{"_id":"69fe487aee4e1171cd01c952","slug":"jammu-kashmir-news-poonch-news-c-274-1-rsp1001-102696-2026-05-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Poonch News: 65 साल पुराना लोहे का पुल असुरक्षित घोषित, दर्जनों गांव प्रभावित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Poonch News: 65 साल पुराना लोहे का पुल असुरक्षित घोषित, दर्जनों गांव प्रभावित
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अरनिया। आदर्श पंचायत आल्हा के काकू दे कोठे गांव में गोलाबारी के दौरान लाइफलाइन का काम करने वाले 65 साल पुराने लोहे के पुल को पीडब्ल्यूडी विभाग ने असुरक्षित घोषित कर दिया है। पुल के लकड़ी के तख्ते क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इससे आल्हा और काकू दे कोठे गांवों के बीच आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। दर्जनों सीमावर्ती गांवों के लोग इस सुविधा से वंचित हो रहे हैं। खेतीबाड़ी के लिए ट्रैक्टर तक नहीं पहुंच पा रहे। लोगों को विजयपुर और सांबा पहुंचने के लिए शॉर्टकट की बजाय लंबा सफर तय करना पड़ रहा है।
पुल का कोई और विकल्प न होने से ग्रामीण असुरक्षित होने के बावजूद जोखिम उठाकर गुजरने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासियों ने चिंता जताई कि यदि आज गोलाबारी शुरू हो गई तो लोग सुरक्षित जगहों तक नहीं पहुंच पाएंगे और जान का खतरा हो जाएगा।
गांव आल्हा के स्थानीय निवासी कुलदीप राज ने कहा कि समय रहते पीडब्ल्यूडी को विकल्प तैयार करना चाहिए था। इससे साफ प्रतीत होता है कि सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों की कोई परवाह नहीं है।
विज्ञापन
आदर्श गांव आल्हा के पूर्व उप सरपंच लवली सिंह ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज के नोडल अधिकारी अश्विनी कुमार को भी पुल के मुद्दे से अवगत करवाया गया है। पुल असुरक्षित घोषित होने के बाद लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि पीडब्ल्यूडी विभाग को तत्काल कोई विकल्प तैयार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शीघ्र नया पुल बनाया जाए ताकि सीमावर्ती इलाके में आपात स्थिति में कोई खतरा न रहे। (संवाद)
मरम्मत का प्रस्ताव लेकिन स्थानीय विरोध
पीडब्ल्यूडी विभाग ने पुल की मरम्मत के लिए 20 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा है। इसमें क्षतिग्रस्त लकड़ी के तख्ते हटाकर लोहे की चादर डालने का प्लान है। विभाग ने पुल पर बोर्ड लगाकर अपना कर्त्तव्य निभा दिया है। हालांकि स्थानीय लोग मरम्मत का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि पुल सारा कबाड़ हो चुका है, मरम्मत से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि नया पुल ही बनाना चाहिए।
10 पंचायतों की 20 हजार आबादी प्रभावित
लोहे का पुल असुरक्षित घोषित होने के बाद सीमावर्ती क्षेत्र की 10 पंचायतों की लगभग 20000 आबादी प्रभावित हो रही है। सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को लोहे के पुल से शॉर्टकट 5 मिनट में रास्ता तय हो जाता था। अब लोगों को आधा घंटा ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। लोगों को समय की बर्बादी के साथ आर्थिक नुकसान भी हो रहा है।
कोट
पुल की मरम्मत के लिए 20 लाख का प्रस्ताव भेजा गया है। अगले एक सप्ताह में टेंडर हो जाएगा। नए पुल के लिए भी प्रस्ताव रखा गया है। मंजूरी मिलते ही निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल के लिए सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए पुल की मरम्मत करवा दी जाएगी।
-पुरुषोत्तम कुमार, जेई, पीडब्ल्यूडी
पुल का कोई और विकल्प न होने से ग्रामीण असुरक्षित होने के बावजूद जोखिम उठाकर गुजरने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासियों ने चिंता जताई कि यदि आज गोलाबारी शुरू हो गई तो लोग सुरक्षित जगहों तक नहीं पहुंच पाएंगे और जान का खतरा हो जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
गांव आल्हा के स्थानीय निवासी कुलदीप राज ने कहा कि समय रहते पीडब्ल्यूडी को विकल्प तैयार करना चाहिए था। इससे साफ प्रतीत होता है कि सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों की कोई परवाह नहीं है।
आदर्श गांव आल्हा के पूर्व उप सरपंच लवली सिंह ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज के नोडल अधिकारी अश्विनी कुमार को भी पुल के मुद्दे से अवगत करवाया गया है। पुल असुरक्षित घोषित होने के बाद लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि पीडब्ल्यूडी विभाग को तत्काल कोई विकल्प तैयार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शीघ्र नया पुल बनाया जाए ताकि सीमावर्ती इलाके में आपात स्थिति में कोई खतरा न रहे। (संवाद)
मरम्मत का प्रस्ताव लेकिन स्थानीय विरोध
पीडब्ल्यूडी विभाग ने पुल की मरम्मत के लिए 20 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा है। इसमें क्षतिग्रस्त लकड़ी के तख्ते हटाकर लोहे की चादर डालने का प्लान है। विभाग ने पुल पर बोर्ड लगाकर अपना कर्त्तव्य निभा दिया है। हालांकि स्थानीय लोग मरम्मत का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि पुल सारा कबाड़ हो चुका है, मरम्मत से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि नया पुल ही बनाना चाहिए।
10 पंचायतों की 20 हजार आबादी प्रभावित
लोहे का पुल असुरक्षित घोषित होने के बाद सीमावर्ती क्षेत्र की 10 पंचायतों की लगभग 20000 आबादी प्रभावित हो रही है। सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को लोहे के पुल से शॉर्टकट 5 मिनट में रास्ता तय हो जाता था। अब लोगों को आधा घंटा ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। लोगों को समय की बर्बादी के साथ आर्थिक नुकसान भी हो रहा है।
कोट
पुल की मरम्मत के लिए 20 लाख का प्रस्ताव भेजा गया है। अगले एक सप्ताह में टेंडर हो जाएगा। नए पुल के लिए भी प्रस्ताव रखा गया है। मंजूरी मिलते ही निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल के लिए सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए पुल की मरम्मत करवा दी जाएगी।
-पुरुषोत्तम कुमार, जेई, पीडब्ल्यूडी