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Climate Change: 'पर्यावरण पर खराब असर वाली खाने-पीने की चीजों से परहेज करें', राष्ट्रपति मुर्मू ने की अपील
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sun, 05 Nov 2023 08:33 PM IST
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सार
जलवायु परिवर्तन की समस्या बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चिंता जताई है। राष्ट्रपति ने कहा कि खाने-पीने की ऐसी चीजों से परहेज करने की जरूरत है।
वर्ल्ड फूड इंडिया कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संबोधन (वीडियो ग्रैब)
- फोटो : social media
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विस्तार
जलवायु परिवर्तन लगाचार चिंता का सबब बना हुआ है। ताजा घटनाक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि खाने-पीने की ऐसी चीजों से दूर रहने की जरूरत है जो जलवायु परिवर्तन की समस्या को बढ़ाते हैं। उन्होंने यह टिप्पणी वर्ल्ड फूड इंडिया के तीन दिवसीय आयोजन में की।
राष्ट्रपति वर्ल्ड फूड इंडिया कार्यक्रम में
स्वस्थ खाद्य पदार्थों को अपनाने की जरूरत पर बल देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कहा कि खाने-पीने की ऐसी चीजों को अपनाने की जरूरत है जिनसे प्रकृति को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। राष्ट्रीय राजधानी में तीन दिवसीय वर्ल्ड फूड इंडिया कार्यक्रम (3-5 नवंबर) के समापन सत्र में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, "हम जो खाते हैं उसकी पर्यावरणीय लागत पर हमें विचार करना चाहिए। पिछली पीढ़ियों को इस संबंध में चिंता करने की ज़रूरत नहीं थी।"
खाने का मेन्यू पर्यावरण-अनुकूल बनाने की जरूरत
उन्होंने कहा, समय आ गया है जब हमें अपने खान-पान का मेनू इस तरह चुनना होगा कि प्रकृति को किसी भी तरह का नुकसान न हो।" राष्ट्रपति ने उन खाद्य पदार्थों से दूर रहने और पर्यावरण-अनुकूल मेनू की ओर बढ़ने का आह्वान किया जो जलवायु को प्रभावित नहीं करते हैं। मुर्मू ने कहा, "हमें उन खाद्य पदार्थों की ओर जाने की जरूरत है जो न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए बल्कि ग्रह के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छे हैं।"
16 समझौता ज्ञापन, 17,990 करोड़ का निवेश
कार्यक्रम में मौजूद खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री पशुपति कुमार पारस ने कहा कि फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि भारत के कुल कृषि निर्यात में खाद्य प्रसंस्करण का योगदान 75 प्रतिशत है। पारस ने कहा कि तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान लगभग 35,000 करोड़ रुपये के निवेश के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। उन्होंने कार्यक्रम को सभी हितधारकों के प्रयासों से सफल करार दिया। बता दें कि वर्ल्ड फूड इंडिया के पहले दिन खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय और विभिन्न उद्योग संस्थाओं के बीच कुल 16 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इनसे लगभग 17,990 करोड़ रुपये का निवेश हुआ।
50,000 करोड़ रुपये का एफडीआई
एमओयू साइन करने वाली उल्लेखनीय कंपनियों में मोंडेलेज़, केलॉग, आईटीसी, इनोबेव, नेडस्पाइस, आनंदा, जनरल मिल्स और एब इनबेव शामिल हैं। सरकार का दावा है कि पिछले नौ वर्षों में, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र ने लगभग 50,000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित किया है।
2017 में पहली बार हुआ आयोजन
केंद्र ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना भी शुरू की है। वर्ल्ड फूड इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य भारत को 'दुनिया की खाद्य टोकरी' के रूप में प्रदर्शित करना है। पहला संस्करण 2017 में आयोजित किया गया था, लेकिन COVID-19 महामारी के कारण अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जा सके।
निवेश और व्यापार करने में आसानी पर ध्यान
वर्ल्ड फूड इंडिया 2023 में सरकारी निकायों, उद्योग के पेशेवरों, किसानों, उद्यमियों और अन्य हितधारकों को चर्चा में शामिल होने का अवसर मिला। साझेदारी के अलावा, कृषि-खाद्य क्षेत्र में निवेश के अवसरों का पता लगाने के लिए खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी कंपनियों को एक नेटवर्किंग और व्यापार मंच प्रदान किया। आयोजन के दौरान, निवेश और व्यापार करने में आसानी पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सीईओ की गोलमेज बैठकें आयोजित की गईं।
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राष्ट्रपति वर्ल्ड फूड इंडिया कार्यक्रम में
स्वस्थ खाद्य पदार्थों को अपनाने की जरूरत पर बल देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कहा कि खाने-पीने की ऐसी चीजों को अपनाने की जरूरत है जिनसे प्रकृति को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। राष्ट्रीय राजधानी में तीन दिवसीय वर्ल्ड फूड इंडिया कार्यक्रम (3-5 नवंबर) के समापन सत्र में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, "हम जो खाते हैं उसकी पर्यावरणीय लागत पर हमें विचार करना चाहिए। पिछली पीढ़ियों को इस संबंध में चिंता करने की ज़रूरत नहीं थी।"
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खाने का मेन्यू पर्यावरण-अनुकूल बनाने की जरूरत
उन्होंने कहा, समय आ गया है जब हमें अपने खान-पान का मेनू इस तरह चुनना होगा कि प्रकृति को किसी भी तरह का नुकसान न हो।" राष्ट्रपति ने उन खाद्य पदार्थों से दूर रहने और पर्यावरण-अनुकूल मेनू की ओर बढ़ने का आह्वान किया जो जलवायु को प्रभावित नहीं करते हैं। मुर्मू ने कहा, "हमें उन खाद्य पदार्थों की ओर जाने की जरूरत है जो न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए बल्कि ग्रह के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छे हैं।"
16 समझौता ज्ञापन, 17,990 करोड़ का निवेश
कार्यक्रम में मौजूद खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री पशुपति कुमार पारस ने कहा कि फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि भारत के कुल कृषि निर्यात में खाद्य प्रसंस्करण का योगदान 75 प्रतिशत है। पारस ने कहा कि तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान लगभग 35,000 करोड़ रुपये के निवेश के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। उन्होंने कार्यक्रम को सभी हितधारकों के प्रयासों से सफल करार दिया। बता दें कि वर्ल्ड फूड इंडिया के पहले दिन खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय और विभिन्न उद्योग संस्थाओं के बीच कुल 16 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इनसे लगभग 17,990 करोड़ रुपये का निवेश हुआ।
50,000 करोड़ रुपये का एफडीआई
एमओयू साइन करने वाली उल्लेखनीय कंपनियों में मोंडेलेज़, केलॉग, आईटीसी, इनोबेव, नेडस्पाइस, आनंदा, जनरल मिल्स और एब इनबेव शामिल हैं। सरकार का दावा है कि पिछले नौ वर्षों में, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र ने लगभग 50,000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित किया है।
2017 में पहली बार हुआ आयोजन
केंद्र ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना भी शुरू की है। वर्ल्ड फूड इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य भारत को 'दुनिया की खाद्य टोकरी' के रूप में प्रदर्शित करना है। पहला संस्करण 2017 में आयोजित किया गया था, लेकिन COVID-19 महामारी के कारण अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जा सके।
निवेश और व्यापार करने में आसानी पर ध्यान
वर्ल्ड फूड इंडिया 2023 में सरकारी निकायों, उद्योग के पेशेवरों, किसानों, उद्यमियों और अन्य हितधारकों को चर्चा में शामिल होने का अवसर मिला। साझेदारी के अलावा, कृषि-खाद्य क्षेत्र में निवेश के अवसरों का पता लगाने के लिए खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी कंपनियों को एक नेटवर्किंग और व्यापार मंच प्रदान किया। आयोजन के दौरान, निवेश और व्यापार करने में आसानी पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सीईओ की गोलमेज बैठकें आयोजित की गईं।