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'2014 में मोदी आए, 2026 में सब समाप्त...': अमित शाह ने बताई वाम चरमपंथ की कहानी, जानें कैसे साधा निशाना

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Mon, 30 Mar 2026 07:11 PM IST
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सार

अमित शाह ने लोकसभा में नक्सलवाद की पूरी टाइमलाइन बताते हुए कहा कि 1964 से शुरू हुआ यह आंदोलन 2004 तक मजबूत हुआ, लेकिन 2014 के बाद सरकार की नीतियों से कमजोर पड़ा। उन्होंने दावा किया कि 2026 तक नक्सलवाद लगभग खत्म हो गया है। आइए विस्तार से पूरी टाइमलाइन को समझते हैं।

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अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

लोकसभा में आज नक्सलवाद पर चर्चा की गई। ओवैसी, कंगना और अनुराग ठाकुर समेत इसमें कई सांसदों ने भाग लिया।  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस बहस का हिस्सा रहें। अपने संबोधन में उन्होंने कई बाड़ी बाते कहीं। उन्होंने संबोधन की शुरुआत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कई बदलाव आए। वहीं, नक्सलवाद भी साल 2026 तक समाप्त करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली। 
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आगे  गृहमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज वर्षों से चाहता था कि उनकी स्थिति संसद में सामने आए, लेकिन लंबे समय तक इस पर गंभीर चर्चा नहीं हुई। साथ ही उन्होंने वाम चरमपंथ की पूरी टाइमलाइन भी पेश की। आइए, अमित शाह के संबोधन से समझते हैं कि 1964 से 2026 तक, वाम कैसे बढ़ा? और नक्सलवाद कैसे खत्म हुआ? 
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अमित शाह ने बताया कि वामपंथी आंदोलन की जड़ें 1964 में माकपा के गठन से जुड़ी हैं। उस समय सोवियत संघ और चीन के बीच वैचारिक मतभेद हुआ, जिसके चलते भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से अलग होकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी बनी। इसके बाद 1969 में भाकपा-माले का गठन हुआ, जिसने लोकतांत्रिक व्यवस्था का विरोध करते हुए सशस्त्र संघर्ष का रास्ता अपनाया।

क्या 1964-1969 में शुरू हुआ वैचारिक विभाजन?
1964 में माकपा के गठन के साथ वामपंथी राजनीति में दो धाराएं बनीं। 1969 में भाकपा-माले ने संसदीय राजनीति को नकारते हुए सशस्त्र क्रांति का रास्ता चुना। अमित शाह ने कहा कि यह फैसला लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ था और यहीं से नक्सलवाद की शुरुआत हुई।

ये भी पढ़ें- नक्सलवाद मुक्त भारत: 60 साल में कैसे नौ राज्यों से चंद जिलों तक सिमटा, किन कदमों से हुआ इसका सफाया?

क्या 1975 से 2004 तक नक्सल संगठन मजबूत हुए?
अमित शाह ने कहा कि 1975 के बाद माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर यानी एमसीसी सक्रिय हुआ, जो बिहार और झारखंड में फैला। 1998 में पीपुल्स वॉर ग्रुप बना और कई गुट एकजुट हुए। 2001 में गुरिल्ला फोर्स बनाई गई और 2004 में विभिन्न माओवादी संगठनों का विलय हुआ, जिससे आंदोलन और मजबूत हुआ।

क्या रेड कॉरिडोर में फैला नक्सलवाद?
उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने उन इलाकों को चुना जहां सरकार की पहुंच कम थी। वहां के भोले-भाले आदिवासियों को गुमराह कर उनके हाथ में हथियार थमा दिए गए। उन्होंने कहा कि इस विचारधारा का मकसद विकास नहीं, बल्कि सत्ता हासिल करना था।

क्या 2014 के बाद बदली रणनीति और हालात?
अमित शाह ने कहा कि 2014 के बाद सरकार ने विकास और सुरक्षा दोनों पर जोर दिया। धारा 370 और 35ए हटाने, जीएसटी लागू करने और अन्य बड़े फैसलों से देश मजबूत हुआ। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास पहुंचाने और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से हालात बदले।

क्या 2026 तक खत्म होने का दावा सही है?
अमित शाह ने कहा कि 2026 तक नक्सलवाद लगभग समाप्त हो गया है और अब देश नक्सलवाद मुक्त भारत की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने इसे सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि यह 12 साल देश के लिए परिवर्तनकारी रहे हैं।

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