जब अमेरिका के अस्पताल से परिकर ने गोवा के डीजीपी से फोन पर पूछा, पणजी में ट्रैफिक जाम क्यों है?
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यह वाकया तब का है जब अमेरिका के एक अस्पताल में भर्ती मनोहर परिकर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे थे, लेकिन गोवा से एक पल के लिए भी उनकी नजर हट जाए, यह संभव न था। गोवा के अफसरों को जो सूचना नहीं होती थी, वह परिकर के पास रहती थी। सुबह के करीब पांच बजे होंगे कि डीजीपी गोवा, डॉ. मुक्तेश चंद्र का मोबाइल बज उठा। उन्होंने देखा तो मुख्यमंत्री मनोहर परिकर फोन लाइन पर थे। पणजी के मुख्य चौराहे पर ट्रैफिक जाम हो रहा है। यह सुनकर एक बार तो डीजीपी भी अवाक रह गए। फिर उन्होंने बताया कि पणजी के उस इलाके का सर्कुलेशन प्लान बदला गया है, इसलिए यह समस्या आ रही है। बाकायदा परिकर ने फोन पर ही पूरी समस्या को समझा और संतुष्ट होकर फोन रख दिया।
एजीएमयूटी कैडर के आईपीएस अधिकारी डॉ. मुक्तेश चंद्र दो साल से भी अधिक समय तक गोवा के डीजीपी रहे हैं। बीती 28 फरवरी को ही उनका तबादला हुआ है। खास बात है कि 2002 में जब मनोहर परिकर गोवा के मुख्यमंत्री थे तो डॉ. मुक्तेश वहां एसएसपी क्राइम ब्रांच थे। अपने काम के प्रति मनोहर परिकर का जो जुनून रहा है, उसका कोई सानी नहीं है। अमर उजाला डॉट कॉम से एक खास बातचीत में डॉ. मुक्तेश ने बताया, हर विभाग के कामकाज पर वे बहुत पैनी नजर रखते थे। किसी भी फाइल को देखने का उनका जो नजरिया रहा, वह अन्वेषणात्मक के साथ-साथ विश्लेषणात्मक भी था। वे किसी भी मामले को एक संवेदनशील और बेहतरीन इन्वेस्टिगेटर की तरह लेते थे।
जब मनोहर परिकर खुद गाड़ी चलाकर आए और डॉ. मुक्तेश को कोस्टल बेल्ट में ले गए
बतौर डॉ. मुक्तेश चंद्र, मैं अपने परिवार के साथ कहीं डिनर पर गया था। बीच में परिकर जी का फोन आ गया। बोले, कहां हैं आप? मैंने बता दिया। इसके बाद वे बोले, आप मुझे फलां रोड पर मिलें, मैं आ रहा हूं। मैं तुरंत वहां पहुंच गया। पांच-दस मिनट ही बीते होंगे, सामने देखा तो मनोहर परिकर खुद कार चलाकर वहां आ रहे हैं। कोई सुरक्षाकर्मी साथ नहीं। मुझे अपनी गाड़ी में बैठाया और कोस्टल बेल्ट में ले गए।
वहां पहुंचकर उन्होंने कहा, यहां इस वजह से क्राइम बढ़ रहा है। इसमें कौन लोग शामिल हैं, इसके दूरगामी परिणाम क्या हो सकते हैं, यह सब होमवर्क उनके टिप्स पर था। इससे आप अंदाजा लगा लें कि उनकी सोच और काम करने का तरीका क्या रहा होगा। फरवरी में जब मेरे ट्रांसफर का आदेश आया तो मैं उनके पास गया। वह सबसे पहले बोले, आप तो विदेश फेलोशिप पर जा रहे हैं ना। बहुत शुभकामनाएं आपको। कोई भी बात जो किसी व्यक्ति ने उनसे तीन-चार महीने पहले कही हो, वह उन्हें याद रहती थी।
कागजों पर सिलवट तक नहीं है, ये उस लिफाफे में जा ही नहीं पा रहे हैं : परिकर
साल 2002 में टेंडर प्रक्रिया से जुड़ा एक मामला गोवा पुलिस के सामने आया। उस वक्त मुख्यमंत्री रहे मनोहर परिकर ने एसएसपी क्राइम ब्रांच को बुलाया। टेंडर प्रक्रिया से जुड़े कागजात मुख्यमंत्री की मेज पर रखे थे। चूंकि टेंडर के कागजात तो बंद लिफाफे में आते हैं, इसलिए उन पर सिलवट होनी चाहिए। परिकर ने कहा, मुझे लगता है कि ये कागजात लिफाफे से निकलना तो दूर, उसमें डाले ही नहीं गए। चलो, अभी जांच कर लेते हैं। उन्होंने वे कागजात लिफाफे में डालने शुरू किए। सब हैरान, वे कागजात लिफाफे में आ ही नहीं पा रहे थे। मतलब साफ था कि टेंडर प्रक्रिया में कहीं तो छेड़छाड़ हुई है। अब आप समझ सकते हैं कि वे किसी मामले की कितनी गहराई से जांच करते थे।
हर फाइल पर अपने हाथ से नोटिंग करते थे और जवाब में देरी कतई बर्दाश्त नहीं
डॉ. मुक्तेश कहते हैं कि मनोहर परिकर बहुत गहराई से फाइलों को देखते थे। चाहे छोटी-मोटी बात ही क्यों न हो, खुद अपने हाथ से फाइल पर कमेंट लिखते थे। यह देखते थे कि जवाब मिलने में एक दिन की भी देरी न हो। फाइल पूरी पढ़ते थे और दोबारा रिपोर्ट मांग लेते थे, ताकि कहीं कोई कमी न रह जाए। कोई व्यक्ति किसी भी वक्त उनसे मिल सकता था। परिकर के दफ्तर में समय लेने जैसी औपचारिकताएं तो बिलकुल नहीं थी।
परिकर ने कहा, 15 प्वाइंट पर ईनाम दो और कैश दो
दिल्ली की तरह डॉ. मुक्तेश ने आम लोगों को ट्रैफिक जागरूकता अभियान से जोड़ने के लिए गोवा में भी ट्रैफिक प्रहरी योजना लागू कर दी। इस योजना के तहत जो व्यक्ति जितने ज्यादा ट्रैफिक उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के फोटो या वीडियो गोवा पुलिस को भेजेगा, उसे ईनाम मिलेगा। जब मैं इस योजना का ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री परिकर के पास गया तो उन्होंने इसमें कई बदलाव करने के लिए कहा।
वे बोले, गोवा के लोग डिनर कूपन जैसे ईनाम पंसद नहीं करेंगे। यहां आप कैश अवार्ड दो। इससे बहुत से लोग आपकी योजना से जुड़ेंगे। उन्होंने पूछा, कितने प्वाइंट एकत्रित होने पर ईनाम मिलेगा तो डॉ. मुक्तेश ने जवाब दिया कि 30 बिना हेलमेट वाले चालकों के फोटो भेजने होंगे। परिकर बोले, नहीं, 30 से 15 कर दो। एक हजार रुपये का नकद ईनाम दे देंगे। वे गोवा पुलिस मुख्यालय में आए और योजना की शुरुआत की।