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Kathua News: लखनपुर में नशा मुक्ति केंद्र सील, 26 युवाओं को किया रेस्क्यू
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Thu, 30 Apr 2026 01:24 AM IST
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नशा मुक्ति केंद्र को सील करते हुए प्रशासनिक टीम
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कई महीनों से बिना पंजीकरण और सरकारी अनुमति के चल रहा था नशा मुक्ति केंद्र
मुख्य संचालक को तलब कर दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। प्रशासनिक टीम ने लखनपुर थाना क्षेत्र में संचालित नशा मुक्ति केंद्र को सील कर दिया है। यह केंद्र कई महीनों से बिना पंजीकरण और सरकारी अनुमति के चल रहा था।
एडीसी विश्वजीत सिंह ने बताया कि विशेष इनपुट के आधार पर टीम ने दो स्थानों पर छापे मारे। एक केंद्र शहर के फिश पांड के पास था जिसे पहले ही सील किया जा चुका है जबकि दूसरा लखनपुर के पास मिला। इस दौरान मौजूद संचालकों के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं पाए गए। मुख्य संचालक को तलब कर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से ऐसे केंद्र चलाने के लिए स्पष्ट गाइडलाइन हैं और इसकी कोई अनुमति जारी नहीं की गई थी। अधिकारियों ने बताया कि जीएमसी में एक प्रॉपर एटीएफ सेंटर पहले से संचालित है। यहां विशेषज्ञों की देखरेख में परामर्श और आवश्यक दवाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं।
मुक्त कराए गए सभी 26 युवाओं को एटीएफ सेंटर में भेजा गया है। इन्हें विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया है। प्रशासन ने दोहराया कि नशा मुक्ति सेवाओं को सरकारी मानकों के अनुसार ही संचालित किया जाएगा। जांच के दौरान पुलिस और राजस्व विभाग की टीम भी मौके पर मौजूद रही।
कई बार नोटिस, जांच और छापे फिर भी बेखौफ चलते रहे अवैध नशा मुक्ति केंद्र
- कठुआ जिले में पहले भी दो युवकों की हो चुकी है इन अवैध नशा मुक्ति केंद्रों में मौत
- कई बार सील भी किए जा चुके हैं
जिले में अवैध नशा मुक्ति केंद्रों का धंधा नया नहीं है। प्रशासन की नाक तले यह अवैध केंद्र वर्षों से फलते-फूलते रहे हैं। 2024 में ऐसे ही एक केंद्र में युवक की मौत और संचालकों के फरार होने के बाद जब दूसरा ऐसा मामला सामने आया तो प्रशासन भी नींद से जाग गया। केंद्रों की जांच की प्रक्रिया शुरू हुई। कुछ बंद हुए तो कुछ छोड़कर भाग गए। प्रशासन के ढीला पड़ते ही केंद्र फिर से सक्रिय हो गए।
नशा मुक्ति केंद्रों को लेकर सामने आई जानकारी हैरान करने वाली है। ज्यादातर अवैध चलने वाले केंद्रों में मनोचिकित्सक ही उपलब्ध नहीं होते हैं। यहां तक ऐसे मरीजों को संभालने के लिए भी प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत होती है जो नहीं मिलता। लिहाजा एक लाख रुपये तक की फीस लेने के बाद गुफानुमा और कोठरी की तरह के इन केंद्राें में युवाओं को बंद कर दिया जाता है।
हैरत की बात है कि यहां विभागीय टीमों के दौरे भी नहीं होते जो समय समय पर इनकी जांच करें। प्रशासन ने अगस्त 2024 में भी जिले में संचालित अवैध केंद्रों को नोटिस देने की प्रक्रिया की थी। प्रशासन मौके पर भी गया लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
नशा छुड़ाने के नाम पर मोटी वसूली,
लचीले कानूनों, विभागों में तालमेल की कमी और भ्रष्टाचार से फलते फूलते रहे अवैध नशा मुक्ति केंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। नशा छुड़ाने के नाम पर नशेड़ियों की जिंदगी को बेचने का अवैध धंधा भी जिले में पिछले एक दशक में जमकर फला फूला है। सामाजिक सरोकारों की वजह से इन युवाओं को हिमाचल और जम्मू कश्मीर के सीमावर्ती जिलों में अवैध रूप से संचालित नशा मुक्ति केंद्रों में रखा जाता रहा है। हर महीने हजारों रुपये बतौर फीस वसूली जाती है।
सूत्रों के अनुसार नशा मुक्ति के नाम पर इनमें से कई अवैध केंद्र तो अवैध नशे की डोज के सप्लाई अड्डे का काम भी करते रहे हैं। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में नशा बढ़ने पर अब यहां भी ऐसे नशा मुक्ति केंद्रों की मांग बढ़ती चली गई। प्रदेश के लचीले कानूनों, भ्रष्टाचार और विभागों में तालमेल की कमी के चलते अवैध नशा मुक्ति केंद्रों को भी राह दिख गई। कई वर्षों से कठुआ जिले में स्वास्थ्य विभाग, ड्रग कंट्रोल विभाग, पुलिस और प्रशासन की नाक तले यह चलते रहे और किसी ने भी इनकी मान्यता तक जानने की जहमत नहीं उठाई।
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मुख्य संचालक को तलब कर दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। प्रशासनिक टीम ने लखनपुर थाना क्षेत्र में संचालित नशा मुक्ति केंद्र को सील कर दिया है। यह केंद्र कई महीनों से बिना पंजीकरण और सरकारी अनुमति के चल रहा था।
एडीसी विश्वजीत सिंह ने बताया कि विशेष इनपुट के आधार पर टीम ने दो स्थानों पर छापे मारे। एक केंद्र शहर के फिश पांड के पास था जिसे पहले ही सील किया जा चुका है जबकि दूसरा लखनपुर के पास मिला। इस दौरान मौजूद संचालकों के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं पाए गए। मुख्य संचालक को तलब कर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
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प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से ऐसे केंद्र चलाने के लिए स्पष्ट गाइडलाइन हैं और इसकी कोई अनुमति जारी नहीं की गई थी। अधिकारियों ने बताया कि जीएमसी में एक प्रॉपर एटीएफ सेंटर पहले से संचालित है। यहां विशेषज्ञों की देखरेख में परामर्श और आवश्यक दवाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं।
मुक्त कराए गए सभी 26 युवाओं को एटीएफ सेंटर में भेजा गया है। इन्हें विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया है। प्रशासन ने दोहराया कि नशा मुक्ति सेवाओं को सरकारी मानकों के अनुसार ही संचालित किया जाएगा। जांच के दौरान पुलिस और राजस्व विभाग की टीम भी मौके पर मौजूद रही।
कई बार नोटिस, जांच और छापे फिर भी बेखौफ चलते रहे अवैध नशा मुक्ति केंद्र
- कठुआ जिले में पहले भी दो युवकों की हो चुकी है इन अवैध नशा मुक्ति केंद्रों में मौत
- कई बार सील भी किए जा चुके हैं
जिले में अवैध नशा मुक्ति केंद्रों का धंधा नया नहीं है। प्रशासन की नाक तले यह अवैध केंद्र वर्षों से फलते-फूलते रहे हैं। 2024 में ऐसे ही एक केंद्र में युवक की मौत और संचालकों के फरार होने के बाद जब दूसरा ऐसा मामला सामने आया तो प्रशासन भी नींद से जाग गया। केंद्रों की जांच की प्रक्रिया शुरू हुई। कुछ बंद हुए तो कुछ छोड़कर भाग गए। प्रशासन के ढीला पड़ते ही केंद्र फिर से सक्रिय हो गए।
नशा मुक्ति केंद्रों को लेकर सामने आई जानकारी हैरान करने वाली है। ज्यादातर अवैध चलने वाले केंद्रों में मनोचिकित्सक ही उपलब्ध नहीं होते हैं। यहां तक ऐसे मरीजों को संभालने के लिए भी प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत होती है जो नहीं मिलता। लिहाजा एक लाख रुपये तक की फीस लेने के बाद गुफानुमा और कोठरी की तरह के इन केंद्राें में युवाओं को बंद कर दिया जाता है।
हैरत की बात है कि यहां विभागीय टीमों के दौरे भी नहीं होते जो समय समय पर इनकी जांच करें। प्रशासन ने अगस्त 2024 में भी जिले में संचालित अवैध केंद्रों को नोटिस देने की प्रक्रिया की थी। प्रशासन मौके पर भी गया लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
नशा छुड़ाने के नाम पर मोटी वसूली,
लचीले कानूनों, विभागों में तालमेल की कमी और भ्रष्टाचार से फलते फूलते रहे अवैध नशा मुक्ति केंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। नशा छुड़ाने के नाम पर नशेड़ियों की जिंदगी को बेचने का अवैध धंधा भी जिले में पिछले एक दशक में जमकर फला फूला है। सामाजिक सरोकारों की वजह से इन युवाओं को हिमाचल और जम्मू कश्मीर के सीमावर्ती जिलों में अवैध रूप से संचालित नशा मुक्ति केंद्रों में रखा जाता रहा है। हर महीने हजारों रुपये बतौर फीस वसूली जाती है।
सूत्रों के अनुसार नशा मुक्ति के नाम पर इनमें से कई अवैध केंद्र तो अवैध नशे की डोज के सप्लाई अड्डे का काम भी करते रहे हैं। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में नशा बढ़ने पर अब यहां भी ऐसे नशा मुक्ति केंद्रों की मांग बढ़ती चली गई। प्रदेश के लचीले कानूनों, भ्रष्टाचार और विभागों में तालमेल की कमी के चलते अवैध नशा मुक्ति केंद्रों को भी राह दिख गई। कई वर्षों से कठुआ जिले में स्वास्थ्य विभाग, ड्रग कंट्रोल विभाग, पुलिस और प्रशासन की नाक तले यह चलते रहे और किसी ने भी इनकी मान्यता तक जानने की जहमत नहीं उठाई।

नशा मुक्ति केंद्र को सील करते हुए प्रशासनिक टीम
