Weather: जम्मू-कश्मीर से तमिलनाडु तक बारिश से चिंता, असम-ओडिशा में बाढ़ से हाहाकार; IMD के अनुमान में क्या?
देश के कई हिस्सों में बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। जम्मू-कश्मीर के डोडा में बाढ़ जैसे हालात हैं, ओडिशा के मयूरभंज में नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और सिक्किम में भूस्खलन प्रभावित परिवारों को हटाया गया है। तमिलनाडु में भारी बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है, जबकि दिल्ली में 22 अगस्त तक बादल और हल्की बारिश के आसार हैं। क्या आने वाले दिनों में मौसम और बिगड़ेगा? देश के बाकी हिस्सों में मौसम का क्या हाल है। आइए, सबकछ विस्तार से जानते हैं...
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विस्तार
देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है और इसके कारण कहीं बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं तो कहीं भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। जम्मू-कश्मीर के डोडा में भारी बारिश के बाद नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। ओडिशा के मयूरभंज में भी लगातार बारिश और बढ़ते नदी जलस्तर ने निचले इलाकों के लिए खतरा बढ़ा दिया है। सिक्किम में हालिया भूस्खलन के बाद प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर भेजने का निर्देश दिया गया है। दक्षिण में तमिलनाडु के कई जिलों में भारी बारिश, आंधी और तेज हवाओं का अनुमान है। वहीं दिल्ली में भी अगले छह दिनों तक मौसम बदला रहने की संभावना है।
डोडा में बारिश के बाद कैसे बने बाढ़ जैसे हालात?
जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के भलेसा गंडोह इलाके में ताजा भारी बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। बारिश के कारण बाजारों, सड़कों, नालों और नदियों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ा है। चिनाब नदी भी ऊंचे जलस्तर पर बह रही है। ऐसे हालात में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। तेज बहाव वाले पानी में वाहन चलाना या नालों और नदियों के करीब जाना जोखिम भरा हो सकता है। लगातार बारिश के बीच स्थानीय स्तर पर जलस्तर पर नजर रखना जरूरी हो गया है।
ओडिशा में बाढ़ का खतरा क्यों बढ़ रहा है?
ओडिशा के मयूरभंज जिले में लगातार भारी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ का खतरा गंभीर बना हुआ है। निचले इलाकों में पानी बढ़ने से लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। इसी बीच बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने नए कम दबाव के क्षेत्र से आने वाले दिनों में बारिश और तेज होने की आशंका जताई गई है। इसका असर पहले से बारिश झेल रहे इलाकों पर पड़ सकता है। ऐसे में मयूरभंज के संवेदनशील और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सतर्कता जरूरी हो गई है।
ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-53 का करीब 100 मीटर हिस्सा रविवार को धंस गया। यह खंड पारादीप पोर्ट को जाजपुर के खनिज समृद्ध क्षेत्रों से जोड़ता है। अधिकारियों ने बताया कि लगातार बारिश के कारण यह घटना हुई। घटना मार्शघाई पुलिस थाना क्षेत्र के नीलाचल बाजार के पास हुई। इससे स्थानीय लोगों में चिंता फैल गई। निर्माणाधीन खंड पर खड़े तीन ट्रक धंसने के बाद एक खाई में गिर गए। पुलिस ने बताया कि ट्रकों में ड्राइवर या हेल्पर नहीं थे, इसलिए कोई हताहत नहीं हुआ। एनएचएआई भुवनेश्वर क्षेत्रीय कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सड़क धंसने का कारण लंबे समय तक जलभराव बताया। उन्होंने कहा कि ट्रक वहां पार्क करने के लिए अधिकृत नहीं थे। यह प्रभावित खंड NH-53 की पुनर्निर्माण और चौड़ीकरण परियोजना का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री माझी आज करेंगे प्रभावित जिलों का दौरा
- मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सोमवार को बाढ़ प्रभावित भद्रक और जाजपुर जिलों का दौरा करेंगे।
- बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण राज्य में भारी बारिश का दौर जारी है।
- भारी बारिश के बीच अब तक 2.37 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
- प्रभावित लोगों के लिए 293 राहत शिविर बनाए गए हैं।
- मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार हालात पर लगातार नजर रख रही है और प्रभावित लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
- बालासोर, भद्रक और जाजपुर में बचाव कार्यों की निगरानी के लिए तीन वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात किया गया है।
- मुख्य सचिव अनु गर्ग ने राज्य में सभी सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।
- मौसम विभाग ने 16 से 18 अगस्त तक तीन दिनों के लिए बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया है।
- बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज और क्योंझर जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
- मौसम विभाग ने 16 से 18 अगस्त तक मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है।
सिक्किम में भूस्खलन के बाद प्रशासन ने क्या किया?
सिक्किम के ग्यालशिंग जिले में हालिया भूस्खलन के बाद प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर भेजने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई युक्सोम उपखंड के 11-रिंबी तिम्ब्रोंग जीपीयू क्षेत्र में की गई है। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश होने पर भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रभावित परिवारों को संवेदनशील स्थानों से हटाना सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम है। बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों और ढलानों पर भी खतरा बढ़ सकता है, इसलिए स्थानीय प्रशासन की चेतावनी को गंभीरता से लेना जरूरी है।
तमिलनाडु में किन इलाकों में भारी बारिश का अनुमान है?
तमिलनाडु में आने वाले दिनों में बारिश का असर बढ़ने की संभावना है। चेंगलपट्टू, कांचीपुरम, विल्लुपुरम और तिरुवन्नामलाई जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है। बारिश के साथ गरज और तेज हवाएं भी चल सकती हैं। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के बाकी हिस्सों में भी कुछ जगहों पर गरज के साथ हल्की बारिश हो सकती है। पश्चिमी घाट से लगे इलाकों के अलावा चेन्नई, तिरुवल्लुर और कुड्डालोर समेत 16 जिलों में मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। इससे कुछ इलाकों में उमस से राहत मिल सकती है, लेकिन जलभराव की परेशानी भी पैदा हो सकती है।

मंगलवार और बुधवार को कहां तेज बारिश हो सकती है?
मंगलवार को चेंगलपट्टू और विल्लुपुरम में कुछ स्थानों पर आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश होने की संभावना है। पुडुचेरी के अलावा चेन्नई, तिरुवल्लुर, रानीपेट, वेल्लोर, तिरुवन्नामलाई, कल्लाकुरिची और कुड्डालोर में भी कुछ जगहों पर मध्यम बारिश, आंधी और तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके बाद बुधवार, 19 अगस्त को नीलगिरी, चेन्नई, चेंगलपट्टू, तिरुवल्लुर और विल्लुपुरम में कुछ स्थानों पर जोरदार बारिश का अनुमान है। इस दौरान तेज हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
दिल्ली में 22 अगस्त तक कैसा रहेगा मौसम?
दिल्ली-एनसीआर में भी अगले छह दिनों तक मौसम का मिजाज बदला हुआ रहने की संभावना है। 17 से 22 अगस्त के बीच आसमान में आमतौर पर बादल छाए रह सकते हैं और अलग-अलग दिनों में हल्की बारिश हो सकती है। 17 अगस्त को सुबह से दोपहर के बीच बहुत हल्की बारिश के साथ शाम और रात में बूंदाबांदी के आसार हैं। 18 अगस्त को भी कई बार बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है। 19 और 20 अगस्त को बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है। इन दिनों कुछ स्थानों पर मध्यम बारिश भी हो सकती है। 21 और 22 अगस्त को फिर हल्की बारिश का दौर रहने की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान 32 से 35 और न्यूनतम 22 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।

तेज बारिश और आंधी के दौरान लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
भारी बारिश और आंधी-तूफान वाले इलाकों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। पानी भरी या फिसलन वाली सड़कों पर वाहन चलाते समय गति कम रखनी चाहिए। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जलभराव की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। बिजली कड़कने के दौरान पेड़, बिजली के खंभे या कमजोर ढांचे के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। तेज हवाओं के दौरान खुले स्थानों पर जाने से भी बचना बेहतर है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की आशंका वाले स्थानों पर प्रशासन की अनुमति के बिना जाने से बचना चाहिए।
क्या बारिश राहत के साथ नई परेशानी भी ला सकती है?
बारिश से गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन कम समय में तेज बारिश कई जगहों पर परेशानी भी बढ़ा सकती है। शहरों के निचले इलाकों में पानी भरने से यातायात प्रभावित हो सकता है। तमिलनाडु में तेज हवाओं के साथ बारिश होने पर स्थानीय स्तर पर आवागमन प्रभावित होने की आशंका है। ओडिशा और जम्मू-कश्मीर में पहले से बढ़े नदी और नालों के जलस्तर के कारण अतिरिक्त बारिश बाढ़ का खतरा बढ़ा सकती है। सिक्किम जैसे पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश भूस्खलन का खतरा बढ़ा सकती है। इसलिए बारिश को केवल राहत के रूप में देखना सही नहीं होगा।
आने वाले दिनों में किन इलाकों पर नजर रहेगी?
आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, ओडिशा, तमिलनाडु और दिल्ली के मौसम पर खास नजर रहेगी। डोडा में जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात हैं। मयूरभंज में लगातार बारिश के बीच नया कम दबाव का क्षेत्र चिंता बढ़ा रहा है। सिक्किम में भूस्खलन प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया है। तमिलनाडु में कई जिलों के लिए भारी बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है। दिल्ली में 22 अगस्त तक बादल और बारिश का दौर बना रह सकता है। यानी आने वाले दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का असर अलग-अलग रूप में दिखाई दे सकता है।