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अंत समय का चिंतन ही निर्धारित करेगा अगला जन्म : कथावाचक
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Mon, 06 Apr 2026 01:44 AM IST
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श्रीमद् भगवत कथा सुनाते कथावाचक रामदास अनुरागी। विज्ञप्ति
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बसोहली उपमंडल के गांव धार झेंखर में श्रीमद् भागवत कथा जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। बसोहली उपमंडल के गांव धार झेंखर में श्रीमद् भागवत कथा जारी है। तीसरे दिन कथावाचक राम दास अनुरागी ने सुनाई। उन्होंने कहा कि यह कथा हमें सिखाती है कि अंत समय का चिंतन हमारा अगला जन्म निर्धारित करता है।
कथावाचक ने बताया कि ऋषभदेव के पुत्र राजा भरत अत्यंत पुण्यात्मा थे लेकिन वन में तपस्या करते समय एक हिरण के बच्चे से मोह कर बैठे। अंत समय में हिरण का चिंतन करने के कारण उन्हें अगले जन्म में हिरण बनना पड़ा। हिरण रूप में भी वे भगवान का स्मरण करते रहे और मृत्यु के बाद एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे। इस जन्म में वे ज्ञानी थे लेकिन पुनः आसक्ति से बचने के लिए उन्होंने खुद को समाज से अलग कर लिया और जड़ (मूर्ख) की तरह व्यवहार किया।
कथा में आगे बताया गया कि राजा रहूगण की पालकी उठाते समय जड़ भरत ने आत्मा और शरीर का अंतर समझाया। यह उपदेश आज भी प्रसिद्ध है और आत्मज्ञान का गहरा संदेश देता है। भगवान के अलावा किसी अन्य में अत्यधिक मोह बंधन का कारण बनता है।
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कठुआ। बसोहली उपमंडल के गांव धार झेंखर में श्रीमद् भागवत कथा जारी है। तीसरे दिन कथावाचक राम दास अनुरागी ने सुनाई। उन्होंने कहा कि यह कथा हमें सिखाती है कि अंत समय का चिंतन हमारा अगला जन्म निर्धारित करता है।
कथावाचक ने बताया कि ऋषभदेव के पुत्र राजा भरत अत्यंत पुण्यात्मा थे लेकिन वन में तपस्या करते समय एक हिरण के बच्चे से मोह कर बैठे। अंत समय में हिरण का चिंतन करने के कारण उन्हें अगले जन्म में हिरण बनना पड़ा। हिरण रूप में भी वे भगवान का स्मरण करते रहे और मृत्यु के बाद एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे। इस जन्म में वे ज्ञानी थे लेकिन पुनः आसक्ति से बचने के लिए उन्होंने खुद को समाज से अलग कर लिया और जड़ (मूर्ख) की तरह व्यवहार किया।
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कथा में आगे बताया गया कि राजा रहूगण की पालकी उठाते समय जड़ भरत ने आत्मा और शरीर का अंतर समझाया। यह उपदेश आज भी प्रसिद्ध है और आत्मज्ञान का गहरा संदेश देता है। भगवान के अलावा किसी अन्य में अत्यधिक मोह बंधन का कारण बनता है।