क्या गैर भाजपा शासित राज्यों में भी आएगा UCC?: केंद्रीय कानून मंत्री के बयान से हलचल, कहा- जनता ही मजबूर करेगी
अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर विपक्ष शासित राज्यों पर भी जनता का दबाव बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि बी. आर. अंबेडकर भी इस विचार के समर्थक थे। उत्तराखंड, गुजरात और असम पहले ही यूसीसी लागू कर चुके हैं।
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केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि विपक्ष शासित राज्यों पर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए जनता का दबाव होगा। उन्होंने कहा कि इस विचार को लंबे समय से संवैधानिक समर्थन प्राप्त है। मेघवाल ने पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में यह बात कही। यह टिप्पणी उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसे भाजपा शासित राज्यों द्वारा यूसीसी कानून पारित करने के बाद आई है।
बाबासाहेब अंबेडकर भी इस तरह का कानून चाहते थे
मेघवाल ने कहा कि तीन राज्यों ने पहले ही यूसीसी लागू कर दिया है, जो एक अच्छी बात है। उन्होंने बताया कि कई अन्य राज्यों ने भी इस मुद्दे की जांच के लिए समितियां बनाई हैं। मंत्री ने कहा कि यह मुद्दा बहुत लंबे समय से चर्चा में है। उन्होंने याद दिलाया कि संविधान निर्माण के समय भी यह मांग मौजूद थी। बाबासाहेब अंबेडकर ने भी देश को इस दिशा में आगे बढ़ने की बात कही थी। हालांकि, उस समय के नेताओं ने इसे बाद के लिए छोड़ दिया और इसे राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों में रखा।
यूसीसी का अर्थ विवाह, तलाक, गोद लेने, उत्तराधिकार और विरासत जैसे मामलों को नियंत्रित करने वाले सामान्य नागरिक कानूनों से है। ये कानून धर्म की परवाह किए बिना सभी नागरिकों पर लागू होंगे। संविधान का अनुच्छेद 44 कहता है कि राज्य भारत के पूरे क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुरक्षित करने का प्रयास करेगा। निर्देशक सिद्धांत गैर-न्यायसंगत होते हुए भी शासन और नीति निर्माण में मौलिक माने जाते हैं।
जनता की राय और केंद्र की भूमिका
मेघवाल से पूछा गया कि क्या कुछ राज्यों के विफल होने पर केंद्रीय कानून बनाया जाना चाहिए। इस पर मंत्री ने कहा, मेरा मानना है कि वहां के लोग भी अपनी सरकारों से पूछेंगे कि वे ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं। मेघवाल ने स्पष्ट किया कि उनकी स्थिति को केंद्र सरकार द्वारा इस मुद्दे को पूरी तरह से जनता पर छोड़ने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोग निश्चित रूप से इसकी मांग करेंगे, भले ही भाजपा सत्ता में न हो।
विपक्ष पर गलतफहमी फैलाने का आरोप
मेघवाल ने कहा, लोग यह भ्रम फैला रहे हैं कि यह कानून आदिवासी समुदायों पर भी लागू होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी परंपराएं और रीति-रिवाज एक अलग मामला हैं। यूसीसी का व्यापक सिद्धांत नागरिक कानून का समान अनुप्रयोग है। यदि मैं किसी कानून का उल्लंघन करता हूं, तो कार्रवाई मेरे धर्म पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।
किस-किस राज्य में यूसीसी लागू
उत्तराखंड ने इस साल की शुरुआत में यूसीसी को लागू किया। राज्य विधानसभा ने 2024 में यह कानून पारित किया था। यह कानून विवाह, तलाक, विरासत और लिव-इन संबंधों के लिए समान नियम प्रदान करता है। अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
गुजरात ने मार्च में गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 पारित किया। इस कानून में बहुविवाह पर प्रतिबंध और लिव-इन संबंधों का अनिवार्य पंजीकरण जैसे प्रावधान हैं। गुजरात में भी अनुसूचित जनजातियों को छूट दी गई है।
असम ने इस सप्ताह विधानसभा में अपना यूसीसी विधेयक पारित किया। यह ऐसा करने वाला तीसरा भाजपा शासित राज्य बन गया है। इस कानून में बहुविवाह पर प्रतिबंध और विवाह व लिव-इन संबंधों का अनिवार्य पंजीकरण शामिल है।