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नगर निकाय भर्ती घोटाला: मंत्री रथिन घोष पर फिर ईडी का शिकंजा, चुनावी नतीजों के ठीक बाद पूछताछ के लिए तलब
आईएएनएस, कोलकाता
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 01 May 2026 06:22 PM IST
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सार
पश्चिम बंगाल में चुनावी शोर थमते ही जांच एजेंसियों ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। भर्ती घोटाले की आंच अब सीधे मंत्रियों तक पहुंच रही है, जिससे राज्य की राजनीति में एक बार फिर भारी उथल-पुथल की संभावना है। नगर निकाय भर्ती घोटाला में नया अपडेट क्या है? खबर में जानिए...
रथिन घोष को ईडी ने किया तलब
- फोटो : @IANS
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में करोड़ों रुपये के नगर निकाय भर्ती घोटाले की जांच की आंच अब बड़े-बड़े नेताओं तक पहुंचती दिख रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार को राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रथिन घोष को नोटिस जारी किया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने उन्हें पूछताछ के लिए फिर से समन भेजा है।
छह मई को पेश होने का निर्देश
मंत्री रथिन घोष को कोलकाता के साल्ट लेक स्थित केंद्र सरकार के कार्यालय सीजीओ कॉम्प्लेक्स में उपस्थित होने को कहा गया है। यह तारीख बेहद महत्वपूर्ण है। बंगाल में दो चरणों में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम चार मई को घोषित होने हैं। इसके ठीक दो दिन बाद यानी छह मई को मंत्री को प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश होना होगा।
पहले टाल चुके हैं समन
चुनावों से पहले भी ईडी ने घोष को दो बार नोटिस जारी किए थे। हालांकि, उस समय उन्होंने पेश होने से परहेज किया। घोष उत्तर 24 परगना जिले की मध्यमग्राम विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने चुनावी प्रचार में व्यस्तता का हवाला देकर तब जांच एजेंसी के सामने आने से असमर्थता जताई थी।
यह भी पढ़ें: West Bengal Polls: पश्चिम बंगाल के 15 मतदान केंद्रों पर फिर डाले जाएंगे वोट, ECI बोला- 2 मई को होगा पुनर्मतदान
मंत्री सुजीत बोस से भी हो चुकी है पूछताछ
इस मामले में केवल रथिन घोष ही जांच के दायरे में नहीं हैं। शुक्रवार को राज्य के अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस भी साल्ट लेक स्थित ईडी कार्यालय पहुंचे थे। तीन बार नोटिस टालने के बाद आखिरकार बोस ने अधिकारियों के सवालों का सामना किया।
छापेमारी और जांच का सिलसिला
अक्टूबर 2023 में ईडी ने पहली बार रथिन घोष से पूछताछ की थी। इसके बाद जनवरी 2024 में भी उनसे सवाल-जवाब किए गए और उनके आवास पर तलाशी ली गई थी। इसी तरह सुजीत बोस के ठिकानों पर भी जनवरी 2024 और अक्टूबर 2025 में छापेमारी की जा चुकी है।
कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?
नगर निकाय भर्ती घोटाले का राज तब खुला जब ईडी ने स्कूल नौकरी घोटाले के मामले में प्रमोटर अयान शील के ठिकानों पर छापेमारी की थी। वहां से मिले इनपुट के आधार पर इस नए घोटाले की परतें खुलीं। कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब सीबीआई और ईडी दोनों ही एजेंसियां इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, सत्ताधारी दल के कई बड़े नेताओं और मंत्रियों के नाम इसमें सामने आए हैं।
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छह मई को पेश होने का निर्देश
मंत्री रथिन घोष को कोलकाता के साल्ट लेक स्थित केंद्र सरकार के कार्यालय सीजीओ कॉम्प्लेक्स में उपस्थित होने को कहा गया है। यह तारीख बेहद महत्वपूर्ण है। बंगाल में दो चरणों में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम चार मई को घोषित होने हैं। इसके ठीक दो दिन बाद यानी छह मई को मंत्री को प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश होना होगा।
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पहले टाल चुके हैं समन
चुनावों से पहले भी ईडी ने घोष को दो बार नोटिस जारी किए थे। हालांकि, उस समय उन्होंने पेश होने से परहेज किया। घोष उत्तर 24 परगना जिले की मध्यमग्राम विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने चुनावी प्रचार में व्यस्तता का हवाला देकर तब जांच एजेंसी के सामने आने से असमर्थता जताई थी।
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मंत्री सुजीत बोस से भी हो चुकी है पूछताछ
इस मामले में केवल रथिन घोष ही जांच के दायरे में नहीं हैं। शुक्रवार को राज्य के अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस भी साल्ट लेक स्थित ईडी कार्यालय पहुंचे थे। तीन बार नोटिस टालने के बाद आखिरकार बोस ने अधिकारियों के सवालों का सामना किया।
छापेमारी और जांच का सिलसिला
अक्टूबर 2023 में ईडी ने पहली बार रथिन घोष से पूछताछ की थी। इसके बाद जनवरी 2024 में भी उनसे सवाल-जवाब किए गए और उनके आवास पर तलाशी ली गई थी। इसी तरह सुजीत बोस के ठिकानों पर भी जनवरी 2024 और अक्टूबर 2025 में छापेमारी की जा चुकी है।
कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?
नगर निकाय भर्ती घोटाले का राज तब खुला जब ईडी ने स्कूल नौकरी घोटाले के मामले में प्रमोटर अयान शील के ठिकानों पर छापेमारी की थी। वहां से मिले इनपुट के आधार पर इस नए घोटाले की परतें खुलीं। कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब सीबीआई और ईडी दोनों ही एजेंसियां इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, सत्ताधारी दल के कई बड़े नेताओं और मंत्रियों के नाम इसमें सामने आए हैं।
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