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पश्चिम एशिया संकट: ईरान-US के बीच मध्यस्थता कौन करेगा, कांग्रेस ने कूटनीति के मोर्चे पर सरकार को क्यों घेरा?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 26 Mar 2026 11:24 AM IST
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सार
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पश्चिम एशिया संघर्ष में पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थ भूमिका को भारत की कूटनीतिक विफलता बताया है। उन्होंने केंद्र सरकार और विदेश मंत्री एस जयशंकर पर निशाना साधते हुए कहा कि यह भारत की वैश्विक स्थिति के लिए शर्मनाक और चिंताजनक है।
जयराम रमेश (फाइल)
- फोटो : X (Indian Youth Congress)
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विस्तार
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला किया है। उन्होंने पश्चिम एशिया के युद्ध में पाकिस्तान के मध्यस्थ (Mediator) के रूप में उभरने की खबरों को भारत की क्षेत्रीय कूटनीति की बड़ी विफलता बताया है। रमेश ने विदेश मंत्री एस जयशंकर की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि जयशंकर भारत की शर्मिंदगी को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या बोले जयराम रमेश?
इसको लेकर जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा, यह वास्तव में घोर आपत्तिजनक है कि पाकिस्तान को इस भूमिका के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। उन्होंने लिखा यह वही देश है जिसकी राज्य व्यवस्था ने-
कांग्रेस नेता ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के समय से की। उन्होंने कहा कि 26/11 के मुंबई हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकेला कर दिया था। लेकिन आज स्थिति बदल गई है। अप्रैल 2025 में पहलगाम हमलों के लिए पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर के भड़काऊ बयानों के बावजूद, भारत उसे अलग-थलग करने में नाकाम रहा है, बल्कि इसके उलट पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय महत्व और बढ़ गया है। रमेश ने दावा किया कि फील्ड मार्शल असीम मुनीर अब राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम के पसंदीदा बन गए हैं।
सर्वदलीय बैठक के बाद आया बयान
यह बयान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक के बाद आया है। इस बैठक में सरकार ने विपक्षी नेताओं को भरोसा दिलाया कि भारत इस संकट के बीच मजबूती से खड़ा है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री, विदेश मंत्री जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ऊर्जा सुरक्षा और विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा पर जानकारी दी। सरकार ने कहा कि वह सभी देशों के साथ संपर्क में है ताकि सप्लाई चेन प्रभावित न हो। इस बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और अन्य दलों के नेता शामिल हुए, लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था।
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क्या बोले जयराम रमेश?
इसको लेकर जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा, यह वास्तव में घोर आपत्तिजनक है कि पाकिस्तान को इस भूमिका के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। उन्होंने लिखा यह वही देश है जिसकी राज्य व्यवस्था ने-
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- चार दशकों से अधिक समय तक भारत और अन्य देशों में आतंकवाद को प्रायोजित और संचालित किया है।
- ओसामा बिन लादेन और अन्य खतरनाक वैश्विक आतंकवादियों को दशकों तक पनाह दी।
- परमाणु अप्रसार कानूनों का घोर उल्लंघन कर अन्य देशों को परमाणु क्षमता हासिल करने में मदद की। ए.क्यू. खान नेटवर्क की भूमिका अच्छी तरह दस्तावेजीकृत है और स्वयं तत्कालीन राष्ट्रपति मुशर्रफ ने भी इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था।
- अफगानिस्तान में अस्पतालों और नागरिक ठिकानों पर बेरहमी से बमबारी की और विभिन्न प्रांतों-बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और अन्य क्षेत्रों में अपने ही नागरिकों तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ युद्ध छेड़ा।
कांग्रेस नेता ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के समय से की। उन्होंने कहा कि 26/11 के मुंबई हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकेला कर दिया था। लेकिन आज स्थिति बदल गई है। अप्रैल 2025 में पहलगाम हमलों के लिए पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर के भड़काऊ बयानों के बावजूद, भारत उसे अलग-थलग करने में नाकाम रहा है, बल्कि इसके उलट पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय महत्व और बढ़ गया है। रमेश ने दावा किया कि फील्ड मार्शल असीम मुनीर अब राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम के पसंदीदा बन गए हैं।
सर्वदलीय बैठक के बाद आया बयान
यह बयान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक के बाद आया है। इस बैठक में सरकार ने विपक्षी नेताओं को भरोसा दिलाया कि भारत इस संकट के बीच मजबूती से खड़ा है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री, विदेश मंत्री जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ऊर्जा सुरक्षा और विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा पर जानकारी दी। सरकार ने कहा कि वह सभी देशों के साथ संपर्क में है ताकि सप्लाई चेन प्रभावित न हो। इस बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और अन्य दलों के नेता शामिल हुए, लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था।
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