{"_id":"697e24d6d8e705278f011384","slug":"mamata-writes-to-cec-again-about-methodology-adopted-in-sir-exercise-2026-01-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bengal: सीएम ममता ने CEC ज्ञानेश कुमार को फिर लिखा पत्र, एसआईआर में माइक्रो ऑब्जर्वर्स की भूमिका पर उठाए सवाल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Bengal: सीएम ममता ने CEC ज्ञानेश कुमार को फिर लिखा पत्र, एसआईआर में माइक्रो ऑब्जर्वर्स की भूमिका पर उठाए सवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 31 Jan 2026 09:31 PM IST
विज्ञापन
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विज्ञापन
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार शाम एक बार फिर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के दौरान अपनाई गई विधि को लेकर सवाल खड़े किए।
मुख्यमंत्री ने इसमें अपने पिछले पत्र का जिक्र किया। पिछले पत्र में उन्होंने ऐसे कई मुद्दों की ओर इशारा किया था, जिनसे लोगों को कथित तौर पर भारी परेशानी और तकलीफ हुई। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के दौरान करीब 140 लोगों की मौत हुई। बनर्जी ने कहा कि यह सब (एसआईआर अभ्यास) मौजूदा कानून और नियमों का खुला उल्लंघन करते हुए मानवाधिकारों और बुनियादी मानवीय संवेदनाओं को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें: 'भारत जोड़ो यात्रा ने बदली देश की राजनीति', जयराम रमेश ने राहुल की पदयात्रा को बताया ऐतिहासिक
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा, मैं एक बार फिर आपको इस बात को लेकर पत्र लिखने को मजबूर हूं कि पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में जनप्रतिनिधित्व कानून और उसके तहत बने नियमों से बाहर जाकर विधि और तरीका अपनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, हाल ही में भारत के चुनावी इतिहास में पहली बार चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान करीब 8,100 सूक्ष्म पर्यवेक्षक (माइक्रो ऑब्जर्वर्स) तैनात किए हैं। इन पर्यवेक्षकों को बिना पर्याप्त प्रशिक्षण या विशेषज्ञता के इस संवेदनशील और अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया में एकतरफा रूप से लगाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मतदाता सूची संशोधन के दौरान सूक्ष्म पर्यवेक्षक की भूमिका, कार्य और अधिकार न तो 1950 के जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में परिभाषित हैं, न ही मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 या किसी अन्य वैधानिक व्यवस्था में इसकी अनुमति दी गई है।
Trending Videos
मुख्यमंत्री ने इसमें अपने पिछले पत्र का जिक्र किया। पिछले पत्र में उन्होंने ऐसे कई मुद्दों की ओर इशारा किया था, जिनसे लोगों को कथित तौर पर भारी परेशानी और तकलीफ हुई। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के दौरान करीब 140 लोगों की मौत हुई। बनर्जी ने कहा कि यह सब (एसआईआर अभ्यास) मौजूदा कानून और नियमों का खुला उल्लंघन करते हुए मानवाधिकारों और बुनियादी मानवीय संवेदनाओं को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: 'भारत जोड़ो यात्रा ने बदली देश की राजनीति', जयराम रमेश ने राहुल की पदयात्रा को बताया ऐतिहासिक
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा, मैं एक बार फिर आपको इस बात को लेकर पत्र लिखने को मजबूर हूं कि पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में जनप्रतिनिधित्व कानून और उसके तहत बने नियमों से बाहर जाकर विधि और तरीका अपनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, हाल ही में भारत के चुनावी इतिहास में पहली बार चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान करीब 8,100 सूक्ष्म पर्यवेक्षक (माइक्रो ऑब्जर्वर्स) तैनात किए हैं। इन पर्यवेक्षकों को बिना पर्याप्त प्रशिक्षण या विशेषज्ञता के इस संवेदनशील और अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया में एकतरफा रूप से लगाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मतदाता सूची संशोधन के दौरान सूक्ष्म पर्यवेक्षक की भूमिका, कार्य और अधिकार न तो 1950 के जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में परिभाषित हैं, न ही मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 या किसी अन्य वैधानिक व्यवस्था में इसकी अनुमति दी गई है।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
