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Kathua News: मारपीट और लूट के मामले में तीन आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Mon, 13 Apr 2026 01:36 AM IST
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वर्ष 2015 का शहर से सटे चक द्राब खान का है मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिला न्यायिक मोबाइल मजिस्ट्रेट ने मारपीट और लूट के 10 साल पुराने मामले में तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। आदेश के अनुसार अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने में विफल रहा। कोर्ट ने यह फैसला गवाहों की विरोधाभासी बयान के बाद सुनाया है। यह मामला मूल रूप से जमीन विवाद का था जिसे आपराधिक रंग दिया गया।
जिला न्यायिक मोबाइल मजिस्ट्रेट पूनम गुप्ता की कोर्ट में दायर चालान के अनुसार मामला 14 अप्रैल 2015 का चक द्राब खान गांव का है। इसमें आरोपी मेहबूब आलम, कमलो बेगम और सलीमा बेगम निवासी चक द्राब खान पर आरोप था कि तीनों ने घटना के दिन शिकायतकर्ता से मारपीट कर उससे पैसे छीने थे। शिकायतकर्ता अजय कुमार ने आरोप लगाया था कि उसने मेहबूब आलम के भाई से जमीन खरीदी थी। 14 अप्रैल को जब वह जमीन पर पहुंचा तो आरोपी वहां निर्माण सामग्री डाल रहे थे। विरोध करने पर आरोपियों ने मारपीट की और m गले में कपड़ा डालकर दबाने की कोशिश की। इसके बाद 4,600 रुपये छीन लिए। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरपीसी की धारा 382 (डकैती), 323 (मारपीट) और 201 (सबूत मिटाना) के तहत मामला दर्ज किया गया और चालान को कोर्ट में 26 दिसंबर 2015 को प्रस्तुत किया गया था।
कोर्ट में तीनों आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमा चलाए जाने की मांग की। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने कुल 7 में से 5 की गवाही करवाई। शिकायतकर्ता ने कहा कि उसे ईंट मारकर घायल किया गया। बाद में इसकी कोई मेडिकल रिपोर्ट पेश नहीं की गई। एक गवाह ने कहा कि आरोपियों ने मोटरसाइकिल गिराई, जबकि शिकायतकर्ता ने ईंट फेंकने की बात कही। वहीं, पैसों की छीना-झपटी पर भी कोर्ट ने विरोधाभास पाया। किसी ने कहा कि राशि 4,600 रुपये थी तो किसी ने उसे 2600 रुपये बताया। इसके बाद जांच अधिकारी ने कहा कि लूट की बात केवल शिकायतकर्ता ने कही अन्य किसी गवाह ने इसकी पुष्टि नहीं की थी। इसके अलावा शिकायतकर्ता कोर्ट में जमीन के स्वामित्व से जुड़े ठोस दस्तावेज भी पेश नहीं कर पाया। इसके बाद कोर्ट गवाहों की गवाही और मौजूदा रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर पाया कि मामला मूल रूप से जमीन विवाद का था जिसे आपराधिक रंग दिया गया। इसके बाद कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।
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कठुआ। जिला न्यायिक मोबाइल मजिस्ट्रेट ने मारपीट और लूट के 10 साल पुराने मामले में तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। आदेश के अनुसार अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने में विफल रहा। कोर्ट ने यह फैसला गवाहों की विरोधाभासी बयान के बाद सुनाया है। यह मामला मूल रूप से जमीन विवाद का था जिसे आपराधिक रंग दिया गया।
जिला न्यायिक मोबाइल मजिस्ट्रेट पूनम गुप्ता की कोर्ट में दायर चालान के अनुसार मामला 14 अप्रैल 2015 का चक द्राब खान गांव का है। इसमें आरोपी मेहबूब आलम, कमलो बेगम और सलीमा बेगम निवासी चक द्राब खान पर आरोप था कि तीनों ने घटना के दिन शिकायतकर्ता से मारपीट कर उससे पैसे छीने थे। शिकायतकर्ता अजय कुमार ने आरोप लगाया था कि उसने मेहबूब आलम के भाई से जमीन खरीदी थी। 14 अप्रैल को जब वह जमीन पर पहुंचा तो आरोपी वहां निर्माण सामग्री डाल रहे थे। विरोध करने पर आरोपियों ने मारपीट की और m गले में कपड़ा डालकर दबाने की कोशिश की। इसके बाद 4,600 रुपये छीन लिए। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरपीसी की धारा 382 (डकैती), 323 (मारपीट) और 201 (सबूत मिटाना) के तहत मामला दर्ज किया गया और चालान को कोर्ट में 26 दिसंबर 2015 को प्रस्तुत किया गया था।
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कोर्ट में तीनों आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमा चलाए जाने की मांग की। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने कुल 7 में से 5 की गवाही करवाई। शिकायतकर्ता ने कहा कि उसे ईंट मारकर घायल किया गया। बाद में इसकी कोई मेडिकल रिपोर्ट पेश नहीं की गई। एक गवाह ने कहा कि आरोपियों ने मोटरसाइकिल गिराई, जबकि शिकायतकर्ता ने ईंट फेंकने की बात कही। वहीं, पैसों की छीना-झपटी पर भी कोर्ट ने विरोधाभास पाया। किसी ने कहा कि राशि 4,600 रुपये थी तो किसी ने उसे 2600 रुपये बताया। इसके बाद जांच अधिकारी ने कहा कि लूट की बात केवल शिकायतकर्ता ने कही अन्य किसी गवाह ने इसकी पुष्टि नहीं की थी। इसके अलावा शिकायतकर्ता कोर्ट में जमीन के स्वामित्व से जुड़े ठोस दस्तावेज भी पेश नहीं कर पाया। इसके बाद कोर्ट गवाहों की गवाही और मौजूदा रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर पाया कि मामला मूल रूप से जमीन विवाद का था जिसे आपराधिक रंग दिया गया। इसके बाद कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।