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भारत-बांग्लादेश बॉर्डर: BSF की 9 BOP का टेंडर लेने के लिए दी गई रिश्वत, 60 करोड़ के मामले में ईडी की कार्रवाई
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Sat, 11 Apr 2026 03:34 PM IST
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सार
ईडी के अनुसार, गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड पर पीएमएलए, 2002 की धारा 3 के तहत धन शोधन के अपराध का आरोप है। यह रिश्वतखोरी का मामला एनपीसीसी लिमिटेड (बीएसएफ की ओर से) द्वारा गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड को भारत-बांग्लादेश सीमा पर लगभग 60.30 करोड़ रुपये के 9 सीमा चौकी (समूह सी और डी) के ठेक दिए जाने से जुड़ा है।
ED
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर बीएसएफ के लिए 9 बॉर्डर आउट पोस्ट 'बीओपी' तैयार की जानी थी। इस निर्माण कार्य पर लगभग 60 करोड़ रुपये खर्च होने थे। बीओपी तैयार करने का टेंडर लेने के लिए रिश्वत दी गई। पहले सीबीआई ने इस मामले में कार्रवाई की। जब इस केस में 'हवाला चैनल' सामने आया तो ईडी ने अपने हाथ में जांच ले ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय ने विशेष (पीएमएलए) न्यायाधीश की अदालत में राकेश मोहन कोटवाल, सेवानिवृत्त क्षेत्रीय प्रबंधक, उत्तर पूर्वी क्षेत्र (आईबीबीडब्ल्यू), एनपीसीसी लिमिटेड, सिलचर, लतीफुल पाशा, प्रभारी अधिकारी, जलपाईगुड़ी परियोजना कार्यालय, एनपीसीसी लिमिटेड, पश्चिम बंगाल, अनीश बैद, निदेशक, मेसर्स गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड, बिनोद सिंघी, निदेशक, मेसर्स गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड, मेसर्स जयचंद लाल सिंघी और सुनील कुमार के खिलाफ अभियोग शिकायत दर्ज की है।
यह भी पढ़ें - 'लेफ्ट की कार्बन कॉपी बन गई है टीएमसी': मुर्शिदाबाद में बरसे पीएम मोदी, कहा- घुसपैठियों की सरकार का अंत तय
ईडी के मुताबिक, गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड पर पीएमएलए, 2002 की धारा 3 के तहत धन शोधन के अपराध का आरोप है। ये धारा 4 के तहत दंडनीय अपराध है। यह रिश्वतखोरी का मामला एनपीसीसी लिमिटेड (बीएसएफ की ओर से) द्वारा गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड को भारत-बांग्लादेश सीमा पर लगभग 60.30 करोड़ रुपये के 9 सीमा चौकी (समूह सी और डी) के ठेक दिए जाने से संबंधित है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की भ्रष्टाचार-विरोधी शाखा-I (एसी-I), नई दिल्ली द्वारा भारतीय दंड संहिता, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत एनपीसीसी लिमिटेड के तत्कालीन जोनल मैनेजर राकेश मोहन कोटवाल और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने इस केस की जांच शुरू की थी। सीबीआई ने 29.11.2021 को नौ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किया।
जांच में पता चला कि तत्कालीन जोनल मैनेजर राकेश मोहन कोटवाल और तत्कालीन प्रोजेक्ट मैनेजर लतीफुल पाशा ने गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के निदेशक अनीश बैद से लगभग 2.24 करोड़ रुपये के रोके गए चालू बिलों को जारी करने के लिए लगभग 33 लाख रुपये (30 लाख रुपये पर तय) की अवैध रिश्वत की मांग की थी। इस मांग को आगे बढ़ाने के लिए अनीश बैद और गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के निदेशक व पार्टनर बिनोद सिंघी ने रिश्वत की मांग की। जयचंद लाल सिंघी ने हवाला चैनलों (सिलचर → गुवाहाटी → दिल्ली) के माध्यम से 25 लाख रुपये के हस्तांतरण की व्यवस्था की।
4 जुलाई 2019 को, गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के खाते से 20.70 लाख रुपये और जयचंद लाल सिंघी के खाते से विनीत डिस्ट्रीब्यूटर्स के खाते में 5.17 लाख रुपये बैंकिंग चैनलों के माध्यम से स्थानांतरित किए गए। अंततः 14 जुलाई 2019 को सुनील कुमार को होटल डियर पार्क, दिल्ली में नकद राशि सौंपी गई, जहां सीबीआई ने लेनदेन को रोककर 25 लाख रुपये बरामद किए।
यह भी पढ़ें - महिला आरक्षण: थरूर बोले- सरकार की मंशा पर सवाल, संघीय ढांचे की मजबूती को लेकर भी चिंता; तर्कों में और क्या?
राकेश मोहन कोटवाल द्वारा ठेकेदारों से अवैध रूप से प्राप्त की गई 15 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि 20.07.2019 को सिलचर स्थित सिंघी हुंडई शोरूम के परिसर से बरामद की गई, जिसे बिनोद सिंघी के निर्देश पर गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के कर्मचारी स्वपन दास के पास रखा गया था। जांच में यह भी पता चला कि राकेश मोहन कोटवाल और श्री लतीफुल पाशा ने कई अन्य एनपीसीसी ठेकेदारों से भी अवैध रिश्वत की मांग की थी। मामले की जांच अभी जारी है।
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ईडी के मुताबिक, गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड पर पीएमएलए, 2002 की धारा 3 के तहत धन शोधन के अपराध का आरोप है। ये धारा 4 के तहत दंडनीय अपराध है। यह रिश्वतखोरी का मामला एनपीसीसी लिमिटेड (बीएसएफ की ओर से) द्वारा गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड को भारत-बांग्लादेश सीमा पर लगभग 60.30 करोड़ रुपये के 9 सीमा चौकी (समूह सी और डी) के ठेक दिए जाने से संबंधित है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की भ्रष्टाचार-विरोधी शाखा-I (एसी-I), नई दिल्ली द्वारा भारतीय दंड संहिता, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत एनपीसीसी लिमिटेड के तत्कालीन जोनल मैनेजर राकेश मोहन कोटवाल और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने इस केस की जांच शुरू की थी। सीबीआई ने 29.11.2021 को नौ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किया।
जांच में पता चला कि तत्कालीन जोनल मैनेजर राकेश मोहन कोटवाल और तत्कालीन प्रोजेक्ट मैनेजर लतीफुल पाशा ने गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के निदेशक अनीश बैद से लगभग 2.24 करोड़ रुपये के रोके गए चालू बिलों को जारी करने के लिए लगभग 33 लाख रुपये (30 लाख रुपये पर तय) की अवैध रिश्वत की मांग की थी। इस मांग को आगे बढ़ाने के लिए अनीश बैद और गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के निदेशक व पार्टनर बिनोद सिंघी ने रिश्वत की मांग की। जयचंद लाल सिंघी ने हवाला चैनलों (सिलचर → गुवाहाटी → दिल्ली) के माध्यम से 25 लाख रुपये के हस्तांतरण की व्यवस्था की।
4 जुलाई 2019 को, गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के खाते से 20.70 लाख रुपये और जयचंद लाल सिंघी के खाते से विनीत डिस्ट्रीब्यूटर्स के खाते में 5.17 लाख रुपये बैंकिंग चैनलों के माध्यम से स्थानांतरित किए गए। अंततः 14 जुलाई 2019 को सुनील कुमार को होटल डियर पार्क, दिल्ली में नकद राशि सौंपी गई, जहां सीबीआई ने लेनदेन को रोककर 25 लाख रुपये बरामद किए।
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राकेश मोहन कोटवाल द्वारा ठेकेदारों से अवैध रूप से प्राप्त की गई 15 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि 20.07.2019 को सिलचर स्थित सिंघी हुंडई शोरूम के परिसर से बरामद की गई, जिसे बिनोद सिंघी के निर्देश पर गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के कर्मचारी स्वपन दास के पास रखा गया था। जांच में यह भी पता चला कि राकेश मोहन कोटवाल और श्री लतीफुल पाशा ने कई अन्य एनपीसीसी ठेकेदारों से भी अवैध रिश्वत की मांग की थी। मामले की जांच अभी जारी है।