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दिल्ली छात्र आंदोलन: क्या RAF जवानों ने चलाई पैलेट गन, क्यों शुरू हुई जांच? जानिए हर एक बात
Fri, 24 Jul 2026 06:04 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 24 Jul 2026 06:04 PM IST
सार
दिल्ली में नीट पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलन के दौरान आरएएफ पर पैलेट गन और अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगे हैं। वायरल वीडियो और छात्रों के घायल होने के दावों के बाद सीआरपीएफ ने आईजी स्तर पर जांच शुरू कर दी है। जांच पूरी होने के बाद आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
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Cjp Protest in Delhi
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
दिल्ली में नीट पेपर लीक को लेकर जारी छात्र आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई अब जांच के दायरे में आ गई है। प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने और अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों के बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। वायरल वीडियो, घायल छात्रों और सोशल मीडिया पर उठे सवालों के बीच पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जा रही है।
किसके ऊपर जांच की जिम्मेदारी?
सीआरपीएफ ने आरएएफ के महानिरीक्षक (आईजी) को पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जांच रिपोर्ट मिलने के बाद तय किया जाएगा कि मामले में औपचारिक कोर्ट ऑफ इंक्वायरी बैठाई जाए या नहीं। फिलहाल सभी तथ्यों को एकत्र कर घटनाक्रम की समीक्षा की जा रही है।
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क्यों शुरू हुआ विवाद?
20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले छात्रों ने 'चलो संसद' मार्च निकाला था। प्रदर्शनकारी नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प के बाद दावा किया गया कि कम से कम दो छात्र पैलेट गन से घायल हुए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसी बीच सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें आरएएफ जवानों की ओर से लाठीचार्ज, छात्रों को पकड़कर गिराने और कथित तौर पर शॉक-इमिटिंग डिवाइस के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए। हालांकि, कुछ अन्य वीडियो में आरएएफ जवानों पर हमला होता भी दिखाई दे रहा है। इन्हीं विरोधाभासी दावों के बीच जांच शुरू की गई है।
यह भी पढ़ें: दिल्ली विरोध प्रदर्शन: कौन हैं साहिल, जिन्हें पीसी में साथ लाए राहुल गांधी; क्या पैलेट गन से लगी आंख में चोट?
क्या आरएएफ के पास होती है पैलेट गन?
आरएएफ दंगा नियंत्रण के लिए 12-बोर पंप-एक्शन गन का इस्तेमाल कर सकती है, जिसे सामान्य तौर पर पैलेट गन कहा जाता है। लेकिन इसका उपयोग केवल असाधारण और जानलेवा परिस्थितियों में ही किया जा सकता है। मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार, पैलेट गन चलाते समय डिफ्लेक्टर का इस्तेमाल अनिवार्य होता है, ताकि छर्रे शरीर के निचले हिस्से की ओर जाएं और गंभीर चोट का खतरा कम हो। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उसके पास पैलेट गन उपलब्ध नहीं हैं।
मीडिया और सोशल मीडिया पर भी सख्ती
घटना के बाद सीआरपीएफ ने आरएएफ और अन्य तैनात टुकड़ियों के अधिकारियों को मीडिया से बातचीत नहीं करने के निर्देश दिए हैं। बताया गया है कि एक महिला आरएएफ अधिकारी की ओर से मीडिया से बातचीत को विभाग ने अनुचित माना है। वहीं, असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सेहरावत की इंस्टाग्राम गतिविधियों की भी समीक्षा की जा रही है। सीआरपीएफ की 2023 सोशल मीडिया गाइडलाइंस के अनुसार, बल के कर्मियों को राजनीतिक या विवादित मामलों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने की अनुमति नहीं है।
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किसके ऊपर जांच की जिम्मेदारी?
सीआरपीएफ ने आरएएफ के महानिरीक्षक (आईजी) को पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जांच रिपोर्ट मिलने के बाद तय किया जाएगा कि मामले में औपचारिक कोर्ट ऑफ इंक्वायरी बैठाई जाए या नहीं। फिलहाल सभी तथ्यों को एकत्र कर घटनाक्रम की समीक्षा की जा रही है।
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क्यों शुरू हुआ विवाद?
20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले छात्रों ने 'चलो संसद' मार्च निकाला था। प्रदर्शनकारी नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प के बाद दावा किया गया कि कम से कम दो छात्र पैलेट गन से घायल हुए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसी बीच सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें आरएएफ जवानों की ओर से लाठीचार्ज, छात्रों को पकड़कर गिराने और कथित तौर पर शॉक-इमिटिंग डिवाइस के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए। हालांकि, कुछ अन्य वीडियो में आरएएफ जवानों पर हमला होता भी दिखाई दे रहा है। इन्हीं विरोधाभासी दावों के बीच जांच शुरू की गई है।
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क्या आरएएफ के पास होती है पैलेट गन?
आरएएफ दंगा नियंत्रण के लिए 12-बोर पंप-एक्शन गन का इस्तेमाल कर सकती है, जिसे सामान्य तौर पर पैलेट गन कहा जाता है। लेकिन इसका उपयोग केवल असाधारण और जानलेवा परिस्थितियों में ही किया जा सकता है। मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार, पैलेट गन चलाते समय डिफ्लेक्टर का इस्तेमाल अनिवार्य होता है, ताकि छर्रे शरीर के निचले हिस्से की ओर जाएं और गंभीर चोट का खतरा कम हो। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उसके पास पैलेट गन उपलब्ध नहीं हैं।
मीडिया और सोशल मीडिया पर भी सख्ती
घटना के बाद सीआरपीएफ ने आरएएफ और अन्य तैनात टुकड़ियों के अधिकारियों को मीडिया से बातचीत नहीं करने के निर्देश दिए हैं। बताया गया है कि एक महिला आरएएफ अधिकारी की ओर से मीडिया से बातचीत को विभाग ने अनुचित माना है। वहीं, असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सेहरावत की इंस्टाग्राम गतिविधियों की भी समीक्षा की जा रही है। सीआरपीएफ की 2023 सोशल मीडिया गाइडलाइंस के अनुसार, बल के कर्मियों को राजनीतिक या विवादित मामलों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने की अनुमति नहीं है।