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पश्चिम एशिया युद्ध का असर: भारतीय एयरलाइंस की अब तक 10,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द; MoCA ने दी जानकारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 07 Apr 2026 04:29 PM IST
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सार
पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण अब तक भारतीय एयरलाइंस की 10,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, रोजाना चलने वाली 350 उड़ानों की संख्या अब घटकर सिर्फ80 से 90 रह गई है। 28 फरवरी को ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच शुरू हुए तनाव ने हवाई यातायात को बुरी तरह प्रभावित किया है।
फ्लाइट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सीधा असर हवाई यात्रा पर पड़ा है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को इस बारे में एक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जब से पश्चिम एशिया क्षेत्र में युद्ध शुरू हुआ है, तब से भारतीय विमानन कंपनियों की 10,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के संयुक्त सचिव असंगबा चुबा आओ ने मीडिया से बातचीत में ये आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि पहले भारतीय एयरलाइंस पश्चिम एशिया के लिए हर दिन 300 से 350 उड़ानें संचालित करती थीं। लेकिन मौजूदा हालातों की वजह से अब यह संख्या बहुत कम हो गई है। अब रोजाना केवल 80 से 90 उड़ानें ही उड़ान भर पा रही हैं।
ये भी पढ़ें: मणिपुर के बिष्णुपुर में बम धमाका: दो बच्चों की मौत, दो महिलाएं घायल; पांच जिलों में 3 दिन के लिए इंटरनेट बंद
यह संकट 28 फरवरी को शुरू हुआ था। उस समय अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने भी पलटवार किया। इस सैन्य टकराव ने पूरे इलाके में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एयरलाइंस ने अपनी सेवाओं में भारी कटौती की है।
उड़ानों के रद्द होने से यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही विमानन कंपनियों को भी बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है। इस तनाव के चलते कई अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्ग अब असुरक्षित हो गए हैं। इस वजह से विमानों को या तो लंबे रास्तों से जाना पड़ रहा है या फिर उड़ानें पूरी तरह रद्द करनी पड़ रही हैं। फिलहाल मंत्रालय लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।
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नागरिक उड्डयन मंत्रालय के संयुक्त सचिव असंगबा चुबा आओ ने मीडिया से बातचीत में ये आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि पहले भारतीय एयरलाइंस पश्चिम एशिया के लिए हर दिन 300 से 350 उड़ानें संचालित करती थीं। लेकिन मौजूदा हालातों की वजह से अब यह संख्या बहुत कम हो गई है। अब रोजाना केवल 80 से 90 उड़ानें ही उड़ान भर पा रही हैं।
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उड़ानों के रद्द होने से यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही विमानन कंपनियों को भी बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है। इस तनाव के चलते कई अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्ग अब असुरक्षित हो गए हैं। इस वजह से विमानों को या तो लंबे रास्तों से जाना पड़ रहा है या फिर उड़ानें पूरी तरह रद्द करनी पड़ रही हैं। फिलहाल मंत्रालय लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।
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