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कौन हैं स्वपन दासगुप्ता?: पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित, अब शुभेंदु सरकार में मिली बड़ी जिम्मेदारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 01 Jun 2026 02:49 PM IST
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सार
स्वपन दासगुप्ता को शुभेंदु सरकार में शामिल किया गया है। स्वपन दासगुप्ता पद्म भूषण पुरस्कार विजेता लेखक और पत्रकार हैं और उनके मंत्रिपरिषद में शामिल किए जाने की खूब चर्चा है।
राज्यपाल के साथ स्वपन दासगुप्ता
- फोटो : एक्स/स्वपन दासगुप्ता
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विस्तार
सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार हुआ। इस मंत्रिमंडल विस्तार में 35 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब शुभेंदु सरकार में मंत्रियों की कुल संख्या 41 हो गई है। सोमवार को जिन नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई, उनमें स्वपन दासगुप्ता भी शामिल हैं। स्वपन दासगुप्ता पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित हैं और पत्रकारिता क्षेत्र का बड़ा नाम रहे हैं। आइए जानते हैं उनके बारे में-
कौन हैं स्वपन दासगुप्ता?
शुभेंदु सरकार में मंत्री स्वपन दासगुप्ता भारत के जाने-माने पत्रकार, लेखक हैं। 3 अक्तूबर 1955 को प्रतिष्ठित बंगाली वैद्य परिवार में जन्में स्वपन दासगुप्ता ने देश के कई प्रमुख समाचार संस्थानों में शीर्ष पदों पर काम किया है। स्वपन दासगुप्ता साल 2003 से अलग-अलग संपादकीय पदों पर तैनात रहे। पत्रकारिता और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2015 में उन्हें पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया था।
साल 2016 में राज्यसभा के लिए हुए मनोनीत
साल 2016 में स्वपन दासगुप्ता को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था। राज्यसभा में कार्यकाल के दौरान उन्होंने सार्वजनिक जीवन में भी खासी सक्रियता दिखाई और विभिन्न सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों को सदन में उठाया।
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विवाद के बाद छोड़ी राज्यसभा सदस्यता
स्वपन दासगुप्ता राज्यसभा कार्यकाल के दौरान किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़े। हालांकि बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले वे भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने 2021 के विधानसभा चुनाव में तारकेश्वर सीट से अपना उम्मीदवार बनाया। हालांकि उस चुनाव में स्वपन दासगुप्ता को हार का सामना करना पड़ा।
टीएमसी के गढ़ में लहराया भगवा
कोलकाता की रासबिहारी विधानसभा सीट टीएमसी का गढ़ मानी जाती है। हालांकि 2026 के विधानसभा चुनाव में स्वपन दासगुप्ता ने रासबिहारी सीट पर टीएमसी नेता देबाशीष कुमार को हराकर सभी को हैरान कर दिया। रासबिहारी सीट दक्षिण कोलकाता में आती है और यह एक शहरी इलाका है। यहां स्वपन दासगुप्ता की जीत के लिए भाजपा ने पूरा जोर लगाया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और शुभेंदु अधिकारी ने भी इस सीट पर स्वपन दासगुप्ता के समर्थन में रोड शो किया।
51 शक्तिपीठों में से एक और कोलकाता का मशहूर कालीघाट मंदिर भी रासबिहारी विधानसभा क्षेत्र में है। बंगाल के हाई वोल्टेज मुकाबले में भाजपा की हिंदुत्व की राजनीति और बंगाल अस्मिता के लिए यह मंदिर बेहद अहम है, यही वजह है कि भाजपा ने रासबिहारी सीट पर काफी फोकस किया और ये सीट काफी चर्चा में रही।
कौन हैं स्वपन दासगुप्ता?
शुभेंदु सरकार में मंत्री स्वपन दासगुप्ता भारत के जाने-माने पत्रकार, लेखक हैं। 3 अक्तूबर 1955 को प्रतिष्ठित बंगाली वैद्य परिवार में जन्में स्वपन दासगुप्ता ने देश के कई प्रमुख समाचार संस्थानों में शीर्ष पदों पर काम किया है। स्वपन दासगुप्ता साल 2003 से अलग-अलग संपादकीय पदों पर तैनात रहे। पत्रकारिता और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2015 में उन्हें पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया था।
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साल 2016 में राज्यसभा के लिए हुए मनोनीत
साल 2016 में स्वपन दासगुप्ता को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था। राज्यसभा में कार्यकाल के दौरान उन्होंने सार्वजनिक जीवन में भी खासी सक्रियता दिखाई और विभिन्न सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों को सदन में उठाया।
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स्वपन दासगुप्ता राज्यसभा कार्यकाल के दौरान किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़े। हालांकि बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले वे भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने 2021 के विधानसभा चुनाव में तारकेश्वर सीट से अपना उम्मीदवार बनाया। हालांकि उस चुनाव में स्वपन दासगुप्ता को हार का सामना करना पड़ा।
टीएमसी के गढ़ में लहराया भगवा
कोलकाता की रासबिहारी विधानसभा सीट टीएमसी का गढ़ मानी जाती है। हालांकि 2026 के विधानसभा चुनाव में स्वपन दासगुप्ता ने रासबिहारी सीट पर टीएमसी नेता देबाशीष कुमार को हराकर सभी को हैरान कर दिया। रासबिहारी सीट दक्षिण कोलकाता में आती है और यह एक शहरी इलाका है। यहां स्वपन दासगुप्ता की जीत के लिए भाजपा ने पूरा जोर लगाया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और शुभेंदु अधिकारी ने भी इस सीट पर स्वपन दासगुप्ता के समर्थन में रोड शो किया।
51 शक्तिपीठों में से एक और कोलकाता का मशहूर कालीघाट मंदिर भी रासबिहारी विधानसभा क्षेत्र में है। बंगाल के हाई वोल्टेज मुकाबले में भाजपा की हिंदुत्व की राजनीति और बंगाल अस्मिता के लिए यह मंदिर बेहद अहम है, यही वजह है कि भाजपा ने रासबिहारी सीट पर काफी फोकस किया और ये सीट काफी चर्चा में रही।