Voter List: मतदाता सूची पुनरीक्षण का मुसलमान मतदाताओं पर क्या असर? सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा विवाद
मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ राजद-कांग्रेस ने आज पूरे बिहार में जोरदार चक्का जाम धरना-प्रदर्शन किया। महागठबंधन के इन दलों का कहना है कि इससे बिहार की बड़ी आबादी के वोट कट जाएंगे और उनका मताधिकार प्रभावित होगा। राहुल गांधी ने इस प्रदर्शन के दौरान इसे वोटों की चोरी बताया।
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मतदाता सूची पुनरीक्षण पर विवाद को लेकर राजद-कांग्रेस ने आज पूरे बिहार में जोरदार चक्का जाम धरना-प्रदर्शन किया। महागठबंधन के इन दलों का कहना है कि इससे बिहार की बड़ी आबादी के वोट कट जाएंगे और उनका मताधिकार प्रभावित होगा। राहुल गांधी ने इस प्रदर्शन के दौरान इसे वोटों की चोरी बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल वोटों की चोरी नहीं, बल्कि बिहार के लोगों के भविष्य की भी चोरी है। लेकिन इसे नहीं होने दिया जाएगा। आरोप यह भी है कि अवैध मतदाताओं को बाहर करने के बहाने मुसलमानों के वोट बड़ी संख्या में काटे जा सकते हैं। इस रिविजन को रोकने के लिए विपक्षी दल सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गए हैं। वहीं, भाजपा ने कहा है कि विपक्ष को मतदाता सूची के रिविजन को हिंदू-मुसलमान का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। यह पूरी तरह अवैध मतदाताओं की पहचान कर उन्हें मतदाता सूची से निकालने का मामला है। इस पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए।
भाजपा नेता मानते हैं कि बिहार के मुस्लिम बहुल इलाकों में बड़ी संख्या में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिये मतदाताओं के रूप में मतदाता सूची में स्थान पा चुके हैं। ऐसे फर्जी मतदाताओं की पहचान कर इन्हें बाहर निकालना आवश्यक है, अन्यथा वे चुनाव परिणाम को प्रभावित करेंगे। लेकिन इसको लेकर सियासत शुरू हो गई है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने बुधवार को कहा कि बिहार के सीमांचल इलाकों में अप्रत्याशित तरीके से मतदाता बढ़े हैं। इसकी जांच होनी चाहिए कि प. बंगाल से जुड़े इलाकों में वोटों में इतनी वृद्धि क्यों हुई। उन्होंने कहा कि बिहार के सभी मूल लोगों की नागरिकता और मताधिकार सुरक्षित है, लेकिन जो लोग फर्जी मतदाता हैं, उनका नाम इस सूची से बाहर होना चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने एक याचिका दाखिल कर कहा है कि बिहार के कई विधानसभा क्षेत्रों में अवैध बांग्लादेशी-रोहिंग्या मुसलमानों को मतदाता बना दिया गया है। वे बिहार का चुनाव परिणाम प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा कराई जा रही वोटर लिस्ट पुनरीक्षण को सही बताते हुए इस विवाद में एक पार्टी बनने की मांग की है। उपाध्याय ने चुनाव आयोग को निर्देश देकर सभी राज्यों में चुनाव से पहले मतदाता सूची रिविजन कराने की मांग की है जिससे फर्जी मतदाताओं को मतदान से बाहर रखा जा सके।
असम में हुआ असर
असम में हेमंत बिस्व सरमा सरकार ने राज्य के असली नागरिकों की पहचान शुरू कर दी है। स्वयं मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि जब से असम के असली नागरिकों की पहचान शुरू की गई है, 30 हजार से अधिक फर्जी घुसपैठियों की पहचान की जा चुकी है। राज्य सरकार उन्हें बांग्लादेश भेजने का प्रयास कर रही थी, लेकिन जब से इन्हें असम से बाहर निकालने की मुहिम शुरू हुई, उसके पहले ही ये लोग अपना घर छोड़कर कहीं चले गए। आरोप है कि ये असम के दूसरे इलाकों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और बिहार में चले गए हैं। यदि अवैध मतदाताओं की पहचान होती है तो ऐसे अवैध घुसपैठिये भी पकड़ में आ सकते हैं।
किस जिले में कितनी है मुसलमानों की आबादी
बिहार में कुल 38 जिले हैं। इसमें कई जिलों में मुसलमान अकेले दम पर चुनाव परिणाम की दिशा तय करने में सक्षम हैं। मुस्लिम सेंसस के आंकड़ों के अनुसार, 2011 की जनगणना के अनुसार, किशनगंज जिले में मुसलमानों की आबादी 67.98 प्रतिशत है। इसके अलावा कटिहार में 44.47 प्रतिशत, अररिया में 43 प्रतिशत, पूर्णिया में 38.46 प्रतिशत, पश्चिम चंपारण में 22 प्रतिशत, पूर्वी चंपारण में 19.4 प्रतिशत, दरभंगा में 22.39 प्रतिशत, सीतामढ़ी में 21.62 प्रतिशत, मधुबनी में 18 प्रतिशत, गोपालगंज में 17 प्रतिशत, भागलपुर में 17.68 प्रतिशत है। सीवान और सुपौल में भी मुसलमानों की आबादी 18 प्रतिशत से अधिक है।
सत्ता में ज्यादा हिस्सेदारी की मांग
बिहार सरकार ने जातिगत सर्वे कराया था। इसमें मुसलमानों की राज्य में आबादी 17.7 प्रतिशत बताई गई थी। इसमें चार प्रतिशत के करीब उच्च वर्ण के अशराफ मुसलमान हैं। इनमें शेख मुसलमान 3.8 प्रतिशत, पठान 0.75 प्रतिशत और सैय्यद 0.22 प्रतिशत हैं। शेष 13.5 प्रतिशत के करीब पिछड़े (अंसारी, मलिक, मदरिया, नालबंद, कसाई, डफाली, धुनिया और नट इत्यादि) और दलित मुसलमान हैं। इस सर्वे के बाद मुसलमान यह सवाल करने लगे हैं कि राजद-जदयू को सत्ता में पहुंचाने में यादवों (कुल आबादी में 14 प्रतिशत) से अधिक भूमिका उनकी रही है, लेकिन किसी मुसलमान को लालू यादव और नीतीश कुमार ने आज तक मुख्यमंत्री नहीं बनाया। इस बार चुनाव के दौरान भी यह स्वर उठने लगा है।
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इसे हिंदू-मुसलमान का मुद्दा न बनाए विपक्ष- भाजपा
बिहार भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अब्दुल रहमान ने अमर उजाला से कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को हिंदू-मुसलमान बनाने की कोशिश न करे। जो भी फर्जी मतदाता है, उसे मतदाता सूची से बाहर जाना ही चाहिए। जो बिहार के मूल नागरिक हैं, उन सबके पास कोई न कोई दस्तावेज अवश्य है जो उनके बिहार के नागरिक होने को प्रमाणित कर सकते हैं। दसवीं कक्षा का सर्टिफिकेट या जमीन की खतौनी या जमीन के पट्टे के कागजात किसी को बिहार का नागरिक सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है। जो भी बिहार के लोग हैं, उन्हें इस सूची से कोई परेशानी नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को अपडेट करने से मुसलमान डरा हुआ नहीं है। विपक्ष को इस पर भ्रम फैलाने से दूर रहना चाहिए।
अब्दुल रहमान ने कहा कि चुनाव आयोग ने बिल्कुल सही कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि फर्जी मतदाता किसी भी वर्ग का है, उसे मतदाता सूची से बाहर होना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि राजद और कांग्रेस इस मुद्दे पर भ्रम फैलाकर लोगों का वोट हासिल करना चाहते हैं, लेकिन इस बार यह कोशिश सफल नहीं होगी।