Karnataka: 'आप लैंबॉर्गिनी में जाएं और सड़क साफ करें', ड्राइवर को हाईकोर्ट ने खास तरीके से सिखाया ट्रैफिक नियम
कर्नाटक हाईकोर्ट ने लैंबॉर्गिनी को लापरवाही से चलाने के आरोपी चिरंथ बीआर के खिलाफ दर्ज आपराधिक केस को रद्द करने पर सहमति जताई, लेकिन इसके साथ सामुदायिक सेवा की शर्त रखी। आइए विस्तार से पूरे मामले को समझते हैं।
विस्तार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने लापरवाही से लैंबॉर्गिनी कार चलाने के मामले में आरोपी चिरंथ बीआर को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक केस को रद्द करने पर सहमति जताई है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यह राहत बिना शर्त नहीं होगी, आरोपी को सामुदायिक सेवा करनी होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने चिरंथ बीआर बनाम कर्नाटक राज्य मामले की सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने कहा कि वह इस संबंध में विस्तृत आदेश बाद में जारी करेंगे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला दिसंबर 2025 का है, जब चिरंथ बीआर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वह अपनी लैंबॉर्गिनी कार को तेज और लापरवाही से चलाते नजर आए। जांच में सामने आया कि उनकी कार में मॉडिफाइड (रेट्रोफिटेड) साइलेंसर लगा था, जो नियमों के खिलाफ था।
हालांकि चिरंथ ने इसके लिए जुर्माना भर दिया था, लेकिन बाद में यह पाया गया कि साइलेंसर को बदला नहीं गया था, जिसके चलते केंगेरी पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
आरोपी का पक्ष
चिरंथ की ओर से पेश वकील रजत ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को गलत तरीके से अपराधी की तरह पेश किया जा रहा है, जबकि उन्होंने कोई गंभीर अपराध नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि अब साइलेंसर बदल दिया गया है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हालांकि, न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने इस दलील से असहमति जताई और तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि आप अपनी लैंबॉर्गिनी में जाएंगे, सड़कें साफ करेंगे और फिर उसी में वापस आएंगे। जब कोर्ट ने पूछा कि आरोपी किस तरह की सामुदायिक सेवा करेगा, तो वकील ने सुझाव दिया कि वह स्कूलों में जाकर बच्चों को ट्रैफिक नियमों के बारे में जागरूक करेंगे।
इस पर जज ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि आपने खुद ट्रैफिक नियम तोड़े हैं और अब बच्चों को सिखाएंगे? बच्चे सीखेंगे कि नियम कैसे तोड़ते हैं! राज्य सरकार के वकील ने भी इस सुझाव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह विडंबनापूर्ण होगा कि लापरवाही से गाड़ी चलाने वाला व्यक्ति बच्चों को ट्रैफिक नियम सिखाए।
आगे क्या?
कोर्ट ने संकेत दिया कि एफआईआर को रद्द किया जाएगा, लेकिन इसके बदले आरोपी को अपराध से जुड़े संदर्भ में उचित सामुदायिक सेवा करनी होगी। इस पर विस्तृत आदेश जल्द जारी किया जाएगा।
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