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India-Arab Foreign Ministers Meeting: 'सीमा पार आतंकवाद बिल्कुल स्वीकार्य नहीं', बैठक में बोले एस जयशंकर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 31 Jan 2026 08:04 PM IST
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सार
India-Arab Foreign Ministers Meeting: भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक में एस जयशंकर ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है और पूरी दुनिया में इससे किसी को भी समझौता नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का शिकार बने समाजों को अपनी रक्षा करने का अधिकार है और वे स्वाभाविक रूप से इसका इस्तेमाल करेंगे। विदेश मंत्री ने बैठक में क्या-क्या कहा, पढ़िए-
भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि सीमा पार आतंकवाद को स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ बिल्कुल भी समझौता नहीं होना चाहिए और यह नियम पूरी दुनिया में एक जैसा लागू होना चाहिए।
भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक में अपने संबोधन में जयशंकर ने यह भी कहा कि आतंकवाद का निशाना बने समाजों को अपनी रक्षा करने का अधिकार है और वे 'स्वाभाविक रूप से इसका इस्तेमाल करेंगे'।
'पश्चिम एशिया क्षेत्र भारत के लिए अहम'
जयशंकर ने मौजूदा भू-राजनीतिक माहौल पर बात करते हुए कहा कि यह पश्चिम एशिया में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, क्योंकि पिछले वर्ष में इस क्षेत्र की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा, यह स्पष्ट रूप से हम सभी को प्रभावित करता है और निकटवर्ती क्षेत्र होने के कारण भारत के लिए यह भी अहम है। काफी हद तक, इसके परिणाम भारत और अरब देशों के संबंधों के लिए भी प्रासंगिक हैं।
ये भी पढ़ें: भाजपा की जीत का दावा कर बोले गोयल- DMK के भ्रष्टाचार और तमिल विरोधी संस्कृति से जनता नाराज
विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम एशिया में कई अहम घटनाएं हुई हैं और इनमें से कई का असर क्षेत्र से बाहर भी देखा गया। उन्होंने गाजा व सूडान में संघर्ष, यमन, सीरिया और लीबिया की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, इन चुनौतियों के मद्देनजर हमारा साझा हित स्थिरता, शांति और समृद्धि वाली ताकत को मजबूत करना है।
'सीमा पार आतंकवाद स्वीकार्य नहीं'
अपने संबोधन में जयशंकर ने आतंकवाद से पैदा हुई चुनौतियों पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि इसे रोकने के लिए वैश्विक सहयोग की जरूरत है। विदेश मंत्री ने कहा, खासकर सीमा पार आतंकवाद स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। यह उनका पाकिस्तान की ओर इशारा माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का निशाना बने समाजों को अपनी रक्षा करने का अधिकार है और वे स्वाभाविक रूप से इसका प्रयोग करेंगे।
ये भी पढ़ें: 'भारत जोड़ो यात्रा ने बदली देश की राजनीति', जयराम रमेश ने राहुल की पदयात्रा को बताया ऐतिहासिक
'अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करना जरूरी'
उन्होंने आगे कहा कि इसे रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने करना जरूरी है, क्योंकि यह एक वैश्विक समस्या है। जयशंकर ने जोर देकर कहा, आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और इसके लिए दुनिया में एक जैसा नियम लागू होना चाहिए।
(अधिक जानकारी अपडेट की जा रही है...)
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भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक में अपने संबोधन में जयशंकर ने यह भी कहा कि आतंकवाद का निशाना बने समाजों को अपनी रक्षा करने का अधिकार है और वे 'स्वाभाविक रूप से इसका इस्तेमाल करेंगे'।
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'पश्चिम एशिया क्षेत्र भारत के लिए अहम'
जयशंकर ने मौजूदा भू-राजनीतिक माहौल पर बात करते हुए कहा कि यह पश्चिम एशिया में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, क्योंकि पिछले वर्ष में इस क्षेत्र की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा, यह स्पष्ट रूप से हम सभी को प्रभावित करता है और निकटवर्ती क्षेत्र होने के कारण भारत के लिए यह भी अहम है। काफी हद तक, इसके परिणाम भारत और अरब देशों के संबंधों के लिए भी प्रासंगिक हैं।
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विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम एशिया में कई अहम घटनाएं हुई हैं और इनमें से कई का असर क्षेत्र से बाहर भी देखा गया। उन्होंने गाजा व सूडान में संघर्ष, यमन, सीरिया और लीबिया की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, इन चुनौतियों के मद्देनजर हमारा साझा हित स्थिरता, शांति और समृद्धि वाली ताकत को मजबूत करना है।
'सीमा पार आतंकवाद स्वीकार्य नहीं'
अपने संबोधन में जयशंकर ने आतंकवाद से पैदा हुई चुनौतियों पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि इसे रोकने के लिए वैश्विक सहयोग की जरूरत है। विदेश मंत्री ने कहा, खासकर सीमा पार आतंकवाद स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। यह उनका पाकिस्तान की ओर इशारा माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का निशाना बने समाजों को अपनी रक्षा करने का अधिकार है और वे स्वाभाविक रूप से इसका प्रयोग करेंगे।
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'अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करना जरूरी'
उन्होंने आगे कहा कि इसे रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने करना जरूरी है, क्योंकि यह एक वैश्विक समस्या है। जयशंकर ने जोर देकर कहा, आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और इसके लिए दुनिया में एक जैसा नियम लागू होना चाहिए।
(अधिक जानकारी अपडेट की जा रही है...)
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