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Hindi News ›   India News ›   West Bengal Flour Racket: ED Uncovers Rebranding of Old Wheat Flour for Bangladesh Export

ED: बंगाल में ताजे आटे में पुराना आटा, सहकारी समितियों की मिलीभगत से पैकिंग बदल कर पहुंचा दिया बांग्लादेश

डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Updated Mon, 27 Apr 2026 07:43 PM IST
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पश्चिम बंगाल में 'आटे में आटा', इस खेल में आरोपियों ने जमकर पैसा कमाया। सहकारी समितियों के साथ मिलीभगत करके निर्यात की अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया गया। वितरकों को जानबूझकर कम मात्रा में आटा पहुंचाया गया। पुराने आटे को ताजे आटे में मिलाकर और फर्जी किसानों के नाम पर नकली बैंक खातों के जरिए न्यूनतम समर्थन मूल्य हासिल किया। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के गेहूं का बड़े पैमाने पर गबन किया गया। पैकिंग बदलकर गेहूं को बांग्लादेश में बेच दिया गया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने कोलकाता, हाबरा और बर्दवान में स्थित 11 परिसरों पर छापेमारी की है। ये परिसर पीडीएस घोटाले में निरंजन चंद्र साहा और अन्य लोगों से जुड़े हुए थे। तलाशी के दौरान 18.4 लाख रुपये नकद, विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज और धन शोधन से संबंधित डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं। 

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बड़े पैमाने पर गबन का आरोप 
ईडी ने इस मामले की जांच, मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा बसीरहाट पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर सीमा शुल्क उपायुक्त, घोजाडांगा एलसीएस की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जिसमें कल्याणकारी योजनाओं के लिए निर्धारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के गेहूं के बड़े पैमाने पर गबन का आरोप लगाया गया था। एफआईआर में आईपीसी, 1860 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की विभिन्न धाराओं के तहत दंडनीय अपराधों का खुलासा हुआ है। 
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एफसीआई चिह्नों वाले बोरों को किया गया उलट-पलट 
आरोप है कि सार्वजनिक वितरण विभाग (पीडीएस) के गेहूं की अवैध खरीद की गई, सरकारी/एफसीआई चिह्नों वाले बोरे उलट-पलट कर धोखाधड़ी से उसकी पैकिंग की गई। गेहूं को घोजाडांगा एलसीएस के माध्यम से बांग्लादेश को निर्यात किया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। आरोपियों को अनुचित लाभ प्राप्त हुआ। पुलिस की जांच के दौरान निरंजन चंद्र साहा, सहाबुद्दीन एसके और साहिदुर रहमान को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत दंडनीय अपराधों के लिए आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।

175 ट्रकों में लदे लगभग 5101.25 मीट्रिक टन गेहूं 
जांच में एक सुनियोजित आपराधिक साजिश का खुलासा हुआ है। इसमें निर्यातकों, थोक विक्रेताओं, आपूर्तिकर्ताओं, परिवहनकर्ताओं, कमीशन एजेंटों और अन्य मध्यस्थों की संलिप्तता पाई गई है। यह साजिश कई जिलों में फैली हुई थी। आरोपियों का जाल अंतरराज्यीय स्तर पर फैला हुआ था। 175 ट्रकों में लदे लगभग 5101.25 मीट्रिक टन पीडीएस गेहूं को विभिन्न पार्किंग स्थलों से जब्त किया गया। बड़ी संख्या में इनवॉइस, बिल, ट्रक दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड जब्त किए गए। इन दस्तावेजों के सत्यापन से पता चला कि इनमें से अधिकांश फर्जी तरीके से तैयार किए गए थे, जिनमें सही वाहन संख्या, थोक विक्रेताओं के लाइसेंस विवरण, जीएसटी संख्या और प्रामाणिक लेनदेन रिकॉर्ड जैसी आवश्यक जानकारियों का अभाव था। इससे स्पष्ट होता है कि वैध व्यापार का झूठा दिखावा करने के लिए जानबूझकर इन्हें जाली तरीके से बनाया गया था। 

जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) में सेंध 
ईडी की जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि आरोपी संस्थाओं ने जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के लिए निर्धारित गेहूं को अवैध रूप से हस्तांतरित करने की एक सुनियोजित कार्यप्रणाली अपनाई। आपूर्तिकर्ताओं, लाइसेंस प्राप्त वितरकों, डीलरों और बिचौलियों की मिलीभगत से अनधिकृत चैनलों के माध्यम से गेहूं कम कीमतों पर खरीदा गया था। आपूर्ति श्रृंखला से बड़ी मात्रा में गेहूं को अवैध रूप से हस्तांतरित कर कई स्थानों पर एकत्रित किया गया था। इसकी उत्पत्ति को छिपाने के लिए, आरोपियों ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य सरकार के चिह्नों वाले मूल बोरे हटा दिए या उलट दिए और उन्हें फिर से भर दिया। इससे पहचान संबंधी विशेषताओं को छिपा दिया गया। इसका मकसद, पीडीएस गेहूं को वैध स्टॉक के रूप में खुले बाजार में आगे बिक्री या निर्यात के लिए भेजना था। इससे परिणामस्वरूप आरोपियों ने अनुचित लाभ कमाया और अपराध की आय अर्जित की।

पुराने आटे को ताजे आटे में मिलाया 
इससे पहले, पीडीएस घोटाले के एक अन्य मामले में, ईडी ने पश्चिम बंगाल राज्य सरकार द्वारा संचालित पीडीएस योजना में पाई गई अनियमितताओं से संबंधित जांच की थी। यह जांच राज्य पुलिस द्वारा पीडीएस वस्तुओं की जब्ती के संबंध में दर्ज की गई छह एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। पीडीएस (सरकारी सहायता) के तहत बेचे जाने वाले आटे (आटा) की खरीद में अनियमितताओं का पता चला है। जांच में पाया गया कि चावल मिलें, अन्य आटा मिल मालिकों के साथ मिलकर, सरकारी अधिकृत वितरकों, डीलरों और संबंधित सहकारी समितियों के साथ मिलीभगत करके अवैध गतिविधियों में शामिल हैं। इन गतिविधियों में वितरकों को जानबूझकर कम मात्रा में आटा पहुंचाकर, पुराने आटे को ताजे आटे में मिलाकर और फर्जी किसानों के नाम पर फर्जी बैंक खातों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान का भुगतान स्वीकार करके धन का गबन करना शामिल है। 

75 करोड़ की चल अचल संपत्ति जब्त
जांच में पता चला है कि आरोपियों ने उपरोक्त कार्यप्रणाली का उपयोग करके हजारों करोड़ रुपये की अवैध आय अर्जित की है। इस आय को इस मामले से जुड़े हितधारकों के बीच बांटा गया था, जिससे अवैध धन सृजन के एक सुनियोजित नेटवर्क का खुलासा हुआ। 75 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति जब्त की गई है और बकिबुर रहमान और पूर्व मंत्री ज्योति प्रिया मल्लिक सहित नौ व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा, इस मामले में मूल अभियोग शिकायत 12.12.2023 को दायर की गई थी। बाद में, कोलकाता स्थित विशेष पीएमएलए न्यायालय के समक्ष चार पूरक अभियोग शिकायतें दायर की गई हैं। इस मामले में 10 अप्रैल को कोलकाता, बोंगांव, रानीगंज, मुर्शिदाबाद और हाबरा स्थित 17 परिसरों में भी तलाशी ली गई। इसमें 30.9 लाख रुपये नकद के साथ-साथ मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए। इस मामले में अब तक कुल 49.3 लाख रुपये नकद जब्त किए गए हैं।

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