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Kathua News: जीएमसी में दो साल से धूल फांक रहीं करोड़ों की एंडोस्कोपी व बायोप्सी मशीनें
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 24 Mar 2026 01:38 AM IST
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पेट रोग विशेषज्ञ (गैस्ट्रोलॉजिस्ट) की तैनाती न होने से शोपीस बनीं से अत्याधुनिक मशीनें
मरीजों को निजी लैबों में पांच से छह हजार रुपये करने पड़ रहे हैँ खर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में पिछले दो साल से करोड़ों की एंडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी और बायोप्सी मशीनें धूल फांक रही हैं। अस्पताल में पेट रोग विशेषज्ञ (गैस्ट्रोलॉजिस्ट) की तैनाती न होने से अत्याधुनिक मशीनें मात्र शोपीस बनकर रह गई हैं। इसका खामियाजा टेस्ट के लिए अस्पताल आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। सुविधा नहीं मिलने के कारण मरीजों को निजी लैबों में पांच से छह हजार की राशि चुकानी पड़ रही है।
अस्पताल प्रशासन ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से मशीनें खरीदीं थीं उस समय अस्पताल में एक पेट रोग विशेषज्ञ की तैनाती थी। अस्पताल प्रबंधन ने यह तैनाती एसआरओ 364 के अंतर्गत शैक्षणिक व्यवस्था के आधार पर की थी। इसी बीच विशेषज्ञ डॉक्टर अस्पताल छोड़कर चले गए। विशेषज्ञ चिकित्सक का पद खाली पड़े दो साल हो गए हैं जिस कारण करोड़ों की मशीनें बेकार पड़ी हुई हैं। अस्पताल में स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं होने से यहां आने वाले मरीजों को इनके लिए या तो निजी लैब या फिर जीएमसी जम्मू जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
बता दें कि जीएमसी के सहायक अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी में रोजाना पेट से जुड़ी बीमारियों के दर्जनों मरीज आते हैं। स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार निजी अस्पतालों में कोलोनोस्कोपी जांच के लिए तीन से चार हजार रुपये और एंडोस्कोपी के लिए पांच से छह हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। मरीजों का कहना है कि अगर अस्पताल में स्पेशलिस्ट डॉक्टर की तैनाती हो तो यह जांच सुविधा मात्र 200 से 300 रुपये में उपलब्ध हो सकती है।
कोट
मरीजों की जरूरतों को देखते हुए अत्याधुनिक मशीनों को स्थापित किया गया था लेकिन इसी बीच पेट रोग विशेषज्ञ ने पद से इस्तीफा दे दिया। तब से अस्पताल में यह सुविधा ठप पड़ी है। स्पेशलिस्ट डॉक्टर के रिक्त पड़े पद को लेकर स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को सूचित किया जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही डॉक्टर की तैनाती होगी और इन सुविधाओं का मरीजों को लाभ मिलेगा।
- सुरिंदर अत्री, प्रधानाचार्य, जीएमसी कठुआ
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मरीजों को निजी लैबों में पांच से छह हजार रुपये करने पड़ रहे हैँ खर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में पिछले दो साल से करोड़ों की एंडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी और बायोप्सी मशीनें धूल फांक रही हैं। अस्पताल में पेट रोग विशेषज्ञ (गैस्ट्रोलॉजिस्ट) की तैनाती न होने से अत्याधुनिक मशीनें मात्र शोपीस बनकर रह गई हैं। इसका खामियाजा टेस्ट के लिए अस्पताल आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। सुविधा नहीं मिलने के कारण मरीजों को निजी लैबों में पांच से छह हजार की राशि चुकानी पड़ रही है।
अस्पताल प्रशासन ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से मशीनें खरीदीं थीं उस समय अस्पताल में एक पेट रोग विशेषज्ञ की तैनाती थी। अस्पताल प्रबंधन ने यह तैनाती एसआरओ 364 के अंतर्गत शैक्षणिक व्यवस्था के आधार पर की थी। इसी बीच विशेषज्ञ डॉक्टर अस्पताल छोड़कर चले गए। विशेषज्ञ चिकित्सक का पद खाली पड़े दो साल हो गए हैं जिस कारण करोड़ों की मशीनें बेकार पड़ी हुई हैं। अस्पताल में स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं होने से यहां आने वाले मरीजों को इनके लिए या तो निजी लैब या फिर जीएमसी जम्मू जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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बता दें कि जीएमसी के सहायक अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी में रोजाना पेट से जुड़ी बीमारियों के दर्जनों मरीज आते हैं। स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार निजी अस्पतालों में कोलोनोस्कोपी जांच के लिए तीन से चार हजार रुपये और एंडोस्कोपी के लिए पांच से छह हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। मरीजों का कहना है कि अगर अस्पताल में स्पेशलिस्ट डॉक्टर की तैनाती हो तो यह जांच सुविधा मात्र 200 से 300 रुपये में उपलब्ध हो सकती है।
कोट
मरीजों की जरूरतों को देखते हुए अत्याधुनिक मशीनों को स्थापित किया गया था लेकिन इसी बीच पेट रोग विशेषज्ञ ने पद से इस्तीफा दे दिया। तब से अस्पताल में यह सुविधा ठप पड़ी है। स्पेशलिस्ट डॉक्टर के रिक्त पड़े पद को लेकर स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को सूचित किया जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही डॉक्टर की तैनाती होगी और इन सुविधाओं का मरीजों को लाभ मिलेगा।
- सुरिंदर अत्री, प्रधानाचार्य, जीएमसी कठुआ