Election Results: पश्चिम बंगाल में काम कर गई 'शाह' की 'वन इलेक्शन फोर्स', CAPF फ्लैग मार्च से भरोसा बहाल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की 'वन इलेक्शन फोर्स' काम कर गई है। पांच केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के दो लाख चालीस हजार जवानों ने जब बंगाल में महीने भर तक मार्क्समैन बुलेटप्रूफ बख्तरबंद वाहन लेकर फ्लैग मार्च निकाला तो वोटरों के बीच एक अटूट 'भरोसा' बना। नतीजा, बंपर 'भय मुक्त वोटिंग' हुई। दोनों चरणों को मिलाकर कुल मतदान प्रतिशत 92.47 रहा। यह आंकड़ा 2011 के विधानसभा चुनाव के 84.72 प्रतिशत के रिकॉर्ड से काफी ज्यादा है। वोटिंग के दौरान और उसके बाद कहीं पर हिंसा की कोई बड़ी घटना देखने को नहीं मिली। साल 2021 के चुनाव में पचास से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई थीं। इस बार चुनावी नतीजे आने के बाद भी बंगाल में सीएपीएफ के सत्तर हजार जवानों की तैनाती सुनिश्चित की गई है।
यूं साफ हुई सीएपीएफ जवानों की तैनाती की तस्वीर...
सोमवार को हुई वोटों की गिनती के बाद भाजपा ने पश्चिम बंगाल में बडी जीत हासिल की है। बंगाल ऐसा पहला राज्य है, जहां इतने बड़े पैमाने पर केंद्रीय बलों की तैनाती हुई है। गृह मंत्री शाह ने निर्वाचन आयोग से मिले इनपुट को जब केंद्रीय बलों के प्रमुखों के साथ साझा किया तो वहां पर सीएपीएफ जवानों की तैनाती की तस्वीर साफ हो गई। राज्य में कहां पर हिंसा हो सकती है, वोटरों को कहां डराया धमकाया जाता है, मतदान के दौरान किन विधानसभा क्षेत्रों में बाधा पहुंचाई जाती है, इस बाबत आईबी से भी रिपोर्ट मांगी गई। तमाम रिपोर्ट मिलने के बाद तय हुआ कि बंगाल में सात चरणों के तहत केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के दो लाख चालीस हजार जवानों को भेजा जाएगा। इसमें आरपीएफ व
राज्य सशस्त्र पुलिस के जवान भी शामिल हैं।
पांच केंद्रीय बलों के प्रमुखों ने संभाला मोर्चा...
पांच केंद्रीय बल, सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, एसएसबी और आईटीबीपी के प्रमुखों ने बंगाल का दौरा कर जवानों की प्रभावी तैनाती सुनिश्चित की। चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हों, इसके लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल को मजबूत किया गया। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति प्रतिबद्धता के सशक्त प्रदर्शन के लिए बल प्रमुखों ने कोलकाता में एक उच्चस्तरीय बैठक की। उसमें सीआईएसएफ डीजी प्रवीर रंजन ने जवानों और अधिकारियों को 'वन इलेक्शन फोर्स' बनकर ड्यूटी करने के लिए प्रोत्साहित किया। जवानों को बताया गया कि सभी केंद्रीय बलों का प्राथमिक उद्देश्य एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव संपन्न कराना है। बंगाल में ऐसा माहौल तैयार करना है, जिसमें प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भय या दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग करने की गारंटी दी जाए। बैठक में सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह, बीएसएफ डीजी प्रवीण कुमार, एसएसबी डीजी संजय सिंघल और आईटीबीपी डीजी शत्रुजीत कूपर मौजूद रहे।
24 घंटे मुस्तैद रहे सीएपीएफ जवान...
सीएपीएफ प्रमुखों ने त्वरित प्रतिक्रिया टीमों की तैनाती की समीक्षा की। स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय से 'एकीकृत सुरक्षा ग्रिड' को लागू किया। सभी प्रमुखों ने खुद वोटरों से बातचीत की। बूथों का दौरा किया। जवानों को बताया गया कि पश्चिम बंगाल में सीएपीएफ का यह मिशन, सिर्फ रोजमर्रा की सुरक्षा से कहीं बढ़कर है। यह मतपत्र की पवित्रता की रक्षा करने के बारे में है। सभी जवान, 'एक चुनावी बल' के सदस्य के तौर पर काम करें। 24 घंटे की तैनाती में संवेदनशील इलाकों की व्यापक निगरानी और सभी जवानों द्वारा 'चुनाव ड्यूटी हैंडबुक' का अनिवार्य उपयोग, ये अनिवार्य किया गया। सीआरपीएफ जवानों ने अपने दो सौ से अधिक मार्क्समैन बुलेटप्रूफ बख्तरबंद वाहनों में सवार होकर फ्लैग मार्च निकाला। केंद्रीय बलों की तैनाती से मतदाताओं में विश्वास पनपा। नतीजा, बंगाल के दोनों चरणों में बंपर वोटिंग हुई।
केंद्रीय बलों को मिली अहम जिम्मेदारी...
अति संवेदनशील बूथों की पहचान कर वहां केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' को तैनात किया गया। किसी बूथ पर पहले से कोई दूसरा बल या लोकल पुलिस भेजी गई थी तो उसे बदला गया। केंद्रीय बलों के जवानों को मतदान केंद्र पर वोटरों के पहचान पत्र की जांच करने का काम सौंपा गया। कई स्थानों के मतदान केंद्रों पर लगे सीसीटीवी कैमरों का नियंत्रण भी बीएसएफ को दिया गया। सीसीटीवी की निगरानी के लिए अलग से जवान तैनात किए गए। इंस्पेक्टर और उससे ऊपर के रैंक वाले ऐसे अफसर, जिन्होंने 2024 के आम चुनाव में उक्त राज्यों में ड्यूटी दी है, उन्हें तत्काल प्रभाव से बदला गया। चुनावी ड्यूटी पर तैनात कंपनी कमांडरों को तत्काल प्रभाव से 'होटल' छोड़कर जवानों के साथ ठहरने का आदेश जारी किया गया।
सात चरणों में की गई केंद्रीय बलों की तैनाती...
पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (सीएपीएफ) की तैनाती को लेकर फरवरी में ही होमवर्क शुरू कर दिया गया था। केंद्रीय बलों की 2400 कंपनियों को सात चरणों के तहत पश्चिम बंगाल में भेजा गया। पहले चरण के तहत एक मार्च को केंद्रीय बलों की 240 कंपनियां, बंगाल के लिए रवाना की गई थी। इनमें बीएसएफ की 55, सीआरपीएफ की 110, आईटीबीपी की 27, एसएसबी की 27 और सीआईएसएफ की 21 कंपनियां शामिल हैं। तैनाती के दूसरे चरण में 10 मार्च को बीएसएफ की 65, सीआरपीएफ की 120, आईटीबीपी की 20, एसएसबी की 19 और सीआईएसएफ की 16 कंपनियों को बंगाल में भेजा गया। तीसरे चरण के तहत 300 कंपनियां बंगाल में पहुंची थीं। इनमें बीएसएफ की 100, सीआरपीएफ की 125, आईटीबीपी की 25, एसएसबी की 25 और सीआईएसएफ की 25 कंपनियां शामिल हैं।
आखिरी चरण में सर्वाधिक कंपनियों की तैनाती...
तैनाती के चौथे चरण में 7 अप्रैल को 300 कंपनियां, बंगाल में भेजी गई। इनमें बीएसएफ की 100, सीआरपीएफ की 125, आईटीबीपी की 25, एसएसबी की 25 और सीआईएसएफ की 25 कंपनियां शामिल हैं। पांचवें चरण में 10 अप्रैल को 300 कंपनियां, बंगाल में तैनात की गई। इनमें बीएसएफ की 90, सीआरपीएफ की 100, आईटीबीपी की 50, एसएसबी की 30 और सीआईएसएफ की 30 कंपनियां शामिल हैं। छठे चरण में 13 अप्रैल को 277 कंपनियां, बंगाल पहुंची। इनमें बीएसएफ की 41, सीआरपीएफ की 49, आईटीबीपी की 43, एसएसबी की 34 और सीआईएसएफ की 22 कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा आरपीएफ की 40 और एसएपी की 48 कंपनियों को भी बंगाल में चुनावी ड्यूटी के लिए भेजा गया। सातवें चरण में 743 कंपनियां, बंगाल में भेजी गई। इनमें बीएसएफ की 105, सीआरपीएफ की 138, आईटीबीपी की 65, एसएसबी की 70 और सीआईएसएफ की 65 कंपनियां शामिल हैं। एसएपी की 300 कंपनियां भी बंगाल में तैनात की गई। ये कंपनियां, 17 अप्रैल को चुनावी ड्यूटी पर पहुंची थीं।