सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Young IPS officers do not want postings in intelligence agency IB, what is reason for this disillusionment

MHA: युवा IPS नहीं चाहते खुफिया एजेंसी IB में तैनाती, क्या है मोहभंग की वजह? CBI भी नहीं आ रही रास

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 15 Jan 2026 03:34 PM IST
विज्ञापन
सार

हाल ही में सामने आई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि, युवा आईपीएस अधिकारी सुरक्षा एजेंसियों में अपनी तैनाती नहीं चाहते हैं। यहीं नहीं सीबीआई भी उनकी पहली पसंद नहीं है। जिसके चलते कई अहम पद आईपीएस अधिकारियों की कमी के चलते खाली पड़े हुए हैं। 

Young IPS officers do not want postings in intelligence agency IB, what is reason for this disillusionment
आईपीएस - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

केंद्र में बतौर प्रतिनियुक्ति पर आने वाले 'आईपीएस' अफसरों का तय कोटा भर नहीं पा रहा है। खासतौर पर, आईपीएस डीआईजी और एसपी के पद खाली पड़े हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, युवा आईपीएस अफसर, देश की शीर्ष खुफिया एजेंसी 'आईबी' में काम करने के इच्छुक नहीं हैं। वजह, 'आईबी' में एसपी (आईपीएस) के लिए 83 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 47 पद खाली पड़े हैं। 

Trending Videos


सीबीआई में एसपी (आईपीएस) के लिए 78 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें भी 42 पद रिक्त हैं। इन दोनों शीर्ष केंद्रीय एजेंसियों में 'डीआईजी' (आईपीएस) के पद भी पूरी तरह से नहीं भर पा रहे हैं। दूसरी तरफ केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर आने वाले 'आईपीएस' अधिकारियों का कोटा बढ़ा दिया है। गत वर्ष केंद्र सरकार में लगभग 678 आईपीएस अधिकारियों के पद स्वीकृत थे। अब यह संख्या, 700 से ज्यादा हो गई है। हैरानी की बात ये है कि इन पदों में बढ़ोतरी होने के बाद भी आईपीएस के लिए स्वीकृत 212 पद खाली पड़े हैं।  
विज्ञापन
विज्ञापन


एमएचए की ताजा रिपोर्ट बताती है कि सीबीआई में एसपी (आईपीएस) के लिए 78 पद स्वीकृत हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद ये पद अभी तक नहीं भरे जा सके हैं। कई वर्षों से यही स्थिति है। 78 स्वीकृत पदों में से अगर 42 पद रिक्त हैं तो खाली पदों की यह स्थिति पचास फीसदी से ज्यादा हो जाती है। खुफिया एजेंसी 'आईबी' में एसपी (आईपीएस) के लिए 83 पद स्वीकृत किए हैं। यहां भी वही स्थिति है। पचास फीसदी से ज्यादा यानी 47 पद खाली पड़े हैं। 

राष्ट्रीय जांच एजेंसी 'एनआईए' में आईपीएस एसपी के 39 पदों में से 8 खाली हैं। राष्ट्रीय पुलिस अकादमी 'एनपीए' में आईपीएस एसपी के लिए 14 पद स्वीकृत हैं, मगर इनमें से 6 पद रिक्त हैं। अगर डीआईजी (आईपीएस) की बात करें तो यहां भी अमूमन वैसी ही स्थिति है। बीएसएफ में डीआईजी के लिए स्वीकृत 26 पदों में से 8 खाली पड़े हैं। सीबीआई में 34 डीआईजी के पदों में से 5 रिक्त हैं। सीआईएसएफ में 31 पदों में से 9 पद खाली हैं। आईबी में डीआईजी (आईपीएस) के 63 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 38 पद खाली हैं। इससे रिक्त पदों का प्रतिशत आसानी से समझा जा सकता है। यहां भी पचास फीसदी से अधिक पद रिक्त हैं। एनआईए में डीआईजी के 15 में से 4 पद खाली हैं।  

पुलिस सेवा में कई अहम पद खाली
2025 में फरवरी के पहले सप्ताह की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र में बतौर प्रतिनियुक्ति आईपीएस आईजी के 149 पद थे, जिनमें से 27 रिक्त थे। आईजी के लिए स्वीकृत 256 पदों में से 68 पद रिक्त दिखाए गए। एसपी आईपीएस के 221 पद स्वीकृत थे, जिनमें से 126 पद खाली रहे। सीबीआई जैसी प्रतिष्ठित जांच एजेंसी में आईपीएस एसपी के 73 पद स्वीकृत किए गए, लेकिन 54 पद खाली पड़े रहे। इंटेलिजेंस ब्यूरो 'आईबी' में एसपी आईपीएस के 83 पद मंजूर किए गए, यहां भी 55 पद रिक्त पड़े थे। आईबी में डीआईजी आईपीएस के 63 पद रिजर्व किए गए थे, लेकिन 30 पद खाली पड़े रहे। एक मार्च 2024 की स्थिति देखें तो आईजी के 149 पदों में से 30 पद रिक्त थे। डीआईजी के 256 पदों में से 70 पद रिक्त रहे। एसपी आईपीएस के 228 पदों में से 132 पद खाली थे। 

केंद्रीय गृह मंत्रालय की मार्च 2023 की स्थिति के अनुसार, विभिन्न केंद्रीय सुरक्षा बलों, आयोगों और जांच एवं खुफिया एजेंसियों में डीआईजी 'आईपीएस' के लिए 255 पद स्वीकृत थे, जिनमें से 77 पद खाली पड़े थे। इससे पहले खाली पदों की यह संख्या 120 से 186 के बीच रही है। दिसंबर 2021 की स्थिति के अनुसार, आईपीएस डीआईजी के लिए 252 पद स्वीकृत थे, 118 पद रिक्त थे। इसी तरह एसपी 'आईपीएस' के लिए 203 पद मंजूर किए गए, लेकिन 104 पद खाली पड़े रहे। मतलब, पचास फीसदी पद खाली पड़े रहे। 

जुलाई 2020 की स्थिति के मुताबिक, केंद्र में डीआईजी 'आईपीएस' के लिए 254 पद स्वीकृत थे। इनमें से 164 पद खाली थे। एसपी 'आईपीएस' के लिए स्वीकृत पदों की संख्या 199 थी, मगर इनमें से 97 पद रिक्त रहे। सीबीआई में तब आईपीएस डीआईजी के स्वीकृत 35 में से 20 पद खाली थे। सीआईएसएफ में 20 में से 16 पद रिक्त थे। आईबी में आईपीएस डीआईजी के 63 में से 28 पद और आईपीएस एसपी के 83 में से 49 पद खाली रह गए थे।

बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद बताते हैं कि आईपीएस अधिकारी किसी भी तरह की सख्त जॉब से बचना चाहते हैं। उन्हें अपने राज्य में एसपी के पद पर जिला पुलिस की कमान संभालने का मौका मिलता है, इसलिए वे वहां से कहीं नहीं जाना चाहते। जब वे डीआईजी बनते हैं तो खुद के लिए सुविधा वाली पोस्टिंग तलाशते हैं। अगर उन्हें वह पद केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर नहीं मिलता तो वे ऐसे पद पर ज्वाइन नहीं करते। केंद्रीय पुलिस संगठन या अर्धसैनिक बलों में डीआईजी बनकर आईपीएस नहीं आना चाहते। इन बलों में डीआईजी का पद 'फील्ड पोस्टिंग' के अंतर्गत आता है। पूर्व एडीजी के मुताबिक, ऐसे में आईपीएस की बॉर्डर एरिया में तैनाती होती है। कई अफसर हेडक्वार्टर में रहने का जुगाड़ कर लेते हैं, लेकिन ज्यादातर डीआईजी को दूरदराज की यूनिटों में पोस्टिंग मिलती है। 

सीएपीएफ के कैडर अधिकारियों को पद्दोन्नति का इंतजार
आईजी/एडीजी/एसडीजी जैसे पद ज्यादातर मुख्यालयों में होते हैं, इसलिए आईपीएस यहां तुरंत ज्वाइन कर लेते हैं। खाली पड़े पदों पर सीएपीएफ के कैडर अधिकारियों को स्थायी पदोन्नति नहीं दी जाती। कुछ वर्षों से यह प्रचलन देखने को मिला है कि जब आईपीएस अफसर 'डीआईजी' के पद पर ज्वाइन नहीं करते हैं तो कुछ पदों को कैडर अधिकारियों की तरफ डायवर्ट कर दिया जाता है। ये पद अस्थायी तौर पर कैडर अधिकारियों को दिए जाते हैं। बतौर एसके सूद, मन मुताबिक पोस्टिंग नहीं मिलती तो फिर आईपीएस अधिकारी केंद्र में क्यों आएंगे। आईबी और सीबीआई में भी इसी वजह से आईपीएस एसपी के ज्यादातर पद खाली पड़े रहते हैं। 

मौजूदा समय में स्टेट पुलिस में डीआईजी का ज्यादा रोल नहीं बचा है। अब तो कई राज्यों में आईएएस के पदों पर भी आईपीएस लगाए जाने लगे हैं। चार पांच साल पहले भारतीय पुलिस सेवा (आईपीस) के 17 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने सेवारत आईपीएस से केंद्र सरकार के तहत सेवा देने के लिए आगे आने की अपील की थी। पूर्व अफसरों ने कहा, आईपीएस को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आना चाहिए। उन्हें यहां पर विभिन्न जांच एजेंसियों और सुरक्षा बलों में काम करने का मौका मिलता है। वे समय रहते इन अवसरों का लाभ उठाएं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति, केंद्र और राज्य सरकार के बीच संबंधों को मजबूत करती है। अखिल भारतीय सेवाएं ही सबसे महत्वपूर्ण सूत्र हैं जो भारतीय संघ और राज्यों को एक साथ जोड़ते हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारियों के रूप में हम आईपीएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आने के लिए प्रोत्साहित करने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के वृहद एवं सूक्ष्म स्तर पर योगदान के लिए भारत सरकार की पहल का समर्थन करते हैं। 

ये भी पढ़ें:   I-PAC Raid Case: ईडी और ममता सरकार आमने-सामने, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हम नोटिस जारी करेंगे; जानिए क्या-क्या हुआ

आईपीएस, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को हल्के में न लें, इसके लिए केंद्र सरकार ने 2022 में प्रतिनियुक्ति के नियम कुछ आसान बनाए थे तो वहीं अफसरों को चेताया भी था। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया था कि किसी आईपीएस को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए अनुमोदित किया जाता है और वह अपनी नियुक्ति लेने में विफल रहता है तो उसे पांच वर्ष की अवधि के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और विदेश में नियुक्ति/परामर्श से वंचित कर दिया जाएगा। आईपीएस अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति 'आईपीएस कार्यकाल नीति' के अंतर्गत शासित होती है। उक्त नीति के पैरा 17 के अनुसार, कोई अधिकारी, जिसे केंद्र सरकार के तहत किसी पद पर नियुक्ति के लिए अनुमोदित किया जाता है, अगर वह अपनी नियुक्ति लेने में विफल रहता है तो उसे पांच वर्ष की अवधि के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और विदेश में नियुक्ति से वंचित कर दिया जाएगा। 

केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक कमेटी ने यह सुझाव दिया था कि आईपीएस डीआईजी की प्रतिनियुक्ति के लिए पैनल प्रक्रिया को समाप्त कर दिया जाए। इसके पूरा होने में काफी समय लगता है। सरकार के इस कदम का मकसद, केंद्र में डीआईजी-रैंक के अधिकारियों की भारी कमी को दूर करना था। वह सुझाव मान लिया गया था। इसके बाद सरकार को यह उम्मीद जगी थी कि डीआईजी-रैंक के अधिकारियों के लिए पैनल सिस्टम को खत्म करने से अब प्रतिनियुक्ति पर अधिक आईपीएस केंद्र में आ सकेंगे। मनोनयन प्रक्रिया पूरी होने में करीब एक साल लग जाता था। केंद्र ने 'अखिल भारतीय सेवा' नियमों में संशोधन भी किया था। उसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार, आईएएस व आईपीएस अधिकारी को राज्य की अनुमति या बिना अनुमति के भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुला सकती है।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed