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Kathua News: अवैध शराब बिक्री के सात साल पुराने मामले में आरोपी बरी
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Thu, 30 Apr 2026 01:41 AM IST
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अदालत से
कोर्ट ने सहायक निरीक्षण की ओर से की गई जांच पर उठाए सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने सात साल पुराने आबकारी मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार मामले की जांच एक ऐसे अधिकारी ने की है जो इस जांच को करने के लिए सक्षम नहीं था। इसलिए आरोपी के खिलाफ दायर आरोपपत्र खारिज कर उसे बरी करने का फैसला सुना दिया है।
यह याचिका न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्ष्य बडयाल की अदालत में दायर की गई थी। चालान के अनुसार राजबाग पुलिस ने 12 मार्च 2019 को आरोपी राजेश कुमार निवासी अमाला को छन्न अरोड़ियां राष्ट्रीय राजमार्ग पर शराब के साथ गिरफ्तार किया था। आरोपी पर अवैध तरीके से ग्राहकों को शराब बेचने का आरोप था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 48-एफ के तहत एफआईआर दर्ज कर चालान 30 मार्च 2019 को प्रस्तुत किया।
16 मई 2019 को उसके खिलाफ आरोप तय किए गए। इसमें उसने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमा चलाने की अपील की। गत वर्ष 16 अक्टूबर को आरोपी के वकील ने अदालत में एक आवेदन दायर किया था। उन्होंने कहा कि आबकारी अधिनियम के मामलों की जांच किसी ऐसे अधिकारी की ओर से नहीं की जा सकती जो आबकारी निरीक्षक के समकक्ष शक्तियों से लैस न हो। पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक से नीचे रैंक का हो। इस मामले की जांच एक सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) ने की है इसलिए कानून के मुताबिक पूरी जांच पर सवाल खड़ा होता है।
सरकारी पक्ष ने आवेदन का विरोध करते हुए दलील दी कि आरोपी ने समय नष्ट करने और मुकदमे को प्रभावित करने के उद्देश्य से यह आवेदन दाखिल किया है। अभियोजन ने कहा कि अभी तक गवाहों के बयान भी दर्ज नहीं हुए हैं और केवल जांच अधिकारी की कथित अक्षमता के आधार पर मुकदमे को बीच में समाप्त करना उचित नहीं होगा।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कानून की धाराओं का विश्लेषण किया। अदालत ने कहा कि यदि मामले की जांच किसी अक्षम अधिकारी की ओर से की गई हो तो ऐसी जांच विधिपूर्ण नहीं मानी जा सकती। इसके बाद अदालत ने गत 24 अप्रैल को मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर और आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया गया।
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कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने सात साल पुराने आबकारी मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार मामले की जांच एक ऐसे अधिकारी ने की है जो इस जांच को करने के लिए सक्षम नहीं था। इसलिए आरोपी के खिलाफ दायर आरोपपत्र खारिज कर उसे बरी करने का फैसला सुना दिया है।
यह याचिका न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्ष्य बडयाल की अदालत में दायर की गई थी। चालान के अनुसार राजबाग पुलिस ने 12 मार्च 2019 को आरोपी राजेश कुमार निवासी अमाला को छन्न अरोड़ियां राष्ट्रीय राजमार्ग पर शराब के साथ गिरफ्तार किया था। आरोपी पर अवैध तरीके से ग्राहकों को शराब बेचने का आरोप था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 48-एफ के तहत एफआईआर दर्ज कर चालान 30 मार्च 2019 को प्रस्तुत किया।
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16 मई 2019 को उसके खिलाफ आरोप तय किए गए। इसमें उसने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमा चलाने की अपील की। गत वर्ष 16 अक्टूबर को आरोपी के वकील ने अदालत में एक आवेदन दायर किया था। उन्होंने कहा कि आबकारी अधिनियम के मामलों की जांच किसी ऐसे अधिकारी की ओर से नहीं की जा सकती जो आबकारी निरीक्षक के समकक्ष शक्तियों से लैस न हो। पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक से नीचे रैंक का हो। इस मामले की जांच एक सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) ने की है इसलिए कानून के मुताबिक पूरी जांच पर सवाल खड़ा होता है।
सरकारी पक्ष ने आवेदन का विरोध करते हुए दलील दी कि आरोपी ने समय नष्ट करने और मुकदमे को प्रभावित करने के उद्देश्य से यह आवेदन दाखिल किया है। अभियोजन ने कहा कि अभी तक गवाहों के बयान भी दर्ज नहीं हुए हैं और केवल जांच अधिकारी की कथित अक्षमता के आधार पर मुकदमे को बीच में समाप्त करना उचित नहीं होगा।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कानून की धाराओं का विश्लेषण किया। अदालत ने कहा कि यदि मामले की जांच किसी अक्षम अधिकारी की ओर से की गई हो तो ऐसी जांच विधिपूर्ण नहीं मानी जा सकती। इसके बाद अदालत ने गत 24 अप्रैल को मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर और आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया गया।
