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Women Rights: 'सभी कार्यस्थलों पर पॉश ऑडिट अनिवार्य किया जाए', महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग ने जताई चिंता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: पवन पांडेय
Updated Wed, 06 Aug 2025 09:48 AM IST
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सार
Women Rights: महाराष्ट्र महिला आयोग ने साफ कहा है कि सभी दफ्तरों में पॉश ऑडिट जरूरी किया जाए और राज्य सरकार इस प्रस्ताव पर अमल करे व इसे लेकर एक आदेश जारी करे, जिससे हर दफ्तर में पॉश ऑडिट अनिवार्य किया जाए। इससे न केवल कानूनी अनुपालन सुनिश्चित होगा, बल्कि महिलाओं को कार्यस्थल पर असली सुरक्षा भी मिलेगी।
रूपाली चाकणकर, महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष
- फोटो : mscw.org.in
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विस्तार
महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग ने कार्यस्थलों पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून पॉश एक्ट की कमजोर अमलवारी पर चिंता जताई है। आयोग ने सभी दफ्तरों में पॉश ऑडिट को अनिवार्य करने की मांग की है।
यह भी पढ़ें - Maharashtra: दिवाली के बाद होंगे स्थानीय निकाय चुनाव, चरणों में होगी प्रक्रिया; राज्य चुनाव आयुक्त ने की घोषणा
'राज्य में कई जगहों पर सिर्फ कागजों पर ICC'
आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो संदेश में कहा कि उन्होंने हाल ही में राज्य के कई हिस्सों का दौरा किया और पाया कि कई दफ्तरों में आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) तो बनी है, लेकिन वो सिर्फ कागजों पर ही मौजूद है। उन्होंने कहा, 'कई बार समिति के सदस्यों को यह तक नहीं पता होता कि उनके अधिकार और जिम्मेदारियां क्या हैं। ऐसे में महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं, भले ही कमेटी हो भी।'
'इसे फायर ऑडिट जितना ही जरूरी माना जाए'
इस स्थिति को सुधारने के लिए महिला आयोग ने महिला और बाल विकास मंत्री को एक प्रस्ताव सौंपा है। इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि पॉश कानून के अनुपालन की नियमित जांच के लिए सरकार एक सरकारी निर्णय (जीआर) जारी करे। रूपाली चाकणकर ने कहा, 'पॉश ऑडिट को वित्तीय ऑडिट या अग्नि सुरक्षा ऑडिट जितना ही जरूरी माना जाना चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि ऐसे ऑडिट से सुनिश्चित होगा कि कार्यस्थल सिर्फ कानूनन सुरक्षित नहीं, बल्कि वास्तव में महिलाओं के लिए सुरक्षित और सहायक वातावरण वाले हों।
क्या है पॉश कानून?
कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण एक्ट 2013 में लागू हुआ था। इसका उद्देश्य कार्यस्थलों पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से बचाना है और उनके लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना है। इसके तहत हर दफ्तर में 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले संस्थान को एक आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) बनानी होती है, जहाँ महिलाएं अपनी शिकायत दर्ज करवा सकें।
यह भी पढ़ें - Maharashtra: 'उद्धव ठाकरे गुट और मनसे जरूर मिलकर आगामी स्थानीय चुनाव लड़ेंगे', संजय राउत का एलान
क्यों जरूरी है पॉश ऑडिट?
यह पता लगाने के लिए कि आईसीसी वाकई में सक्रिय है या नहीं। समिति के सदस्यों को कानून और प्रक्रिया की पूरी जानकारी होनी चाहिए। महिला कर्मचारी खुलकर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकें, ऐसा भरोसेमंद माहौल बनाना। कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाए।
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'राज्य में कई जगहों पर सिर्फ कागजों पर ICC'
आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो संदेश में कहा कि उन्होंने हाल ही में राज्य के कई हिस्सों का दौरा किया और पाया कि कई दफ्तरों में आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) तो बनी है, लेकिन वो सिर्फ कागजों पर ही मौजूद है। उन्होंने कहा, 'कई बार समिति के सदस्यों को यह तक नहीं पता होता कि उनके अधिकार और जिम्मेदारियां क्या हैं। ऐसे में महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं, भले ही कमेटी हो भी।'
'इसे फायर ऑडिट जितना ही जरूरी माना जाए'
इस स्थिति को सुधारने के लिए महिला आयोग ने महिला और बाल विकास मंत्री को एक प्रस्ताव सौंपा है। इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि पॉश कानून के अनुपालन की नियमित जांच के लिए सरकार एक सरकारी निर्णय (जीआर) जारी करे। रूपाली चाकणकर ने कहा, 'पॉश ऑडिट को वित्तीय ऑडिट या अग्नि सुरक्षा ऑडिट जितना ही जरूरी माना जाना चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि ऐसे ऑडिट से सुनिश्चित होगा कि कार्यस्थल सिर्फ कानूनन सुरक्षित नहीं, बल्कि वास्तव में महिलाओं के लिए सुरक्षित और सहायक वातावरण वाले हों।
क्या है पॉश कानून?
कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण एक्ट 2013 में लागू हुआ था। इसका उद्देश्य कार्यस्थलों पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से बचाना है और उनके लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना है। इसके तहत हर दफ्तर में 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले संस्थान को एक आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) बनानी होती है, जहाँ महिलाएं अपनी शिकायत दर्ज करवा सकें।
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क्यों जरूरी है पॉश ऑडिट?
यह पता लगाने के लिए कि आईसीसी वाकई में सक्रिय है या नहीं। समिति के सदस्यों को कानून और प्रक्रिया की पूरी जानकारी होनी चाहिए। महिला कर्मचारी खुलकर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकें, ऐसा भरोसेमंद माहौल बनाना। कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाए।