West Bengal: 'मतदाता सूची से रोहिंग्या घुसपैठियों को हटाएं', चुनाव आयोग से BJP ने की घर-घर सर्वे कराने की मांग
पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासत तेज हो गई है। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग से मांग की कि राज्य की मतदाता सूची को रोहिंग्या घुसपैठियों को हटाया जाए। अधिकारी ने घर-घर सर्वे कर रोहिंग्या की पहचान कर वोटर लिस्ट से नाम हटाने की मांग पर जोर दिया।
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पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने है। इसके लिए राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारी तेज कर दी है। आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी अपने चरम पर है। इसी बीच भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को चुनाव आयोग से राज्य की मतदाता सूची को रोहिंग्या घुसपैठियों से मुक्त करने की मांग की। उन्होंने अन्य भाजपा विधायकों के साथ विधानसभा से लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय तक मार्च निकाला और सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा।
घर-घर सर्वे कराने की मांग
अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लगभग सभी हिस्सों में रोहिंग्या मुसलमानों की मौजूदगी है। उन्होंने मांग की कि बिहार की तरह बंगाल में भी रोहिंग्या को वोटर लिस्ट से हटाया जाए और इसके लिए तत्काल घर-घर जाकर सर्वे कराया जाए। शुभेंदु अधिकारी ने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की बात कही। साथ ही कहा कि सीईओ को राज्य और केंद्र सरकार के कम से कम 50% कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात करने चाहिए।
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सीमा सुरक्षा बल को जमीन क्यों नहीं?
शुभेंदु अधिकारी ने सवाल उठाया कि जब बांग्लादेश के साथ 540 किलोमीटर लंबी सीमा से रोहिंग्या घुसपैठ करते हैं, तो राज्य सरकार बीएसएफ को जमीन क्यों नहीं देती? इससे सीमा की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। अधिकारी ने आरोप लगाया कि बंगाल में फर्जी आधार कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र और वोटर आईडी (ईपीआईसी) कार्ड बनाने का गढ़ बन गया है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को जनसंख्या संतुलन की चिंता नहीं, उन्हें सिर्फ वोटर लिस्ट की चिंता है। उन्होंने कहा कि ममता सरकार रोहिंग्या की पहचान के चल रहे काम में बाधा डाल रही है, ताकि अपने वोट बैंक को सुरक्षित रख सके।
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ममता बनर्जी के विरोध मार्च पर निशाना
इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरफ से भाजपा शासित राज्यों में बंगाली भाषियों पर अत्याचार के खिलाफ निकाले गए विरोध मार्च पर निशाना भी साथा। उन्होंने कहा कि यह रैली रोहिंग्या को बचाने के लिए निकाली गई थी, इसमें आम लोगों की कोई भागीदारी नहीं थी।