैठे हैं
एक प्रदर्शनकारी प्रियंका कहा कि जो पैसे अर्पिता के घर से मिले हैं, वह साबित है कि एसएससी में कैसे भ्रष्टाचार व्याप्त है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई बार अधिकारियों से मिले, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। यह भी आरोप है कि दूसरे-तीसरे लिस्ट के उम्मीदवारों को नौकरी मिली, पहली लिस्ट वालों को नहीं मिली। वहीं, संगीता ने कहा कि आयोग पूरी तरह से भ्रष्टाचार की गिरफ्त में है।
शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच
बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की विशेष अदालत ने शिक्षक घोटाले में पश्चिम बंगाल के मंत्री और राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी दोनों को तीन अगस्त तक ईडी की हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। ईडी शिक्षक भर्ती घोटाले में वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। 2014-2021 के बीच पार्थ के शिक्षामंत्री रहते हुए यह घोटाला हुआ था। ईडी ने अर्पिता के घर से शुक्रवार को ही 21 करोड़ रुपये बरामद किए थे।