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West Bengal: पश्चिम बंगाल में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के नियमों में बदलाव, DM को मिली नई शक्तियां

Fri, 24 Jul 2026 05:52 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता। Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Fri, 24 Jul 2026 05:52 PM IST
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West Bengal: Rules for issuing birth and death certificates changed; DMs granted new powers.
शुभेंदु अधिकारी - फोटो : पीटीआई

पश्चिम बंगाल सरकार ने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों के पंजीकरण से संबंधित नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। शुक्रवार को जारी एक अधिसूचना के अनुसार, ग्राम पंचायत प्रधानों और नगरपालिका निकाय के अध्यक्षों से यह अधिकार छीन लिया गया है। अब यह जिम्मेदारी जिलाधिकारियों (डीएम), स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारियों और राज्य संचालित अस्पतालों के प्रमुखों को सौंपी गई है।

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यह अधिसूचना मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल द्वारा की गई घोषणा के ठीक एक दिन बाद जारी की गई है। अग्रवाल ने गुरुवार को स्पष्ट किया था कि अब ग्रामीण और शहरी निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधि जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत नहीं होंगे। उन्होंने बताया कि मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के दौरान प्रमाण पत्रों के निर्गम में व्यापक विसंगतियों और कई अनियमितताओं के सामने आने के बाद यह निर्णय लिया गया है।

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प्रशासनिक सुधारों पर जोर

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उनकी सरकार पश्चिम बंगाल के प्रत्येक नागरिक के लिए लोक प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुलभ बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि सार्वजनिक सेवा वितरण को और बेहतर बनाने के लिए राज्य भर में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार पेश किए गए हैं।

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पश्चिम बंगाल जन्म और मृत्यु अधिनियम, 1969 के तहत जारी की गई इस अधिसूचना के माध्यम से जिलाधिकारियों को अब जिला जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रार के रूप में आधिकारिक तौर पर कार्य करने का अधिकार दिया गया है। इससे जिला स्तर पर एक केंद्रीकृत समन्वय स्थापित होगा।

डीएम को मिली नई जिम्मेदारियां

जिलाधिकारियों को ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ (बीएमओएच), ग्रामीण और शहरी अस्पतालों के अधीक्षक, और मेडिकल कॉलेज के प्रमुखों को संस्थागत जन्मों और मृत्युओं के लिए रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत और नगरपालिका के लिए समर्पित सरकारी अधिकारियों को अब रिकॉर्ड-कीपिंग और प्रशासनिक कार्यप्रवाह को सुव्यवस्थित करने के लिए रजिस्ट्रार नियुक्त किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये प्रगतिशील उपाय लोगों के लिए बेहतर सटीकता, दक्षता और निर्बाध सेवा सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

1997 से पंजीकृत प्रमाण पत्रों का पुनः सत्यापन

राज्य सरकार ने 1997 से पंजीकृत सभी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों का पुनः सत्यापन करने का भी निर्णय लिया है। मुख्य सचिव ने गुरुवार को बताया था कि अधिकारी घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे और किसी भी फर्जी प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया जाएगा।

 

 

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